पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में गोडावण संरक्षण की सराहना: विलुप्ति के कगार से नई उम्मीद तक का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में राजस्थान के गोडावण संरक्षण प्रयासों की सराहना की। जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में चल रहे ब्रीडिंग सेंटर, आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन तकनीक और वैज्ञानिक प्रयासों से इस विलुप्तप्राय पक्षी की संख्या बढ़ाने में सफलता मिल रही है। अब गोडावण के लिए नई उम्मीद दिखाई दे रही है।
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों की पहचान माने जाने वाले गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण प्रयासों को देशभर में नई पहचान मिली है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में जैसलमेर में चल रहे गोडावण संरक्षण अभियान की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जो पक्षी कभी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया था, अब उसके लिए नई उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है।
गोडावण, जिसे Great Indian Bustard के नाम से जाना जाता है, कभी राजस्थान के रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा था। लेकिन समय के साथ इसकी संख्या तेजी से घटती गई और यह पक्षी लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया। अब सरकार और वैज्ञानिकों के संयुक्त प्रयासों से इसकी आबादी को बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है।
डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) के DFO बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा इस प्रयास को सराहना मिलना पूरी टीम के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि सुदासरी और रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटरों में वैज्ञानिकों और ग्राउंड स्टाफ की दिन-रात मेहनत का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। इन केंद्रों में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर गोडावण के संरक्षण को नई दिशा दी जा रही है।
इस साल संरक्षण के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन (AI) तकनीक के सफल उपयोग के रूप में सामने आई है। जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटर में पहली बार फीमेल गोडावण ‘जेरी’ और मेल ‘पर्व’ के जरिए AI तकनीक से चूजे का जन्म हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार गोडावण की प्राकृतिक प्रजनन दर काफी धीमी होती है, लेकिन इस नई तकनीक से अंडों के सफल निषेचन की संभावना कई गुना बढ़ गई है।
गुप्ता ने आगे बताया कि अब अगला बड़ा लक्ष्य ‘सॉफ्ट रिलीज’ प्रक्रिया को लागू करना है। इसके तहत ब्रीडिंग सेंटर में जन्मे पक्षियों को धीरे-धीरे प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल बनाकर जंगल में छोड़ा जाएगा। साथ ही, बिजली लाइनों पर बर्ड डायवर्टर लगाने जैसे उपायों से वन क्षेत्र में गोडावण की मृत्यु दर भी कम हुई है।
गोडावण संरक्षण की यह यात्रा 2018-19 में ‘प्रोजेक्ट गोडावण’ से शुरू हुई थी, जिसे केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के सहयोग से लॉन्च किया। 2019 में सुदासरी में पहला ब्रीडिंग सेंटर स्थापित किया गया, जबकि 2022 में काम के विस्तार के चलते रामदेवरा में दूसरा बड़ा केंद्र शुरू किया गया।
इन केंद्रों में ‘हच टू आउट’ तकनीक अपनाई जा रही है, जिसमें जंगल से जोखिम वाले अंडों को लाकर नियंत्रित वातावरण में सुरक्षित तरीके से विकसित किया जाता है। इस वैज्ञानिक पद्धति ने गोडावण के संरक्षण में अहम भूमिका निभाई है।
आज जैसलमेर का डेजर्ट नेशनल पार्क गोडावण के लिए एक सुरक्षित आशियाना बनता जा रहा है। 2026 तक इस पक्षी की संख्या 200 के करीब पहुंचना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल वन्यजीव संरक्षण की सफलता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक संदेश भी है कि सही प्रयासों से विलुप्ति के कगार पर पहुंचे जीवों को भी बचाया जा सकता है।