900 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में नया मोड़: पूर्व मंत्री महेश जोशी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा चलाने को राज्यपाल ने दी मंजूरी

राजस्थान के पूर्व जलदाय मंत्री और कांग्रेस नेता महेश जोशी के खिलाफ जल जीवन मिशन से जुड़े 900 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा चलाने की मंजूरी राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने दे दी है। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद ईडी और एसीबी दोनों अब अलग-अलग कोर्ट में मुकदमा चला सकेंगे। जोशी पर आरोप है कि उन्होंने बेटे की फर्म के जरिए ठेकेदारों से रिश्वत ली, जिसमें 50-55 लाख रुपये का लेन-देन शामिल है। अप्रैल 2025 में गिरफ्तारी के बाद वे 7 महीने जेल में रहे और दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। जोशी खुद को निर्दोष बताते हैं और इसे राजनीतिक साजिश करार देते हैं। यह मामला पूर्व गहलोत सरकार के दौरान योजना क्रियान्वयन में फर्जीवाड़े, फर्जी सर्टिफिकेट और रिश्वत से जुड़ा है।

Jan 9, 2026 - 18:29
900 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में नया मोड़: पूर्व मंत्री महेश जोशी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा चलाने को राज्यपाल ने दी मंजूरी

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विकास हुआ है। पूर्व जलदाय मंत्री और कांग्रेस नेता महेश जोशी के खिलाफ जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission - JJM) से जुड़े कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) का मुकदमा चलाने की राह साफ हो गई है। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत महेश जोशी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति (sanction to prosecute) प्रदान कर दी है।

यह मंजूरी लोकभवन (राजभवन) से जारी आधिकारिक बयान के माध्यम से दी गई है। राज्यपाल ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध प्रॉसीक्यूशन सामग्री की जांच के बाद यह निर्णय लिया है, जिसमें प्रारंभिक रूप से अपराध प्रमाणित होने की बात कही गई है। ऐसे मामलों में, जहां आरोपी पूर्व मंत्री या विधायक रह चुका हो, PMLA के तहत मुकदमा चलाने के लिए राज्यपाल की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है।

घोटाले का पूरा बैकग्राउंड

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल से सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। राजस्थान में इस योजना का क्रियान्वयन जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के माध्यम से होता था, और महेश जोशी पिछली अशोक गहलोत सरकार में इसी विभाग के कैबिनेट मंत्री थे।

घोटाले का अनुमानित मूल्य: लगभग 900 करोड़ जांच की शुरुआत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने की, जिसने नवंबर 2024 में महेश जोशी समेत 22 लोगों (अधिकारियों, ठेकेदारों) के खिलाफ FIR दर्ज की। आरोप थे कि फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर अयोग्य फर्मों को टेंडर दिए गए, रिश्वत ली गई और सरकारी धन की हेराफेरी की गई।प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ACB की FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। ED ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों से ली गई रिश्वत को महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी की फर्म के माध्यम से लॉन्ड्रिंग किया गया। ED के अनुसार, बेटे की फर्म को लोन के नाम पर 50-55 लाख रुपये की रिश्वत दी गई (कुछ रिपोर्टों में 2.01 करोड़ का कुल आरोप)।ED ने 24 अप्रैल 2025 को महेश जोशी को गिरफ्तार किया। वे लगभग 7 महीने (अप्रैल से नवंबर 2025 तक) जेल में रहे।

जमानत की यात्रा: ED की विशेष अदालत और राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत खारिज की (अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की)।सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में महेश जोशी को जमानत दे दी, जिसके बाद वे रिहा हुए। जोशी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि रिश्वत की राशि वापस कर दी गई थी, जो रिश्वत होने का खंडन करता है।

राज्यपाल की मंजूरी के बाद क्या होगा? राज्यपाल की इस स्वीकृति के बाद अब ED और ACB दोनों ही अलग-अलग अदालतों में महेश जोशी के खिलाफ मुकदमे आगे बढ़ा सकेंगे। PMLA के तहत मुकदमा चलने से जांच और गवाहों की जांच में तेजी आएगी। ED पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें महेश जोशी, उनके बेटे रोहित जोशी और 16 अन्य आरोपियों को शामिल किया गया है। ED ने 47.80 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी अटैच की हैं।

महेश जोशी का पक्ष

महेश जोशी ने पूरे मामले को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। उन्होंने कहा है कि टेंडर प्रक्रिया में मंत्री की कोई सीधी भूमिका नहीं होती, यह पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी होती है। वे दावा करते हैं कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है और सच्चाई न्यायालय में सामने आएगी।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.