राजस्थान में बड़ा भर्ती घोटाला: OMR शीट में फर्जीवाड़ा कर 38 अभ्यर्थियों को लगवाई सरकारी नौकरी, RSSB के तकनीकी प्रमुख समेत 5 गिरफ्तार; 60 लाख रुपये जब्त

राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने RSSB की 2018 की तीन भर्ती परीक्षाओं (सुपरवाइजर, प्रयोगशाला सहायक, कृषि पर्यवेक्षक) में बड़े OMR फर्जीवाड़े का खुलासा किया। बोर्ड के तकनीकी प्रमुख संजय माथुर, प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पैसे लेकर OMR शीट्स में डाटा छेड़छाड़ कर फेल अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ाए गए (जैसे 2 से 206, -6 से 259, 63 से 182), जिससे 38 अयोग्य अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरियां मिल गईं। 60 लाख रुपये जब्त, जांच जारी।

Jan 21, 2026 - 11:02
राजस्थान में बड़ा भर्ती घोटाला: OMR शीट में फर्जीवाड़ा कर 38 अभ्यर्थियों को लगवाई सरकारी नौकरी, RSSB के तकनीकी प्रमुख समेत 5 गिरफ्तार; 60 लाख रुपये जब्त

जयपुर। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुए फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। इस घोटाले में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) के तत्कालीन तकनीकी प्रमुख और प्रोग्रामर सहित कुल 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने पैसे लेकर OMR शीट्स में हेरफेर किया, फेल होने वाले अभ्यर्थियों को पास कराया और कुल 38 अयोग्य अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरियां दिलवाईं।

गिरफ्तार आरोपी और उनकी भूमिका

SOG के एडीजी विशाल बंसल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गिरफ्तार किए गए पांच आरोपी हैं:संजय माथुर: राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर के तत्कालीन उपनिदेशक (सिस्टम एनालिस्ट) और तकनीकी प्रमुख। OMR शीट्स की स्कैनिंग और रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया के प्रभारी थे।प्रवीण गंगवाल: RSSB में प्रोग्रामर। दोनों बोर्ड के अंदरूनी अधिकारी थे और रिजल्ट प्रोसेसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।शादान खान और विनोद कुमार गौड़: नई दिल्ली की आउटसोर्स फर्म 'राभव लिमिटेड' के कर्मचारी। OMR शीट्स की स्कैनिंग और डाटा प्रोसेसिंग का काम इसी फर्म को सौंपा गया था।पूनम माथुर: एक अभ्यर्थी, जो संजय माथुर की रिश्तेदार है। उसके मामले में 63 अंक आए थे, लेकिन फर्जीवाड़ा कर 182 (कुछ रिपोर्ट्स में 185) अंक दिखाए गए।

घोटाले का तरीका

2018 में आयोजित तीन भर्ती परीक्षाओं में यह फर्जीवाड़ा किया गया:सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता/सशक्तिकरण) सीधी भर्ती परीक्षा-2018,प्रयोगशाला सहायक (लैब असिस्टेंट) भर्ती परीक्षा-2018,कृषि पर्यवेक्षक (एग्रीकल्चर सुपरवाइजर) भर्ती परीक्षा-2018,इन तीनों परीक्षाओं में कुल 3212 पदों के लिए 9 लाख 40 हजार 38 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा 2019 में हुई थी। OMR शीट्स की स्कैनिंग और डाटा प्रोसेसिंग का गोपनीय काम आउटसोर्स फर्म राभव लिमिटेड को दिया गया था, जिसकी वर्किंग मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश से संचालित होती थी।आरोपियों ने OMR शीट्स स्कैन करने के बाद कंप्यूटर सिस्टम में डाटा से छेड़छाड़ की। फोटोशॉप सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर चुनिंदा अभ्यर्थियों के अंकों में भारी बढ़ोतरी की गई। उदाहरण:एक अभ्यर्थी के मूल 2 नंबर आए थे, उन्हें बढ़ाकर 206 कर दिया गया।कुछ मामलों में -6 नंबर से सीधे 259 अंक दिखाए गए।पूनम माथुर के 63 अंक को 182/185 कर दिया गया।इससे अयोग्य अभ्यर्थी पास हो गए और उनकी सरकारी नौकरियां लग गईं। जांच में अब तक 38 अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें फायदा पहुंचाया गया।

कैसे पकड़ा गया घोटाला?

आउटसोर्स फर्म के कर्मचारी कैंडिडेट्स से कैश इकट्ठा कर उत्तर प्रदेश ले जा रहे थे। लखनऊ जाते समय उत्तर प्रदेश STF ने उन्हें पकड़ा और 60 लाख रुपये नकद तथा कुछ अभ्यर्थियों के नाम वाले डॉक्यूमेंट जब्त किए।इस आधार पर राजस्थान SOG ने जनवरी 2025 में FIR दर्ज की और जांच शुरू की।पहले फर्म के विनोद और शादान को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में RSSB अधिकारियों का नाम आया।अभ्यर्थी पूनम माथुर को पकड़ा गया, जिससे संजय माथुर (उसके रिश्तेदार) और प्रवीण गंगवाल का लिंक मिला।SOG ने दोनों RSSB अधिकारियों को भी अरेस्ट कर लिया।दो आरोपियों के पास से 60 लाख रुपये नकद और फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए। बोर्ड ने मूल OMR शीट्स दोबारा स्कैन कराईं, तब गड़बड़ी सामने आई।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.