राजस्थान के 50 से अधिक स्कूलों को झटका, प्री-प्राइमरी में भी RTE लागू .

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने फैसला दिया है कि जिन निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित हैं, वहां राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत प्रवेश स्तर पर 25% सीटें वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए अनिवार्य होंगी। कोर्ट ने स्कूलों की यह दलील खारिज कर दी कि आरटीई केवल कक्षा पहली से लागू होता है। इस निर्णय से प्रदेश के 50 से अधिक स्कूल प्रभावित होंगे।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
January 17, 2026 • 11:48 AM  10
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राजस्थान
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राजस्थान के 50 से अधिक स्कूलों को झटका, प्री-प्राइमरी में भी RTE लागू .
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17 Jan 2026
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राजस्थान के 50 से अधिक स्कूलों को झटका, प्री-प्राइमरी में भी RTE लागू .

जोधपुर :- राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने राइट टू एजुकेशन (RTE) को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी असर वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित हो रही हैं, वहां भी प्रवेश स्तर पर आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को 25 प्रतिशत सीटों पर अनिवार्य रूप से दाखिला देना होगा। इस फैसले से प्रदेश के 50 से अधिक स्कूल सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।

क्या है हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई स्कूल प्री-प्राइमरी शिक्षा (पीपी-1, पीपी-2, पीपी-3) चला रहा है, तो वही उसकी एंट्री लेवल क्लास मानी जाएगी। ऐसे में आरटीई अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार इन कक्षाओं में भी 25% आरक्षण लागू होगा। स्कूल प्रबंधन यह तर्क नहीं दे सकते कि आरटीई केवल कक्षा पहली से लागू होता है।

स्कूलों की आपत्तियों को किया खारिज

मामले की सुनवाई के दौरान कई निजी स्कूलों ने दलील दी कि प्री-प्राइमरी कक्षाएं आरटीई के दायरे में नहीं आतीं। स्कूलों का कहना था कि वे इन कक्षाओं को स्वैच्छिक रूप से संचालित करते हैं, इसलिए यहां आरक्षण लागू नहीं होना चाहिए।

हाईकोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि जब स्कूल खुद प्री-प्राइमरी को औपचारिक शिक्षा के रूप में चला रहे हैं, तो वे आरटीई के नियमों से अलग नहीं हो सकते।

क्यों अहम है यह निर्णय

यह फैसला सामाजिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में शुरुआती शिक्षा पाने का अवसर मिलेगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती उम्र में समान शैक्षणिक माहौल मिलने से बच्चों के शैक्षणिक विकास में बड़ा अंतर आ सकता है।

कितने स्कूल होंगे प्रभावित

प्रदेश में ऐसे 50 से अधिक निजी स्कूल हैं, जहां प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित हो रही हैं और अब उन्हें आरटीई के तहत दाखिले देने होंगे। इससे स्कूलों की प्रवेश प्रक्रिया, सीट निर्धारण और फीस ढांचे में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

अभिभावकों के लिए राहत की खबर

इस फैसले को अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने स्वागतयोग्य बताया है। उनका कहना है कि अब वंचित वर्ग के बच्चों को नर्सरी और केजी स्तर से ही बेहतर शिक्षा मिल सकेगी, जिससे आगे चलकर शिक्षा में असमानता कम होगी।

आगे क्या होगा

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। माना जा रहा है कि आगामी शैक्षणिक सत्र से प्री-प्राइमरी स्तर पर भी आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया लागू की जाएगी।

राजस्थान हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल स्कूल शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगा, बल्कि समान शिक्षा के संवैधानिक उद्देश्य को भी मजबूती देगा। अब प्री-प्राइमरी शिक्षा भी आरटीई के दायरे में पूरी तरह शामिल मानी जाएगी।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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