भारत की कूटनीतिक सफलता: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी
ईरान ने क्षेत्रीय तनाव और ब्लॉकेड के बीच दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकरों (शिवालिक और नंदा देवी) को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है। प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की बातचीत तथा विदेश मंत्रियों के संपर्क के बाद मिली यह छूट भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत है। इससे कतर से एलपीजी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी और घरेलू गैस संकट से राहत मिलेगी, जबकि भारत रूस से तेल खरीदकर वैश्विक ऊर्जा संकट से भी बचा हुआ है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है। ईरान ने भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति दे दी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक स्तर पर तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
इन जहाजों में लाखों सिलेंडरों के बराबर एलपीजी लदा हुआ है, जो मुख्य रूप से कतर के रस लफ्फान (Ras Laffan) से भारत की ओर आ रहे हैं। एक जहाज, शिवालिक (Shivalik), ने पहले ही इस जलडमरूमध्य को पार कर लिया है और भारत पहुंचने की राह पर है। दूसरा जहाज, नंदा देवी (Nanda Devi), भी जल्द ही गुजरने वाला है। ये जहाज भारतीय नौसेना की निगरानी में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहे हैं।
यह अनुमति भारत और ईरान के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक संपर्कों के बाद मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत की, जिसमें क्षेत्रीय स्थिति, नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निर्बाधता पर चर्चा हुई। इसके अलावा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के बीच भी बात हुई। ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फतहली ने स्पष्ट कहा कि भारत "हमारा मित्र" है और भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया जाएगा।
यह फैसला इसलिए खास है क्योंकि ईरान ने क्षेत्रीय तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्ती बरती हुई है और कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। दुनिया में तेल-गैस की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है, लेकिन भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत रखा है। एक ओर भारत रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीद रहा है, जिससे वैश्विक संकट से बचा हुआ है। दूसरी ओर, कतर जैसे देशों से एलपीजी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ईरान के साथ यह समझौता बड़ी कूटनीतिक जीत है।
इससे भारत में घरेलू गैस सिलेंडरों की उपलब्धता बनी रहेगी और किसी भी संभावित कमी से बचा जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की "बहुआयामी विदेश नीति" का नतीजा है, जहां वह रूस, ईरान, अमेरिका और अरब देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखते हुए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।