राजस्थान में AI से बचेगी डायबिटीज मरीजों की आंखों की रोशनी: सेकेंड्स में होगी जांच, 40 शहरों में शुरू होगा ‘मिशन मधुनेत्र-AI’

राजस्थान सरकार डायबिटीज मरीजों की आंखों की रोशनी बचाने के लिए ‘मिशन मधुनेत्र-AI’ शुरू करने जा रही है। इस अभियान के तहत एआई तकनीक से कुछ सेकेंड्स में आंखों की जांच कर बीमारी का पता लगाया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे 40 शहरों में लागू किया जाएगा, जिससे समय पर इलाज संभव होगा और अंधेपन के खतरे को कम किया जा सकेगा।

Mar 22, 2026 - 12:00
राजस्थान में AI से बचेगी डायबिटीज मरीजों की आंखों की रोशनी: सेकेंड्स में होगी जांच, 40 शहरों में शुरू होगा ‘मिशन मधुनेत्र-AI’

राजस्थान में डायबिटीज मरीजों की आंखों की रोशनी बचाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया जाएगा। राज्य सरकार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और All India Institute of Medical Sciences (एम्स) के सहयोग से ‘मिशन मधुनेत्र-AI’ अभियान शुरू करने जा रही है। इस पहल के तहत प्रदेश के करीब 40 शहरों के अस्पतालों में हाईटेक तकनीक के जरिए आंखों की जांच की जाएगी।

डायबिटीज से आंखों पर बड़ा खतरा

डायबिटीज का असर शरीर के कई अंगों पर पड़ता है, लेकिन आंखों पर इसका प्रभाव बेहद गंभीर हो सकता है। डायबिटिक रेटिनोपैथी नामक बीमारी सीधे आंखों के रेटिना को नुकसान पहुंचाती है। चिंताजनक बात यह है कि इसके लक्षण तब तक स्पष्ट नहीं होते, जब तक दृष्टि प्रभावित न हो जाए। यही वजह है कि समय पर जांच न होने से कई मरीज अपनी रोशनी खो देते हैं।

AI से सेकेंड्स में रिपोर्ट

अब तक रेटिना की जांच के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की जरूरत होती थी, लेकिन AI आधारित फंडस कैमरा इस प्रक्रिया को आसान बना देगा।पोर्टेबल या टेबलटॉप फंडस कैमरे से आंखों की फोटो ली जाएगी,तस्वीरों को AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा,कुछ ही सेकेंड्स में रिपोर्ट तैयार हो जाएगी

AI सिस्टम मरीज की स्थिति को चार श्रेणियों में बांटेगा— कोई रेटिनोपैथी नहीं,माइल्ड, मॉडरेट, गंभीर (सीवियर), इससे शुरुआती स्तर पर ही बीमारी का पता लगाकर इलाज शुरू किया जा सकेगा।

पायलट प्रोजेक्ट रहा सफल

राज्य में 2018 से उपलब्ध फंडस कैमरों का लंबे समय तक उपयोग नहीं हुआ। लेकिन 2025 में इन्हें AI से जोड़कर पांच अस्पतालों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया। 865 मरीजों की स्क्रीनिंग हुई,139 मरीजों में बीमारी के अलग-अलग स्टेज पाए गए,इस सफलता के बाद अब इसे पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जा रहा है।

40 शहरों में होगा विस्तार

स्वास्थ्य विभाग इस अभियान को केकड़ी, किशनगढ़, बांसवाड़ा, बारां, शाहपुरा, नोखा, चित्तौड़गढ़, धौलपुर, दौसा, हनुमानगढ़, Jaisalmer, झुंझुनूं, नागौर, टोंक, सवाई माधोपुर समेत कई शहरों में शुरू करेगा। इसके अलावा अलवर, ब्यावर, डूंगरपुर और श्रीगंगानगर जैसे जिलों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

गंभीर मरीजों को मुफ्त इंजेक्शन

गंभीर अवस्था (ग्रेड-4) के मरीजों को मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत करीब 16 हजार रुपए का एंटी-VEGF इंजेक्शन दिया जाता है। यह इंजेक्शन आंखों की रोशनी बचाने में मददगार साबित होता है।

मशीनों और प्रशिक्षण पर जोर

भारत सरकार ने 8 फंडस कैमरे उपलब्ध कराए हैं,32 जिलों के लिए और मशीनें खरीदी जा रही हैं,डॉक्टरों और ऑप्टोमेट्रिस्ट को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है

प्री-मैच्योर बच्चों को भी फायदा

इस अभियान के तहत समय से पहले जन्मे बच्चों (प्री-मैच्योर) की आंखों के इलाज पर भी ध्यान दिया जा रहा है। रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योर नामक बीमारी से बचाव के लिए: 20 जिला अस्पतालों में नई मशीनें लगाई जाएंगी,जन्म के 30 दिनों के भीतर स्क्रीनिंग जरूरी होगी,जरूरत पड़ने पर इंजेक्शन और लेजर इलाज किया जाएगा,यह सुविधा जैसलमेर, हनुमानगढ़, अलवर, धौलपुर, डूंगरपुर सहित कई जिलों में शुरू की जाएगी। क्या बदलेगा इस पहल से?

‘मिशन मधुनेत्र-AI’ से अब मरीजों को;समय पर जांच,जल्दी रिपोर्ट, शुरुआती इलाज

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.