राजस्थान सरकार का बड़ा एक्शन IAS अर्चना सिंह को किया APO.
बांसवाड़ा में पीएम मोदी के भव्य कार्यक्रम के दौरान स्क्रीन की अचानक फेलियर ने मचाई खलबली—क्या यह छोटी चूक IAS अर्चना सिंह का करियर बिगाड़ देगी? राजस्थान सरकार ने सूचना विभाग की सचिव को तुरंत APO कर दिया, CMO के कड़े निर्देशों से सियासत गरमाई!"
जयपुर/बांसवाड़ा, 26 सितंबर 2025: राजस्थान की सियासत और प्रशासन में हलचल मचाने वाली एक बड़ी घटना ने शुक्रवार को सुर्खियां बटोरीं। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की 2008 बैच की अधिकारी और सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव अर्चना सिंह को राज्य सरकार ने गुरुवार रात ही 'एपीओ' (अवेलेबल फॉर पब्लिक ऑर्डर यानी पदस्थापन की प्रतीक्षा में) कर दिया। कार्मिक विभाग ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, लेकिन इस कदम के पीछे की वजह को लेकर सस्पेंस बरकरार है। अनौपचारिक तौर पर सूत्र बता रहे हैं कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यालय के सीधे निर्देश पर हुई है, और इसका सीधा कनेक्शन बांसवाड़ा में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक कार्यक्रम से जुड़ा माना जा रहा है।
घटना का पूरा घटनाक्रम: क्या हुआ था बांसवाड़ा में?
बात गुरुवार, 25 सितंबर की है। नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान के बांसवाड़ा पहुंचे थे। यहां माही नदी के किनारे स्थित न्यूक्लियर पावर प्लांट परिसर में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। पीएम ने करीब दो घंटे 20 मिनट तक डटकर रहे और कुल 1.22 लाख करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया। इनमें ऊर्जा, सिंचाई, सड़क, रेल और जल संसाधन से जुड़ी परियोजनाएं शामिल थीं, जो राजस्थान के दक्षिणी क्षेत्र—बांसवाड़ा-डूंगरपुर के अलावा उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ समेत कई जिलों को मजबूती देंगी। कार्यक्रम में किसानों और स्थानीय निवासियों को नवीकरणीय ऊर्जा व आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ने पर जोर दिया गया।पीएम के स्वागत में आसपास के जिलों से करीब एक लाख से अधिक लोग जुटे थे। माहौल उत्साहपूर्ण था, लेकिन एक छोटी-सी तकनीकी खराबी ने सबकी जान में जान डाल दी। कार्यक्रम के दौरान पीएम को इन परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण से जुड़ी एक आकर्षक 4 मिनट की शॉर्ट फिल्म दिखाई जानी थी। यह वीडियो स्क्रीन पर चल रही थी, तभी अचानक कुछ क्षणों के लिए डिस्प्ले स्क्रीन बंद हो गई! यह खराबी महज कुछ सेकंड की रही, लेकिन स्थल पर मौजूद प्रशासनिक अमलों में हड़कंप मच गया। तुरंत तकनीकी टीम ने इसे ठीक किया, और कार्यक्रम सुचारु रूप से आगे बढ़ा। पीएम ने भी अपनी पूरी स्पीच दी, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार की तारीफ की और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के 'घावों' को भरने की बात कही।
अर्चना सिंह पर क्यों टूटी गाज? क्या है आधिकारिक- अनौपचारिक वजह?
अर्चना सिंह, जो 2008 बैच की राजस्थान कैडर की सीनियर आईएएस अधिकारी हैं, वर्तमान में सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की प्रमुख जिम्मेदारी संभाल रही थीं। इस कार्यक्रम की तकनीकी व्यवस्था—खासकर वीडियो प्रेजेंटेशन और स्क्रीन मैनेजमेंट—उनके विभाग के दायरे में आती थी। स्क्रीन फेल होने की घटना के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री कार्यालय से कड़े निर्देश जारी हुए। सूत्रों के अनुसार, पीएम के दौरे जैसी हाई-प्रोफाइल इवेंट में ऐसी चूक को 'गंभीर लापरवाही' माना गया। हालांकि, आधिकारिक बयान में सरकार ने इसे 'प्रशासनिक समीक्षा' का हिस्सा बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह भाजपा सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' पॉलिसी का उदाहरण है।अर्चना सिंह का करियर अब तक काबिल-ए-तारीफ रहा है। वे पहले उद्योग आयुक्त, जयपुर विकास प्राधिकरण की सचिव, होम विभाग में स्पेशल सेक्रेटरी और रीआईसीओ (राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन) की एमडी जैसी अहम पोस्टिंग्स पर रहीं। हाल ही में वे स्टडी लीव से लौटी थीं और सूचना विभाग में तैनात हुई थीं। एपीओ का मतलब है कि वे अब किसी नई पोस्टिंग का इंतजार करेंगी, लेकिन यह कदम उनके करियर पर सवालिया निशान लगा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी विभाग जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी में ऐसी घटनाएं दुर्लभ होती हैं, और यह सरकार के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल उठा रही है।
व्यापक प्रभाव: क्या कह रही है सियासत?
यह घटना राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार के लिए एक सबक है, जहां पीएम के दौरे को 'विकसित राजस्थान' की दिशा में मील का पत्थर बताया जा रहा था। विपक्ष—खासकर कांग्रेस—ने इसे 'प्रशासनिक अराजकता' का ठहराया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की कि 'तकनीकी खराबी को इतना बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना अफसरों को डराने का तरीका है'। वहीं, भाजपा नेताओं ने इसे 'जिम्मेदारी सुनिश्चित करने' का कदम बताया। राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में ही एपीओ को लेकर सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं—जिसमें 30 दिनों से ज्यादा एपीओ न करने और कारण बताने का प्रावधान है—तो अर्चना सिंह के केस में भी कानूनी पेंच फंस सकता है।