कोटा की कचहरी बनी ‘कुरुक्षेत्र’: प्रेम प्रसंग में बेकाबू भीड़, तहसील परिसर में जमकर चले ईंट-पत्थर
मजिस्ट्रेट के सामने पेशी, अचानक भड़की भीड़ और देखते ही देखते तहसील परिसर बना जंग का मैदान। एक रिश्ते से शुरू हुआ विवाद कैसे पहुंचा हिंसा तक—पूरी कहानी चौंका देगी।
राजस्थान के कोटा शहर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सोच—दोनों पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। लाडपुरा तहसील परिसर, जहां लोग न्याय की उम्मीद लेकर आते हैं, वही जगह अचानक हिंसा और अफरा-तफरी का केंद्र बन गई। बुधवार शाम यहां जो हुआ, उसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या अब न्यायालय परिसर भी सुरक्षित नहीं रहे?
5 महीने पुरानी कहानी, जो बनी हिंसा की वजह
इस पूरे विवाद की शुरुआत करीब पांच महीने पहले हुई थी। कोटा का रहने वाला टैक्सी ड्राइवर गोलू महावर और उसके ही परिवार की 19 वर्षीय युवती के बीच प्रेम संबंध विकसित हुआ। दोनों के रिश्ते को परिवार और समाज की मंजूरी नहीं मिली। विरोध बढ़ता गया, लेकिन दोनों ने साथ रहने का फैसला किया और घर छोड़कर चले गए।
युवती के परिजनों ने इसे स्वीकार करने के बजाय अपहरण का मामला दर्ज कराया। इसी केस के चलते दोनों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना था।
तहसील पहुंचते ही फूटा गुस्सा
बुधवार शाम जब यह जोड़ा लाडपुरा तहसील परिसर पहुंचा, तब माहौल पहले से ही तनावपूर्ण था। जैसे ही दोनों वहां पहुंचे, युवती पक्ष के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते भीड़ इकट्ठा हो गई और गोलू की कार को निशाना बनाते हुए उस पर पत्थरों की बरसात शुरू कर दी।
कुछ ही पलों में हालात इतने बिगड़ गए कि मामला सिर्फ पथराव तक सीमित नहीं रहा। दोनों पक्षों के बीच जमकर हाथापाई शुरू हो गई। महिलाएं, पुरुष और युवा—हर कोई इस झगड़े का हिस्सा बन गया। पूरे परिसर में चीख-पुकार, भगदड़ और टूटते कांच की आवाजें गूंजने लगीं।
पुलिस मौजूद, फिर भी हालात बेकाबू
घटना के समय पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन भीड़ की संख्या ज्यादा होने के कारण स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। पुलिस के सामने ही हिंसा होती रही और हालात तेजी से बिगड़ते चले गए।
स्थिति को काबू में करने के लिए तुरंत नयापुरा थाना पुलिस को बुलाया गया। अतिरिक्त पुलिस बल के पहुंचने के बाद हालात पर काबू पाया गया और हंगामा करने वाले कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
कानून के दायरे में ‘इज्जत’ की लड़ाई
यह घटना सिर्फ एक प्रेम प्रसंग का विवाद नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता को भी उजागर करती है जहां ‘परिवार की इज्जत’ के नाम पर लोग कानून को भी ताक पर रख देते हैं। जिस रिश्ते को बचाने के लिए दो लोग घर छोड़कर भागे, वही रिश्ता अब परिवारों के बीच इतनी बड़ी दुश्मनी का कारण बन गया कि बात हिंसा तक पहुंच गई।
उठते सवाल
इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल सामने आते हैं—
क्या कानून का डर अब खत्म होता जा रहा है?
क्या न्यायालय परिसर में भी सुरक्षा की गारंटी नहीं रही?
क्या समाज में ‘इज्जत’ के नाम पर हिंसा को अब भी सही ठहराया जा रहा है?
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
फिलहाल पुलिस ने मामले में कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है।
कोटा के लाडपुरा तहसील परिसर में हुई यह घटना सिर्फ एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि समाज के उस कड़वे सच को सामने लाती है जहां भावनाएं और सामाजिक दबाव कानून पर भारी पड़ जाते हैं। जब न्याय की चौखट पर ही हिंसा होने लगे, तो यह सिर्फ एक घटना नहीं—बल्कि एक चेतावनी है कि हमें अपने सामाजिक मूल्यों और कानून के प्रति सम्मान को फिर से समझने की जरूरत है।