पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक—कई नेताओं की जिम्मेदारी बदली!
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने के लिए बड़ा फेरबदल किया है। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 50 संगठनात्मक जिलों में नए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। इनका काम जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेना और चुनावी तैयारी को गति देना होगा।
जयपुर। राजस्थान में आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश नेतृत्व ने राज्य के सभी 50 संगठनात्मक जिलों में प्रभारी और सह-प्रभारियों की नई नियुक्तियां करते हुए व्यापक फेरबदल किया है। यह निर्णय जमीनी स्तर पर पार्टी को सक्रिय और सशक्त बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शुक्रवार को इन नियुक्तियों के आदेश जारी किए। नई सूची के अनुसार 37 नेताओं को जिला प्रभारी और लगभग इतने ही नेताओं को सह-प्रभारी बनाया गया है। खास बात यह है कि इस नियुक्ति में अनुभव और संगठनात्मक क्षमता दोनों को प्राथमिकता दी गई है।
अनुभव और नए चेहरों का संतुलन
नई टीम में 6 वर्तमान विधायक और करीब 9 पूर्व विधायकों को जिम्मेदारी दी गई है। कई पुराने और अनुभवी नेताओं को फिर से मौका दिया गया है, जबकि कुछ पदाधिकारियों को जिलाध्यक्ष बनने के बाद नई जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया है।
वहीं सह-प्रभारी पदों पर उन नेताओं को जगह मिली है, जिन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान ऑब्जर्वर के रूप में बेहतर प्रदर्शन किया था।
संगठन विस्तार पर फोकस
प्रदेश में पिछले वर्ष संगठन सृजन अभियान के तहत जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पूरी हो चुकी है। वर्तमान में जिला कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया जारी है। इसी क्रम में 1 अप्रैल से “संगठन बढ़ाओ-लोकतंत्र बचाओ” अभियान भी शुरू किया गया है, जिसके तहत पार्टी को ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर तक मजबूत करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
फीडबैक सिस्टम से होगी मॉनिटरिंग
नए नियुक्त प्रभारी और सह-प्रभारी अपने-अपने जिलों में नियमित दौरे करेंगे। वे संगठनात्मक बैठकों का आयोजन करेंगे, कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करेंगे और उनकी राय व सुझाव जुटाकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को रिपोर्ट सौंपेंगे। इससे संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी।
प्रमुख जिलों में बनाए गए प्रभारी
प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिन नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है, उनमें अजमेर, नागौर, टोंक, भरतपुर, बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, जयपुर शहर-ग्रामीण, सीकर, बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर, जोधपुर, पाली, उदयपुर, कोटा, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर और राजसमंद सहित सभी प्रमुख संगठनात्मक जिले शामिल हैं।
जोधपुर शहर और ग्रामीण की जिम्मेदारी विक्रम सिंह शेखावत को सौंपी गई है, जबकि अन्य जिलों में भी स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नियुक्तियां की गई हैं।
चुनाव से पहले रणनीतिक कदम
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह फेरबदल सीधे तौर पर आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है। पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना है।
राजस्थान कांग्रेस का यह संगठनात्मक बदलाव चुनावी तैयारियों को गति देने और जमीनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि यह नई टीम आगामी चुनावों में पार्टी को कितना फायदा दिला पाती है।