रणथंभौर की मशहूर बाघिन सुल्ताना ने फिर बनाया मां बनने का रिकॉर्ड: दो नन्हे शावकों को मुंह में दबाकर घूमती रही, मंदिर मार्ग आधे घंटे बंद
राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में मशहूर और गुस्सैल बाघिन सुल्ताना (टी-107) ने दो नन्हे शावकों को जन्म दिया है। वह अपने शावकों को मुंह में दबाकर अपनी पसंदीदा जगह मिश्रदर्रा गेट की गुफा से जंगल की सुरक्षित टेरिटरी में शिफ्ट करती नजर आई। इस दौरान गणेश धाम मंदिर मार्ग को सुरक्षा कारणों से आधे घंटे तक बंद रखा गया। सुल्ताना का यह चौथा लिटर है और उसके मजबूत प्रजनन रिकॉर्ड से रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़कर लगभग 73-82 हो गई है, जो संरक्षण की बड़ी सफलता है। वन विभाग ने मां और शावकों की निगरानी बढ़ा दी है।
राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व से एक बार फिर वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी आई है। रिजर्व की सबसे गुस्सैल और चर्चित बाघिन टी-107 सुल्ताना ने दो नन्हे शावकों को जन्म दिया है। यह उसका चौथा लिटर (प्रसव) है। बाघिन हमेशा की तरह अपनी पसंदीदा जगह पर शावकों को जन्म देकर मां बनने का अपना मजबूत रिकॉर्ड कायम रखा है।
घटना का विवरण: शावकों को मुंह में लेकर घूमती बाघिन शुक्रवार सुबह की यह घटना रणथंभौर फोर्ट से त्रिनेत्र गणेश धाम मंदिर जाने वाले मार्ग की है। कुछ श्रद्धालु गणेश धाम दर्शन के लिए पहुंचे थे, तभी उन्हें मिश्रदर्रा गेट के पास बाघिन सुल्ताना दिखी। बाघिन अपने दो नन्हे शावकों को मुंह में दबाकर इधर-उधर घूम रही थी। वह शावकों को सुरक्षित जगह से अपनी टेरिटरी (जोन नंबर-1) में शिफ्ट कर रही थी। सुरक्षा के मद्देनजर वन विभाग ने रणथंभौर फोर्ट से गणेश धाम तक का करीब ढाई किलोमीटर लंबा मार्ग आधे घंटे के लिए पूरी तरह बंद कर दिया। बाघिन के दुर्ग से गणेश धाम के बीच घूमने के दौरान कोई जोखिम न हो, इसलिए यह कदम उठाया गया। जैसे ही बाघिन अपने दोनों शावकों को जंगल की सुरक्षित टेरिटरी में ले गई, मार्ग को दोबारा खोल दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाघिन ने शावकों को जन्म देने के करीब एक महीने बाद उन्हें गुफा से जंगल में शिफ्ट किया। यह उसकी पसंदीदा जगह मिश्रदर्रा गेट के पास बनी गुफा है, जहां पहले भी उसके शावक हुए हैं।
बाघिन सुल्ताना का मजबूत प्रजनन रिकॉर्ड बाघिन सुल्ताना (टी-107) रणथंभौर की प्रसिद्ध बाघिन टी-39 (नूर) की बेटी है और इसकी उम्र करीब 9 साल है। वह रिजर्व की सबसे dominant और aggressive बाघिनों में शुमार है। उसका प्रजनन रिकॉर्ड बेहद मजबूत रहा है: पहला लिटर (नवंबर 2020): अमरेश्वर वन क्षेत्र में दो शावक। दूसरा लिटर (2022): दो शावक (इनमें से एक शावक मिश्रदर्रा गेट के गौमुख कुंड में गिर गया था)। तीसरा लिटर (अगस्त 2023): तीन शावक।चौथा लिटर (2025): दो शावक (हालिया जन्म, पहले अप्रैल में अपुष्ट खबरें थीं, अब शिफ्टिंग से पुष्टि)। सुल्ताना जोन नंबर-1 की dominant बाघिन है और उसके शावक ज्यादातर मिश्रदर्रा क्षेत्र में ही होते हैं।
रणथंभौर में बाघों की बढ़ती संख्या डीएफओ मानस सिंह के अनुसार, सुल्ताना के इन दो नए शावकों के साथ रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघ, बाघिन और शावकों की कुल संख्या लगभग 73-82 के आसपास पहुंच गई है (2025 के मध्य तक के अनुमान के आधार पर, जिसमें नए जन्म शामिल)। रिजर्व में बाघ संरक्षण की यह सफलता वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणकर्ताओं के लिए बड़ी उपलब्धि है।2025 में अब तक कई बाघिनों ने शावकों को जन्म दिया है, जैसे:बाघिन शक्ति (टी-111): दो शावक।अन्य बाघिनों ने भी 2-4 शावक दिए।रणथंभौर भारत के सबसे घने बाघ आबादी वाले रिजर्वों में से एक है, जहां शावक कुल आबादी का बड़ा हिस्सा हैं। हालांकि बढ़ती संख्या से टेरिटरी की कमी और मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती भी बढ़ रही है।वन विभाग ने बाघिन सुल्ताना और उसके शावकों की निगरानी बढ़ा दी है। कैमरा ट्रैप और पैट्रोलिंग से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। यह घटना रणथंभौर के संरक्षण प्रयासों की सफलता का जीता-जागता प्रमाण है, जहां प्रकृति और वन्यजीवों का संतुलन बरकरार रखने की कोशिशें लगातार जारी हैं।