दशहरा पर गुजरात दौरे का विवरण
2 अक्टूबर 2025 को दशहरा के मौके पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुजरात के कच्छ जिले के भुज पहुंचे। यहां भारतीय सेना के एक मिलिट्री बेस पर शस्त्र पूजा से ठीक पहले उन्होंने सैनिकों को संबोधित किया। यह दौरा न केवल त्योहारी परंपरा को निभाने का अवसर था, बल्कि सीमा सुरक्षा पर भारत की दृढ़ नीति को रेखांकित करने का भी। कच्छ की संवेदनशील सीमा पर स्थित भुज सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जहां से सर क्रीक क्षेत्र की निगरानी की जाती है। राजनाथ सिंह ने सैनिकों की हौसला अफजाई की और कहा कि राष्ट्र की रक्षा में उनकी भूमिका अमूल्य है।
पाकिस्तान को सख्त चेतावनी: नीयत में खोट
रक्षा मंत्री ने सर क्रीक सीमा विवाद को लेकर पाकिस्तान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "आजादी के 78 साल बाद भी सर क्रीक में सीमा को लेकर विवाद खड़ा किया जाता है। भारत ने कई बार बातचीत के जरिए इसे सुलझाने की कोशिश की है, लेकिन पाकिस्तान की नीयत में खोट है, उसकी नीयत साफ नहीं है।" राजनाथ सिंह ने हाल ही में पाकिस्तान द्वारा सर क्रीक से सटे इलाकों में सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने का जिक्र किया, जो उनकी आक्रामक मंशा को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी, "अगर सर क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर से कोई हिमाकत की गई, तो उसे ऐसा करारा जवाब मिलेगा कि इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे।" इसके अलावा, उन्होंने स्पष्ट कहा, "2025 में पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि कराची का रास्ता सर क्रीक से होकर गुजरता है।"
सर क्रीक विवाद का पृष्ठभूमि
सर क्रीक भारत और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य है, जो गुजरात के कच्छ से लगता है। 1965 के युद्ध के बाद से यह क्षेत्र विवादित रहा है, जहां दोनों देश अपनी-अपनी दावेदारी करते हैं। भारत का मानना है कि यह पूरी तरह से भारतीय क्षेत्र है, जबकि पाकिस्तान इसका हिस्सा होने का दावा करता है। कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। हाल के वर्षों में पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र में सैन्य निर्माण बढ़ाने की खबरें आ रही हैं, जो तनाव को बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद न केवल सीमा सुरक्षा, बल्कि समुद्री संसाधनों और व्यापारिक मार्गों से जुड़ा है।
सैनिकों का मनोबल और राष्ट्रीय संदेश
इस संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने सैनिकों से कहा कि वे सीमा पर तैनात रहकर राष्ट्र की अखंडता की रक्षा कर रहे हैं। दशहरा के शुभ अवसर पर शस्त्र पूजा के बाद सैनिकों ने पूजा-अर्चना की। यह घटना न केवल सैन्य बलों का मनोबल बढ़ाने वाली थी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति को भी प्रदर्शित करती है। रक्षा मंत्रालय ने इस बयान को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन किसी भी आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब देगा।