रिफाइनरी अग्निकांड के बाद बड़ा अपडेट: मोदी सभा स्थल पर अचानक बढ़ी हलचल, क्या होने वाला है बड़ा फैसला?
आग के बाद अचानक डोम हटाने की शुरुआत… क्या टल गया पीएम का दौरा या छिपी है कोई बड़ी वजह?
राजस्थान की ‘भाग्य रेखा’ कही जाने वाली पचपदरा रिफाइनरी में 20 अप्रैल की काली रात का असर अब भी साफ नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित लोकार्पण से महज 24 घंटे पहले क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में लगी आग ने पूरे आयोजन को झटका दे दिया था। करोड़ों के निवेश और ऐतिहासिक कार्यक्रम की तैयारियों के बीच हुई इस घटना ने न केवल औद्योगिक सुरक्षा पर सवाल खड़े किए, बल्कि प्रदेश के सबसे बड़े विकास उत्सव को भी अधर में लटका दिया।
अब, हादसे के बाद पहली बड़ी गतिविधि के तौर पर सभा स्थल पर बनाए गए तीन विशाल डोमों को हटाने का काम शुरू हो गया है। ये वही डोम थे, जहाँ से प्रधानमंत्री मारवाड़ की जनता को संबोधित करने वाले थे। क्रेन और सैकड़ों मजदूरों की मदद से इन अस्थायी ढांचों को खोला जा रहा है, और आने वाले 2 से 4 दिनों में पूरा मैदान फिर से खाली नजर आएगा।
सुरक्षा जांच के चलते रुका था काम
हादसे के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे रिफाइनरी परिसर को सील कर दिया था। सभा स्थल पर मौजूद डोम और अन्य अस्थायी संरचनाओं को हटाने पर रोक लगा दी गई थी, ताकि किसी भी तरह के तकनीकी साक्ष्य नष्ट न हों। पिछले कुछ दिनों में राष्ट्रीय और स्थानीय एजेंसियों ने मौके से जरूरी डेटा और सबूत इकट्ठा कर लिए हैं, जिसके बाद अब हटाने की प्रक्रिया को मंजूरी दी गई।
1.80 लाख लोगों की थी तैयारी
प्रधानमंत्री की प्रस्तावित जनसभा को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर तैयारियां की थीं। तीन विशाल वाटरप्रूफ डोम बनाए गए थे, जिनमें कुल मिलाकर करीब 1.80 लाख लोगों के बैठने की व्यवस्था थी। प्रत्येक डोम में 35 ब्लॉक बनाए गए थे और हर ब्लॉक में लगभग 1700 लोगों के बैठने की क्षमता रखी गई थी। इन संरचनाओं को खड़ा करने में 500 से अधिक मजदूरों और कई क्रेनों ने दिन-रात काम किया था।
आग की वजह और मरम्मत का दावा
एचपीसीएल की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, आग हीट एक्सचेंजर स्टैक तक सीमित रही थी। इस घटना में छह एक्सचेंजर और उनसे जुड़े उपकरण प्रभावित हुए। आग का कारण वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर प्रेशर गेज टैपिंग पॉइंट से हुए रिसाव को बताया गया है। अधिकारियों का दावा है कि 3 से 4 सप्ताह में मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
टाटा प्रोजेक्ट्स को क्षतिग्रस्त उपकरणों को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी दी गई है, और काम तेजी से जारी है। एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) का लक्ष्य है कि 1 जुलाई 2026 से व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया जाए।
टेस्ट प्रोडक्शन की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, एलपीजी, मोटर स्पिरिट (पेट्रोल), हाई स्पीड डीजल और नैफ्था जैसे उत्पादों का परीक्षण उत्पादन मई के दूसरे पखवाड़े से शुरू किया जा सकता है। इससे समय पर कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करने में मदद मिलेगी।
लोकार्पण पर सस्पेंस बरकरार
डोम हटने के साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या लोकार्पण अब लंबे समय के लिए टल गया है या फिर नई तारीख के साथ कार्यक्रम दोबारा आयोजित किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जब तक तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रधानमंत्री का दौरा तय होना मुश्किल है।
राजनीतिक और जनभावनाओं पर असर
इस लोकार्पण को राजस्थान में विकास के बड़े प्रतीक के रूप में देखा जा रहा था, खासकर आगामी चुनावों के संदर्भ में। हादसे के बाद सुरक्षा मानकों और औद्योगिक प्रबंधन पर बहस तेज हो गई है। बाड़मेर, बालोतरा और पूरे पश्चिमी राजस्थान की जनता अब केंद्र सरकार और एचपीसीएल के अगले फैसले का इंतजार कर रही है।
फिलहाल, प्रशासन ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है, और पचपदरा रिफाइनरी एक बार फिर उस नई तारीख का इंतजार कर रही है, जो मरुधरा के विकास की दिशा तय करेगी।