राजस्थान के श्रीगंगानगर में गोशाला में 100 से अधिक गायों की दर्दनाक मौत: लापरवाही और अनुदान के दुरुपयोग के गंभीर आरोप
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के भोमपुरा गांव में इच्छापूर्ण गोकुल गोशाला में प्रबंधन की घोर लापरवाही से पिछले तीन महीनों में 100 से अधिक गायों की दर्दनाक मौत हो गई। दूषित चारा, ठंड में कोई इंतजाम न होना और अनुदान-दान के पैसे के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। दानदाताओं ने गोहत्या का मुकदमा दर्ज कराया है, जबकि जिला प्रशासन ने जांच कमेटियां गठित की हैं। यह घटना देशभर में गोशालाओं की बदहाली पर सवाल उठाती है।
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र के भोमपुरा गांव में स्थित इच्छापूर्ण गोकुल गोशाला में प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण पिछले तीन महीनों में 100 से अधिक गोवंश की तड़प-तड़पकर मौत हो गई। यह गोशाला, जो गोमाता की सेवा और संरक्षण का केंद्र होना चाहिए थी, अब मौत की समाधि बन चुकी है। गोशाला के पीछे मृत गायों के शवों का ढेर लगा हुआ है, सड़ते शवों से भयंकर बदबू फैली हुई है, और प्रबंधन चोरी-छिपकर इन शवों को दफनाने में जुटा था। वर्तमान में भी करीब 60 गायें गंभीर रूप से बीमार हैं, जो सिर उठाने में असमर्थ हैं।
गोशाला की स्थापना और प्रबंधन की पृष्ठभूमि यह गोशाला वर्ष 2014 में दो ग्राम पंचायतों के लोगों के आपसी सहयोग से सरकारी भूमि पर स्थापित की गई थी। शुरुआती दिनों में इसका संचालन सुचारू रूप से चल रहा था, लेकिन करीब दो साल बाद रायसिंहनगर निवासी पालाराम बिश्नोई को प्रबंधन सौंप दिया गया। इसके बाद स्थिति लगातार बिगड़ती गई। आरोप है कि प्रबंधन ने गोशाला को अपनी निजी संपत्ति की तरह चलाया और गोवंश की देखभाल पूरी तरह नजरअंदाज कर दी।
मौतों के मुख्य कारण दूषित और फफूंदयुक्त चारा: गायों को गीला, फफूंद लगा और दूषित चारा दिया जा रहा था।सर्दी में कोई इंतजाम नहीं: कड़ाके की ठंड में न तो छांव की व्यवस्था थी और न ही सूखा चारा उपलब्ध कराया गया।कमजोरी और बीमारी: पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर संजीव मलिक ने बताया कि मौतें मुख्य रूप से कमजोरी, ठंड और दूषित चारे के कारण हुईं। मृत पशुओं के सैंपल लिए गए हैं और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजाम किया जा रहा है।
अनुदान और दान के दुरुपयोग के आरोप दानदाताओं और स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि सरकार से मिले 64 लाख रुपये के अनुदान और निजी दान की राशि को कमेटी ने हड़प लिया। गायों की देखभाल पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया। एक प्रमुख दानदाता राजन प्रकाश ने खुद 10 लाख रुपये और उनके भक्तों ने साढ़े 2.5 लाख रुपये दान दिए थे। उन्होंने कहा, "अनुदान और दान का पैसा मिला, लेकिन सब निजी खर्चों में उड़ा दिया गया। अगर थोड़ा भी गायों पर खर्च किया जाता तो यह नौबत नहीं आती।" राजन प्रकाश ने समेजा कोठी थाने में गोशाला के पूर्व अध्यक्ष पालाराम बिश्नोई, मैनेजर सुनील और अन्य कमेटी सदस्यों के खिलाफ गोहत्या का मुकदमा दर्ज कराया है।
पहले की शिकायतें और प्रशासन की अनदेखी गो रक्षा दल के अध्यक्ष बबलू भाटी ने बताया कि अक्टूबर महीने में ही इसकी शिकायत दर्ज की गई थी। पशुपालन विभाग ने प्रबंधन को 15 दिनों में सुधार के आदेश दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। साफ-सफाई शून्य थी और सर्दी के इंतजाम पूरी तरह अनुपस्थित थे।
प्रशासन की कार्रवाई मामला सामने आने और स्थानीय लोगों के प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। जिला कलेक्टर डॉ. मंजू चौधरी ने तीन जांच कमेटियां गठित की हैं, जिनमें कलेक्टर अशोक कुमार, एसडीएम सुभाष चौधरी और पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक शामिल हैं। पूर्व अध्यक्ष पालाराम बिश्नोई ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बचाव में उन्होंने कहा कि उनकी तबीयत खराब थी और बेटे की शादी में व्यस्त थे, इसलिए मौतें ठंड के कारण हुईं।
व्यापक समस्या का संकेत यह घटना केवल एक गोशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में संचालित हजारों गोशालाओं की बदहाली पर सवाल उठाती है। गो रक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये का अनुदान बांटा जाता है, लेकिन धरातल पर गोमाता तड़प-तड़पकर मर रही हैं। स्थानीय लोग और गोभक्तों में भारी गुस्सा है। वे मांग कर रहे हैं कि जांच केवल औपचारिकता न बने और असली दोषियों को सख्त सजा मिले।