पाली में 70 साल से निभाई जा रही परंपरा: दक्षिण से आए पुजारी ने की थी शुरुआत, अब 50 से ज्यादा मंदिरों में बनता है 'इम्यूनिटी बूस्टर' अन्नकूट
पाली में 70 साल पुरानी अन्नकूट परंपरा, दक्षिण से आए पुजारी की शुरुआत, 50+ मंदिरों में 56 भोग प्रसाद, स्वास्थ्य के लिए इम्यूनिटी बूस्टर।
पाली, 7 नवंबर 2025:
राजस्थान के पाली शहर में गोवर्धन पूजा के अवसर पर मनाया जाने वाला अन्नकूट उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह एक जीवंत सांस्कृतिक परंपरा भी है जो करीब 70 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। यह परंपरा पुष्कर के बाद पाली को राजस्थान का दूसरा ऐसा शहर बनाती है, जहां अन्नकूट बनाने की शुरुआत हुई थी। इस वर्ष भी 50 से अधिक मंदिरों में 56 प्रकार के भोग प्रसाद तैयार कर भगवान गोवर्धन को अर्पित किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए 'इम्यूनिटी बूस्टर' के रूप में जाना जाता है। दक्षिण भारत से आए पुजारी की अगुवाई में आयोजित इस उत्सव ने शहर को भक्ति और एकता के रंग में रंग दिया।
अन्नकूट परंपरा का गौरवशाली इतिहास; पाली में अन्नकूट की परंपरा लगभग 70 साल पुरानी है, हालांकि इसके मूल जड़ें प्राचीन काल और मध्यकाल तक जाती हैं। इतिहासकारों के अनुसार, यह परंपरा करीब 500 वर्ष पुरानी है, जो भगवान कृष्ण की गोवर्धन लीला से प्रेरित है। भागवत पुराण में वर्णित इस कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने इंद्र देव के क्रोध से गोकुलवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठा लिया था। इसके बाद गोकुल के लोगों ने आभार व्यक्त करने के लिए भगवान को 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए, जिसे 'अन्नकूट' कहा जाता है। 'अन्न' का अर्थ अनाज और 'कूट' का अर्थ पहाड़ होता है, जो विभिन्न व्यंजनों के विशाल संग्रह को दर्शाता है।पाली में इस परंपरा की शुरुआत 1950 के दशक में हुई, जब स्थानीय राजा-महाराजाओं ने कृषि प्रधान समाज की समृद्धि को चिह्नित करने के लिए बड़े पैमाने पर भोजन तैयार करवाया। पुष्कर के बाद पाली राजस्थान का दूसरा प्रमुख केंद्र बना, जहां यह उत्सव कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को दीपावली के अगले दिन मनाया जाता है। यह न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि सामाजिक एकता का माध्यम भी, जहां विभिन्न जातियों और समुदायों के लोग मिलकर प्रसाद तैयार करते हैं। आजादी के बाद के दौर में यह परंपरा और मजबूत हुई, जो वर्षा ऋतु के बाद फसल कटाई का उत्सव भी बन गई।
दक्षिण से आए पुजारी: परंपरा की नई शुरुआत; अन्नकूट की इस पवित्र परंपरा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में दक्षिण भारत से आए पुजारी की भूमिका सराहनीय रही है। इस वर्ष पाली के प्रमुख मंदिरों में तमिलनाडु के प्रसिद्ध पुजारी श्री वेंकट रमन को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। वे दक्षिण भारतीय वैदिक परंपराओं के जानकार हैं और 'अन्नाभिषेक' के रूप में इस उत्सव को मनाते हैं। श्री रमन ने बताया, "दक्षिण भारत में अन्नकूट को अन्न की वर्षा के रूप में मनाया जाता है, जो समृद्धि और स्वास्थ्य का प्रतीक है। पाली आकर मैं इस परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने का प्रयास कर रहा हूं।" उनकी अगुवाई में पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चारण और प्रसाद वितरण का संचालन किया गया। यह आमंत्रण पाली के मंदिर समितियों द्वारा किया गया था, ताकि स्थानीय परंपरा को दक्षिण भारतीय वैदिक रीति-रिवाजों से समृद्ध किया जा सके। श्री रमन ने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह उत्सव न केवल भगवान को प्रसन्न करता है, बल्कि मानव जीवन को पोषण भी प्रदान करता है। उनकी उपस्थिति ने उत्सव को एक नया आयाम दिया और भक्तों में उत्साह दोगुना कर दिया।
50 से अधिक मंदिरों में भव्य तैयारी: 56 भोग का अन्न का पहाड़ पाली जिले के 50 से अधिक मंदिरों में अन्नकूट की तैयारी एक सप्ताह पहले से ही शुरू हो जाती है। प्रत्येक मंदिर में सैकड़ों स्वयंसेवक, खासकर महिलाएं, पारंपरिक विधियों से 56 प्रकार के शाकाहारी व्यंजन तैयार करती हैं। इनमें दाल-बाटी, सब्जी की विविधताएं, पूरी, खीर, हलवा, लड्डू और मौसमी फल शामिल होते हैं। सामग्री स्थानीय किसानों से एकत्रित की जाती है, जो उत्सव को आत्मनिर्भर बनाती है। उदाहरण के लिए, सोमवार मंदिर में 10,000 से अधिक भक्तों के लिए भोजन तैयार किया गया, जबकि श्री गोवर्धन धाम और पाली वैष्णव मंदिर में लाखों की संख्या में प्रसाद वितरित हुआ, इस वर्ष लगभग 2 लाख भक्तों ने भाग लिया। तैयारी में पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया, जहां प्लास्टिक-मुक्त उत्सव का आयोजन किया गया। मंदिर समितियों ने स्वयंसेवकों को मास्क वितरित किए और प्रसाद वितरण के लिए विशेष व्यवस्था की। महिलाओं की भूमिका सराहनीय रही, जो घंटों श्रम लगाकर व्यंजनों को स्वादिष्ट बनाती हैं।
'इम्यूनिटी बूस्टर' के रूप में अन्नकूट का स्वास्थ्य महत्व; अन्नकूट को केवल भक्ति का प्रतीक ही नहीं माना जाता, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए एक प्राकृतिक 'इम्यूनिटी बूस्टर' भी है। 56 व्यंजनों में प्रयुक्त हल्दी, अदरक, दालें, सब्जियां और अनाज एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। पाली के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राजेश शर्मा ने बताया, "यह प्रसाद सर्दी-जुकाम जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव का सशक्त माध्यम है। आधुनिक पोषण विज्ञान भी इसे 'प्राकृतिक वैक्सीन' के रूप में मान्यता देता है।" विशेषज्ञों के अनुसार, हल्दी का एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण और अदरक की एंटी-वायरल क्षमता इसे विशेष बनाती है। महामारी के दौर में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ गई है, जहां भक्त इसे निःशुल्क प्राप्त कर स्वास्थ्य लाभ उठा रहे हैं।
उत्सव की भव्यता: शोभायात्राएं और सामाजिक सद्भाव अन्नकूट उत्सव के दौरान पाली शहर में भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं, जिसमें भगवान कृष्ण की झांकियां, लोक नृत्य और भजन-कीर्तन शामिल थे। स्थानीय कलाकारों ने भक्ति भजनों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। पाली की जिलाधिकारी श्रीमती नेहा ग्रोवर ने उद्घाटन समारोह में कहा, "अन्नकूट हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, जो एकता, स्वास्थ्य और समृद्धि को बढ़ावा देती है।"