सुरक्षा मानकों की अनदेखी: नापासर में इंडस्ट्रियल ऑयल फैक्ट्री की जांच पूरी, सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार

बीकानेर के नापासर में कनक श्री केमिकल्स फैक्ट्री में इंडस्ट्रियल ऑयल को बायोडीजल बताकर बेचने का बड़ा घोटाला पकड़ा गया। रसद विभाग की जांच में फैक्ट्री परिसर में भूमिगत और प्लास्टिक टंकियों में करीब 3.14 लाख लीटर पेट्रोलियम पदार्थ बरामद हुआ। सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी सामने आई है। फैक्ट्री सील, सैंपल रिपोर्ट का इंतजार।

Nov 19, 2025 - 16:42
सुरक्षा मानकों की अनदेखी: नापासर में इंडस्ट्रियल ऑयल फैक्ट्री की जांच पूरी, सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार

बीकानेर, राजस्थान (19 नवंबर 2025): राजस्थान के बीकानेर जिले के नापासर क्षेत्र में स्थित कनक श्री केमिकल्स फैक्ट्री में इंडस्ट्रियल ऑयल को बायोडीजल बताकर बेचने के गंभीर मामले ने सुरक्षा मानकों की लापरवाही को उजागर कर दिया है। रसद विभाग (Supply Department) की विस्तृत जांच पूरी हो चुकी है, जिसमें फैक्ट्री परिसर में भारी मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थों का अनियमित भंडारण सामने आया है। विभाग ने अब सैंपल रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जो इस घोटाले की गहराई को और स्पष्ट करेगी। इस जांच ने न केवल फैक्ट्री मालिकों की धांधली को बेनकाब किया है, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमजोरियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का पृष्ठभूमि और खुलासा;  कनक श्री केमिकल्स फैक्ट्री, जो नापासर के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है, लंबे समय से इंडस्ट्रियल ऑयल का उत्पादन और वितरण कर रही थी। लेकिन हाल ही में विभाग को शिकायत मिली कि यहां उत्पादित तेल को 'बायोडीजल' के रूप में प्रचारित कर ग्राहकों को ठगा जा रहा है। बायोडीजल एक पर्यावरण-अनुकूल ईंधन है, जो जैविक सामग्री से बनाया जाता है, जबकि इंडस्ट्रियल ऑयल खतरनाक रासायनिक अपशिष्ट होता है। इस धोखाधड़ी से न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा हो गया।विभाग की प्रारंभिक जांच के दौरान ही फैक्ट्री को सील कर दिया गया था। लेकिन विस्तृत जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं। फैक्ट्री परिसर में भूमिगत टैंकों से लेकर प्लास्टिक टंकियों तक में कुल लगभग 3,14,000 लीटर पेट्रोलियम पदार्थ भरा हुआ पाया गया। ये पदार्थ खतरनाक हैं और इनका भंडारण सख्त सुरक्षा मानकों के अधीन होना चाहिए।

जांच टीम ने पाया कि:भूमिगत टैंकों में असुरक्षित तरीके से तेल जमा किया गया था, जो रिसाव का खतरा पैदा कर सकता था। प्लास्टिक टंकियां, जो पेट्रोलियम के लिए अनुपयुक्त हैं, में भी हजारों लीटर तेल भरा था। इससे आग लगने या रासायनिक रिसाव की संभावना बढ़ जाती है। कोई उचित लेबलिंग, वेंटिलेशन सिस्टम या आपातकालीन निकासी व्यवस्था नहीं थी। ये खुलासे रसद विभाग के अधिकारियों के लिए आश्चर्यजनक थे, क्योंकि फैक्ट्री पहले ही सील होने के बावजूद इन खतरों को छिपाने की कोशिश कर रही थी। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "यह न केवल धोखाधड़ी का मामला है, बल्कि जानलेवा लापरवाही भी। इतनी बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम का अनियमित भंडारण पूरे इलाके के लिए खतरा था।"

जांच प्रक्रिया और विभागीय कार्रवाई;  जांच का नेतृत्व रसद विभाग के विशेषज्ञों ने किया, जिन्होंने फैक्ट्री के हर कोने की तलाशी ली। साइट पर पहुंची टीम ने:सभी टैंकों और टंकियों से सैंपल एकत्र किए, जिनकी रिपोर्ट लैब में जांच के लिए भेज दी गई है। दस्तावेजों की जांच की, जिसमें उत्पादन रिकॉर्ड, बिक्री बिल और लाइसेंस शामिल थे। प्रारंभिक नोटिस के अनुसार, कई दस्तावेज जाली या अपूर्ण पाए गए। फैक्ट्री मालिकों और कर्मचारियों से पूछताछ की, जो अभी भी जारी है। विभाग ने फैक्ट्री को पूरी तरह सील रखा है और प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही, स्थानीय प्रशासन को अलर्ट किया गया है ताकि आसपास के निवासियों को कोई खतरा न हो। यदि सैंपल रिपोर्ट में बायोडीजल के दावे झूठे साबित होते हैं, तो मालिकों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, जेल और फैक्ट्री का स्थायी बंद होना शामिल हो सकता है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी: एक बड़ी लापरवाही यह मामला राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को रेखांकित करता है। भारत में पेट्रोलियम पदार्थों के भंडारण के लिए पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के दिशानिर्देश सख्त हैं। इनमें शामिल हैं:भंडारण टैंक: भूमिगत टैंकों को कंक्रीट से मजबूत बनाना और लीक डिटेक्शन सिस्टम लगाना अनिवार्य। सामग्री: प्लास्टिक टंकियां ज्वलनशील पदार्थों के लिए प्रतिबंधित हैं; स्टील या फाइबरग्लास ही इस्तेमाल हो सकता है। आपातकालीन उपाय: फायर फाइटिंग उपकरण, स्पिल कंटेनमेंट और नियमित निरीक्षण जरूरी। नापासर फैक्ट्री में इनका पूर्ण उल्लंघन हुआ, जो पिछले कुछ वर्षों में हुए औद्योगिक हादसों (जैसे विशाखापत्तनम गैस लीक) की याद दिलाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही से न केवल कर्मचारी, बल्कि आसपास के गांवों में रहने वाले हजारों लोग प्रभावित हो सकते थे। पर्यावरणविदों ने मांग की है कि राज्य सरकार पूरे जिले में ऐसी फैक्टरियों का ऑडिट कराए।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.