राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों की पूरी जानकारी दीवार पर लगेगी: पारदर्शिता बढ़ाने की नई पहल, न लगाने पर स्कूल को निगेटिव मार्किंग

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों और कर्मचारियों की फोटो, नाम, योग्यता, पद, विषय सहित पूरी जानकारी दीवार पर 'हमारे शिक्षक-कार्मिक' बोर्ड के रूप में लगाई जाएगी। शिक्षा निदेशक के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू होगी, जिससे अभिभावकों को आसानी होगी और निरीक्षण में पारदर्शिता बढ़ेगी। जानकारी न लगाने पर स्कूल को निगेटिव मार्किंग मिलेगी।

Mar 5, 2026 - 12:37
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों की पूरी जानकारी दीवार पर लगेगी: पारदर्शिता बढ़ाने की नई पहल, न लगाने पर स्कूल को निगेटिव मार्किंग

राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों की दीवारों पर पढ़ाने वाले शिक्षकों और कार्यरत कर्मचारियों की फोटो सहित पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी। इस निर्णय से अभिभावकों (पैरेंट्स) को आसानी से पता चल सकेगा कि उनके बच्चे को कौन सा शिक्षक पढ़ा रहा है, उनकी योग्यता क्या है और वे किस विषय की पढ़ाई कराते हैं।

प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट ने इस संबंध में सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि हर स्कूल में यह व्यवस्था तुरंत लागू की जाए। यदि कोई स्कूल इस निर्देश का पालन नहीं करता, तो उसकी निगेटिव मार्किंग की जाएगी, जिसका असर स्कूल के मूल्यांकन और निरीक्षण रिपोर्ट में दिखेगा।

जानकारी किस तरह प्रदर्शित होगी?

कोटा के जिला शिक्षा अधिकारी राम चरण मीणा ने विस्तार से बताया कि स्कूल की मुख्य दीवार या ऐसी जगह पर जहां हर आने-जाने वाले की नजर आसानी से पड़े, वहां 'हमारे शिक्षक-कार्मिक' नामक टैग या बोर्ड लगाया जाएगा। इसमें निम्नलिखित विवरण अनिवार्य रूप से शामिल होंगे:

स्कूल का नाम,शिक्षक/कर्मचारी की फोटो,पूरा नाम,एम्प्लॉयी आईडी (Employee ID),जन्म तिथि,शैक्षणिक योग्यता (शिक्षा की डिग्री और प्रतिशत आदि),पद का नाम,पढ़ाने वाला विषय (सब्जेक्ट),कौन सी कक्षा पढ़ाते हैं,अन्य संबंधित शैक्षणिक जानकारी। यह जानकारी इतनी स्पष्ट और बड़ी फॉन्ट में लिखी जाएगी कि स्कूल में आने वाला कोई भी व्यक्ति, चाहे अभिभावक हो, शिक्षा अधिकारी हो या कोई आगंतुक, आसानी से पढ़ सके।

इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य क्या है?

विभाग का कहना है कि इससे कई फायदे होंगे: निरीक्षण में आसानी: जब शिक्षा अधिकारी या जिला स्तर के अधिकारी स्कूल का दौरा करेंगे, तो वे दीवार पर लगी जानकारी से तुरंत सत्यापन कर सकेंगे कि स्कूल में कौन-कौन से शिक्षक मौजूद हैं, कितने पद भरे हुए हैं, कितने खाली हैं और स्टाफ की वास्तविक स्थिति क्या है।

पारदर्शिता में वृद्धि: अभिभावकों को बच्चों के शिक्षकों की योग्यता और उपलब्धता की सही जानकारी मिलेगी, जिससे वे स्कूल की गुणवत्ता का बेहतर आकलन कर सकेंगे।

स्टाफ प्रबंधन में सुविधा: सार्वजनिक जानकारी से विभाग को पता चलेगा कि किस स्कूल में किस विषय के कितने शिक्षक हैं, वैकेंसी कितनी है और जरूरत के अनुसार स्टाफ बढ़ाने या समायोजित करने में मदद मिलेगी।शिक्षक संगठनों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे सरकारी स्कूलों में जवाबदेही और विश्वसनीयता बढ़ेगी।

क्यों पड़ी इस नई व्यवस्था की जरूरत?

जिला शिक्षा अधिकारी रामचरण मीणा ने बताया कि पहले से ही स्कूलों में शिक्षकों-कर्मचारियों की जानकारी सूचना पट्ट पर लिखने का प्रावधान था, लेकिन अक्सर वह जानकारी साफ-सुथरी नहीं रहती थी या अपडेट नहीं होती थी। हाल के समय में विभाग ने इस पर सख्ती बरती है। वर्तमान में परीक्षाएं चल रही हैं, इसलिए कुछ स्कूलों में अभी यह लागू नहीं हुआ है, लेकिन जल्द ही सभी स्कूलों में यह बोर्ड या जानकारी चस्पा कर दी जाएगी।

मॉनिटरिंग कैसे होगी?

इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सख्त मॉनिटरिंग की जाएगी। DIET (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) के शिक्षक या अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण रिपोर्ट में एक कॉलम यह भी होगा कि स्कूल में शिक्षकों-कर्मचारियों की जानकारी लगी हुई है या नहीं। यदि नहीं लगी, तो स्कूल को निगेटिव अंक दिए जाएंगे, जिससे स्कूल का प्रदर्शन प्रभावित होगा।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.