“कलेक्टर सौम्या झा अचानक क्यों हंस पड़ीं? बांदीकुई के बहरूपिया कलाकार ने ऐसा क्या कर दिया कि पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा!”
बांदीकुई के बहरूपिया कलाकार की प्रस्तुति ने दौसा में ऐसा माहौल बना दिया कि गंभीर बैठीं कलेक्टर सौम्या झा भी अचानक हंस पड़ीं। आखिर मंच पर ऐसा क्या हुआ जिसने सभी को चौंका दिया?
दौसा जिले के बांदीकुई में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम उस समय यादगार बन गया जब वहां बहरूपिया कला की ऐसी जीवंत प्रस्तुति हुई कि माहौल पूरी तरह हंसी और मनोरंजन में बदल गया। इस कार्यक्रम में मौजूद जिला कलेक्टर आईएएस सौम्या झा भी अपनी हंसी नहीं रोक पाईं और पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा।
बांदीकुई की अंतरराष्ट्रीय पहचान वाली कला
बांदीकुई के रहने वाले कलाकार शमशाद एक प्रसिद्ध बहरूपिया कलाकार हैं, जिनका परिवार पीढ़ियों से इस परंपरागत कला को आगे बढ़ा रहा है। उनके पिता भी इस कला के जरिए लोगों का मनोरंजन करते थे, और अब शमशाद इस विरासत को आगे ले जा रहे हैं।
यह बहरूपिया कला सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि शमशाद और उनका परिवार फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग और अमेरिका जैसे कई देशों में भी अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं, जिससे बांदीकुई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
कार्यक्रम में क्या हुआ खास?
सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए आयोजित ग्राम रथों की रवानगी कार्यक्रम में जब बहरूपिया कलाकार शमशाद ने अपनी प्रस्तुति दी, तो शुरुआत में कलेक्टर सौम्या झा गंभीर नजर आईं। लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि यह एक बहरूपिया प्रदर्शन है, माहौल पूरी तरह बदल गया।
उनकी मजेदार एक्टिंग और वेशभूषा को देखकर कलेक्टर खुद हंस पड़ीं और देखते ही देखते पूरा कार्यक्रम स्थल हंसी और तालियों से गूंज उठा। वहां मौजूद अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इस अनोखी प्रस्तुति का खूब आनंद लेते नजर आए।
क्या होती है बहरूपिया कला?
बहरूपिया कला एक पारंपरिक लोक-प्रदर्शन कला है जिसमें कलाकार अलग-अलग किरदारों जैसे देवी-देवता, ऐतिहासिक व्यक्तित्व या सामाजिक पात्रों का रूप धारण करते हैं।
इस कला की खासियत यह है कि इसमें अभिनय, वेशभूषा और संवादों के जरिए लोगों का मनोरंजन करने के साथ-साथ सामाजिक और सरकारी संदेश भी प्रभावी ढंग से दिए जाते हैं।