इलाज के नाम पर धोखा? दवाएं बंद, अस्पतालों ने खड़े किए हाथ...आखिर ऐसा क्या हुआ जानिए पूरी खबर
राजस्थान की RGHS योजना में आखिर ऐसा क्या हुआ कि अस्पताल मरीजों को लौटा रहे हैं और दवाएं मिलनी बंद हो गईं? ₹2200 करोड़ के बकाये के पीछे क्या है पूरा खेल—जानिए इस बड़ी खबर की पूरी कहानी।
राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना RGHS इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। जिस योजना को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, वही अब उनके लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती जा रही है।
प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स, जो अब तक इस योजना के सहारे इलाज की उम्मीद लगाए बैठे थे, आज अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई जगहों पर मरीजों को इलाज से मना किया जा रहा है, जबकि कई केमिस्ट दवाइयां देने से साफ इनकार कर रहे हैं।
मानवाधिकार आयोग ने लिया बड़ा एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने 1 मई 2026 को इस पूरे मामले पर स्वत: संज्ञान लिया। आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर कहा कि मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलना सीधा मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि—
- सरकारी कर्मचारियों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा देने के लिए शुरू की गई योजना अब खुद संकट में है।
- सूचीबद्ध अस्पताल और मेडिकल स्टोर मरीजों को इलाज और दवाएं देने से मना कर रहे हैं।
- बीमारी के समय इलाज न मिलना नागरिकों के मूल अधिकारों पर सवाल खड़ा करता है।
₹2200 करोड़ का बकाया बना सबसे बड़ी वजह
पूरे विवाद की जड़ सरकार पर बकाया भारी भुगतान को माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक—
- पिछले 8 से 9 महीनों से अस्पतालों और दवा सप्लायर्स का भुगतान अटका हुआ है।
- करीब ₹2200 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित बताया जा रहा है।
- कई बड़े निजी अस्पतालों ने योजना के तहत मरीजों का इलाज बंद कर दिया है।
इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें अब अपनी जेब से इलाज करवाना पड़ रहा है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स में बढ़ा गुस्सा
सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि हर महीने उनकी सैलरी से RGHS के नाम पर राशि काटी जाती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सुविधा नहीं मिल रही।
जयपुर, जोधपुर और बीकानेर जैसे बड़े शहरों में पेंशनर्स को दवाइयों के लिए मेडिकल स्टोर से “नो स्टॉक” और “कैशलेस सेवा बंद” जैसे जवाब मिल रहे हैं।
भजनलाल सरकार पर बढ़ा दबाव
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भजनलाल शर्मा सरकार इस संकट का जल्द समाधान निकाल पाएगी?
मानवाधिकार आयोग ने सरकार से जवाब तलब किया है और पूछा है कि आखिर भुगतान में इतनी देरी क्यों हुई और व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या रोडमैप तैयार किया गया है।
सबसे बड़ा सवाल
क्या सरकार 2200 करोड़ का बकाया चुकाकर लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत दे पाएगी, या फिर RGHS का संकट और गहराएगा?