राजस्थान के अस्पतालों में बड़ा झटका: एक फैसले ने छीनी 599 फार्मासिस्ट की नौकरी, अब मरीजों पर मंडरा रहा खतरा!

सरकार के एक फैसले ने 599 संविदा फार्मासिस्ट को बाहर का रास्ता दिखा दिया। अस्पतालों में स्टाफ की कमी इतनी बढ़ गई है कि अब दवाएं कौन बांटेगा? आखिर क्या है पूरा मामला, जानिए…

Apr 30, 2026 - 14:00
राजस्थान के अस्पतालों में बड़ा झटका: एक फैसले ने छीनी 599 फार्मासिस्ट की नौकरी, अब मरीजों पर मंडरा रहा खतरा!

राजस्थान में नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसका सीधा असर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। प्रदेश सरकार ने लंबे समय से सेवाएं दे रहे 599 संविदा फार्मासिस्ट की सेवाएं 31 मार्च के बाद समाप्त कर दी हैं और उनके अनुबंध को आगे नहीं बढ़ाया गया है।

इस फैसले के बाद जहां एक तरफ सैकड़ों युवाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है, वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में पहले से मौजूद स्टाफ पर काम का दबाव कई गुना बढ़ गया है।

नए आए, पुराने हटाए गए

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने 14 नवंबर को राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के माध्यम से 674 नए संविदा फार्मासिस्ट की भर्ती की थी। लेकिन इसके महज चार महीने बाद ही पहले से कार्यरत 599 फार्मासिस्ट को हटा दिया गया। विभाग की ओर से प्रदेश के 41 जिलों के सीएमएचओ और पीएमओ को पत्र जारी कर इन सेवाओं को समाप्त करने के निर्देश दिए गए।

अस्पतालों में बिगड़ती व्यवस्था

प्रदेशभर के सरकारी अस्पताल पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में अचानक बड़ी संख्या में फार्मासिस्ट हटाए जाने से हालात और गंभीर हो गए हैं।

नियमित फार्मासिस्ट अब वीकली ऑफ तक नहीं ले पा रहे हैं

कई जगहों पर एएनएम, जीएनएम और प्रशिक्षु नर्सिंग छात्र-छात्राएं दवाएं बांटने को मजबूर हैं

दवा वितरण में गलती की आशंका बढ़ गई है

बांसवाड़ा का उदाहरण

जनजाति बहुल बांसवाड़ा जिले की स्थिति इस संकट की गंभीरता को साफ दर्शाती है। यहां जिला अस्पताल में रोजाना 1250 से 1300 ओपीडी और 100 से अधिक आईपीडी मरीज आते हैं।

यहां तीन निःशुल्क दवाघर संचालित हैं, जिनमें पहले 2 नियमित और 4 संविदा फार्मासिस्ट काम कर रहे थे। लेकिन संविदा कर्मियों को हटाने के बाद अब व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है और स्टाफ पर दबाव बढ़ गया है।

दवा प्रबंधन का बढ़ा जोखिम

सरकारी अस्पतालों में दवाओं की विविधता भी बड़ी चुनौती है:

मेडिकल कॉलेज अस्पताल: 1822 प्रकार की दवाएं

उप जिला अस्पताल: 1097 प्रकार

सीएचसी: 771 प्रकार

पीएचसी: 546 प्रकार

सब सेंटर: 122 प्रकार

इतनी बड़ी संख्या में दवाओं के बीच प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की कमी से दवा वितरण में गलती की आशंका और बढ़ जाती है, जो मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

स्वास्थ्य ढांचे पर असर

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा काफी बड़ा है, जिसमें शामिल हैं:

1 जिला अस्पताल

4 उप जिला अस्पताल

23 सीएचसी

63 पीएचसी

5 यूपीएचसी

2 डिस्पेंसरी

9 जनता क्लिनिक

इन सभी संस्थानों में फार्मासिस्ट की भूमिका बेहद अहम होती है, और उनकी कमी से सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होना तय माना जा रहा है।

अधिकारियों का पक्ष

सीएमएचओ डॉ. खुशपाल सिंह के अनुसार,

“पूरे प्रदेश में संविदा फार्मासिस्ट की सेवाएं हटाई गई हैं और उनका अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया गया है। फिलहाल मौजूदा स्टाफ से व्यवस्थाएं बनाए रखने की कोशिश की जा रही है और उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत करा दिया गया है।”

संविदा फार्मासिस्ट की सेवाएं समाप्त करने का यह फैसला प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधा प्रभाव डाल रहा है। जहां एक ओर बेरोजगारी का संकट गहरा रहा है, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में दवा वितरण जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। आने वाले समय में यदि इस स्थिति का समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ सकता है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।