रामनिवास बाग से चुराए गए 90 लाख के चंदन के पेड़: CAG ने खोली सिस्टम की मिलीभगत, जिम्मेदार सिक्योरिटी कंपनी से नहीं हुई वसूली
जयपुर के ऐतिहासिक रामनिवास बाग से 60 साल पुराने तीन चंदन के पेड़ चोरी हो गए, जिनकी कीमत 90 लाख रुपये बताई गई। सुरक्षा की जिम्मेदारी सहारा एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर सोसायटी पर थी, लेकिन चोरी के बावजूद कंपनी से वसूली नहीं की गई और उसका ठेका बार-बार बढ़ाया गया। CAG रिपोर्ट में इसे सिस्टम में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत बताया गया है और 90 लाख रुपये की वसूली तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
जयपुर के ऐतिहासिक रामनिवास बाग (सावन-भादौ पार्क) से रियासतकालीन 60 साल पुराने चंदन के तीन मूल्यवान पेड़ चोरी हो गए। इन पेड़ों की अनुमानित कीमत 90 लाख रुपये बताई गई है। इस गंभीर चोरी के मामले में अब भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूरे सिस्टम में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत का आरोप लगाया है। CAG की ऑडिट रिपोर्ट में इस घटना को 'लीपापोती' करार दिया गया है और जिम्मेदारों से 90 लाख रुपये की वसूली तथा सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
चोरी की घटनाएँ और समय
पहली चोरी: जुलाई 2019 में दो चंदन के पेड़ काटकर ले जाए गए।दूसरी चोरी: जनवरी 2020 में एक और चंदन का पेड़ चोरी हो गया।दोनों चोरियों के बीच केवल 7 महीने का अंतर था। 26 जुलाई 2019 और 7 फरवरी 2020 को इस संबंध में अलग-अलग FIR दर्ज कराई गई थीं।
सुरक्षा की जिम्मेदारी किस पर थी?
जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने रामनिवास बाग की सुरक्षा का ठेका सहारा एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड को सौंपा था।17 जून 2019 को इस कंपनी को एक साल के लिए अनुबंध दिया गया था।अनुबंध के अनुसार, यदि सुरक्षा के बावजूद कोई चोरी या नुकसान होता है तो उसकी भरपाई सुरक्षा एजेंसी से की जा सकती थी।काम संतोषजनक न होने पर कंपनी को तुरंत हटाया जा सकता था और ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता था।कंपनी ने इस काम के लिए 30 सुरक्षाकर्मियों (सुपरवाइजर सहित) की तैनाती की थी।हैरानी की बात यह है कि इतने गार्डों के बावजूद चोर आराम से 60 साल पुराने भारी चंदन के पेड़ काटकर ले गए।
जांच रिपोर्टों में क्या निकला?
JDA के अतिरिक्त आयुक्त ने 14 फरवरी 2020 को अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से सहारा एजेंसी के सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत बताई और उन्हें हटाने की सिफारिश की।JDA के वरिष्ठ उद्यानविज्ञ (Senior Horticulturist) ने 5 मार्च 2020 को कंपनी को नोटिस जारी किया और चंदन के पेड़ों की कीमत का आकलन कर वसूली की सिफारिश की।वन संरक्षक की रिपोर्ट में भी सुरक्षा एजेंसी और JDA के इंस्पेक्टर को दोषी ठहराया गया।चंदन की कीमत का आकलन 10,000 रुपये प्रति किलो किया गया। एक पेड़ की कीमत लगभग 30 लाख रुपये बताई गई, यानी तीन पेड़ों का कुल नुकसान 90 लाख रुपये।27 अक्टूबर 2021 को JDA के वरिष्ठ उद्यानविज्ञ ने फिर से जांच रिपोर्ट में कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की। रिपोर्ट में सुरक्षाकर्मियों द्वारा नागरिकों से अवैध वसूली, सुपरवाइजर न लगाने और लापरवाही से चंदन के पेड़ कटने का जिक्र था।
CAG की तल्ख टिप्पणी
CAG रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि चंदन के पेड़ चोरी होने के बावजूद सुरक्षा एजेंसी का ठेका बार-बार बढ़ाया जाना स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सिस्टम में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत थी।
CAG ने निम्नलिखित पर कड़ी आपत्ति जताई:चोरी के बावजूद सुरक्षा कंपनी से नुकसान की वसूली नहीं की गई।गंभीर शिकायतों और जांच रिपोर्टों के बावजूद कंपनी का अनुबंध लगातार बढ़ाया जाता रहा।जांच रिपोर्टों को दबाने की कोशिश की गई।जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई।CAG ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि 90 लाख रुपये की वसूली सुरक्षा एजेंसी से की जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
अनुबंध की मुख्य शर्तें (जो टूटीं)
शर्त संख्या 8: सुरक्षा के बावजूद चोरी या नुकसान होने पर एजेंसी से वसूली की जा सकती है।शर्त संख्या 10: काम संतोषजनक न होने पर कंपनी की सेवाएं तुरंत समाप्त कर ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
निष्कर्ष
यह मामला केवल चंदन के पेड़ों की चोरी नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा, ठेकेदारी प्रणाली और प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण है। CAG की रिपोर्ट ने पूरे सिस्टम की मिलीभगत को उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि CAG की सिफारिशों पर जेडीए और संबंधित विभाग कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं और दोषियों से 90 लाख रुपये की वसूली हो पाती है या नहीं।