जो ओढ़नी हम सस्ते में खरीदते हैं, वही विदेशों में लाखों की! ‘लेयर्ड स्कार्फ’ का असली सच जानकर रह जाएंगे हैरान

राजस्थानी ओढ़नी अब ‘लेयर्ड स्कार्फ’ बनकर इंटरनेशनल फैशन में छा गई है, जिसे विदेशी ब्रांड्स लाखों में बेच रहे हैं।

Apr 26, 2026 - 19:30
जो ओढ़नी हम सस्ते में खरीदते हैं, वही विदेशों में लाखों की! ‘लेयर्ड स्कार्फ’ का असली सच जानकर रह जाएंगे हैरान

क्या होगा अगर आपको पता चले कि जो ओढ़नी हमारी मम्मी और दादी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में पहनती हैं, वही आज इंटरनेशनल फैशन की दुनिया में ‘लेयर्ड स्कार्फ’ बनकर 80 हजार से 1 लाख रुपये में बेची जा रही है? सुनने में भले ही चौंकाने वाला लगे, लेकिन यह हकीकत है।

आज फैशन इंडस्ट्री में ‘लेयर्ड स्कार्फ’ एक बड़ा ट्रेंड बन चुका है। इसे सस्टेनेबल फैशन का नाम दिया जा रहा है और बड़े-बड़े इंटरनेशनल ब्रांड्स इसे हाई-फैशन के तौर पर प्रमोट कर रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि यह कोई नई खोज नहीं, बल्कि हमारी पारंपरिक भारतीय ओढ़नी का ही आधुनिक रूप है।

 देसी से इंटरनेशनल तक का सफर

भारत, खासकर राजस्थान में ओढ़नी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि संस्कृति और पहचान का प्रतीक है। यहां हर शहर की ओढ़नी अपनी अलग कहानी और खासियत रखती है।

जयपुर की बंधेज, लहरिया और गोटा-पत्ती वर्क वाली ओढ़नियां अपनी रंगीनता और पारंपरिक खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं।

जोधपुर की लाल-नीली चुन्नियां मारवाड़ की शान मानी जाती हैं।

जैसलमेर की मिरर वर्क और गोटा-पट्टी ओढ़नियां रेगिस्तान की धूप में अलग ही चमक बिखेरती हैं।

उदयपुर की सिल्क और हैंडवर्क ओढ़नियां रॉयल टच देती हैं।

बीकानेर और बाड़मेर की अजरक प्रिंट और कढ़ाई वाली ओढ़नियां अपनी बारीकी और कला के लिए मशहूर हैं।

 

कीमत का खेल

जहां हम इन खूबसूरत ओढ़नियों को 500 से 1000 रुपये में खरीद लेते हैं, वहीं यही डिज़ाइन और कॉन्सेप्ट जब विदेशी ब्रांड्स अपनाते हैं, तो वही ‘लक्ज़री फैशन’ बन जाता है और उसकी कीमत हजारों से लाखों तक पहुंच जाती है।

 

सस्टेनेबल फैशन या री-पैकेजिंग?

इंटरनेशनल ब्रांड्स इसे सस्टेनेबल फैशन का नाम देकर बेच रहे हैं, लेकिन असल में यह हमारी पारंपरिक कला का ही एक नया रूप है। फर्क सिर्फ इतना है कि नाम और प्रस्तुति बदल दी गई है।

अपनी जड़ों को पहचानें

यह ट्रेंड हमें एक बात सिखाता है—फैशन चाहे कितना भी बदल जाए, उसकी जड़ें अक्सर हमारी संस्कृति में ही होती हैं। हमारी ओढ़नी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि हमारी परंपरा, हमारी पहचान और हमारी विरासत है।

अगली बार जब आप किसी मॉडल को ‘लेयर्ड स्कार्फ’ पहने देखें, तो समझ जाइए कि यह कोई नया ट्रेंड नहीं, बल्कि हमारी अपनी राजस्थानी ओढ़नी का ही ग्लोबल रूप है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।