मां की पुकार- "मेरे कलेजे का टुकड़ा लाओ": नेपाल में फंसा पेट्रोल पंप कारोबारी

काठमांडू में हिंसा के कारण फंसे भारतीय कारोबारी पंकज चितारा की सुरक्षित वापसी के लिए परिवार चिंतित, भारत सरकार विशेष विमान भेजने की तैयारी में।

Sep 11, 2025 - 15:09
Sep 11, 2025 - 15:18
मां की पुकार- "मेरे कलेजे का टुकड़ा लाओ": नेपाल में फंसा पेट्रोल पंप कारोबारी

नेपाल की राजधानी काठमांडू में भड़की हिंसा और अशांति ने हजारों विदेशी सैलानियों को संकट में डाल दिया है। इनमें राजस्थान के बाड़मेर जिले के पेट्रोल पंप कारोबारी पंकज चितारा (45) भी शामिल हैं, जो कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा के लिए गए थे। 9 सितंबर को काठमांडू लौटने के बाद त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बंद होने से वे पिछले तीन दिनों से एक होटल में फंसे हुए हैं। उनके परिवार का कहना है कि नेपाल में हालात बेहद खराब हैं, और वे अपने बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

मां की आंसुओं भरी अपील: "मेरे बेटे को घर लाओ"

पंकज की मां शीलादेवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने कहा, "मेरा कलेजे का टुकड़ा वहां अकेला है। फोन पर उसने बताया कि वह ठीक है, लेकिन वहां दंगे और उपद्रव की स्थिति है। मैं दिन-रात बस यही प्रार्थना कर रही हूं कि मेरा बेटा जल्दी घर लौट आए।" पंकज के रिटायर्ड पिता चंपालाल चितारा ने बताया कि वे बीजेपी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों से बार-बार संपर्क कर रहे हैं। "हम वीडियो कॉल और फोन पर पंकज से बात करते हैं, लेकिन वहां खाना-पीना भी ठीक से नहीं हो पा रहा। हम चाहते हैं कि सरकार उसे और अन्य सैलानियों को जल्द से जल्द भारत वापस लाए," उन्होंने भावुक होकर कहा।

काठमांडू में अराजकता: हवाई अड्डा बंद, उड़ानें रुकीं

पंकज 24 अगस्त को सदगुरु के ग्रुप के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे। 9 सितंबर को दोपहर 2 बजे काठमांडू लौटने के बाद अचानक भड़की हिंसा के कारण हवाई अड्डा बंद कर दिया गया। चंपालाल के अनुसार, "बुधवार को कुछ विमान और हेलिकॉप्टर हवाई अड्डे के आसपास दिखे, लेकिन सिविल उड़ानें शुरू होने की कोई जानकारी नहीं है। टिकट बुक हैं, पर उड़ानें शुरू होने की संभावना कम है।" नेपाल में बिगड़ते हालात के बीच वहां मौजूद भारतीयों के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

सरकार से आस: विशेष अभियान की मांग

चंपालाल ने भारत सरकार से अपील की है कि राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से फंसे सैलानियों को तत्काल सुरक्षित निकाला जाए। "नेपाल में कोई सुरक्षित नहीं है—न पुलिस, न नेता, न आम लोग। हमारी सरकार से गुजारिश है कि विशेष विमान या हेलिकॉप्टर भेजकर हमारे लोगों को वापस लाया जाए," उन्होंने कहा। भारतीय दूतावास ने फंसे हुए नागरिकों को होटलों में सुरक्षित रखने की व्यवस्था की है, लेकिन परिवारों का कहना है कि जब तक उनके अपने घर नहीं लौटते, उनकी चिंता खत्म नहीं होगी।

राहत के प्रयास: दूतावास और स्थानीय प्रशासन सक्रिय

भारतीय दूतावास काठमांडू में नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर फंसे हुए भारतीयों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उनकी वापसी के लिए काम कर रहा है। राजस्थान सरकार ने भी अपने नागरिकों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार विशेष विमानों के जरिए नागरिकों को निकालने की योजना बना रही है, लेकिन हवाई अड्डे के सामान्य होने तक यह प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती।

पंकज और अन्य फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षित वापसी अब उनके परिवारों की सबसे बड़ी उम्मीद है। शीलादेवी की प्रार्थना और चंपालाल की अपील भारत सरकार तक पहुंच चुकी है। जैसे ही नेपाल में स्थिति नियंत्रण में आएगी, इन सैलानियों को घर लाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

Web Desk Web Desk The Khatak