कोटा में सरकारी वाहनों के दुरुपयोग के खिलाफ टीम नायक का सख्त ऐलान
कोटा शहर में युवाओं की टीम नायक ने सरकारी वाहनों के निजी या घरेलू उपयोग के खिलाफ सख्त अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। यदि कोई अधिकारी (IAS, RAS, पुलिस या अन्य विभाग का) सरकारी गाड़ी में परिवार के साथ या निजी काम में उपयोग करते पाया गया, तो टीम वाहन रोकेगी, परिवार को सड़क पर उतारेगी और गाड़ी संबंधित विभाग को सौंपेगी। टीम का कहना है कि सरकारी संसाधन जनसेवा के लिए हैं, न कि निजी उपयोग के लिए। यह कार्रवाई बिना पक्षपात के सभी पर लागू होगी। पहले भी टीम ने नगर निगम के सफाई टेंडर में भ्रष्टाचार उजागर किया था।
कोटा शहर में सरकारी वाहनों के निजी उपयोग को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही हैं। अब इस मुद्दे पर शहर के युवाओं की एक सक्रिय टीम "नायक" (नवभारत एसोसिएशन ऑफ यंग एंड अकाउंटेबल कार्यकर्ता) ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। टीम ने सरकारी अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि कोई अधिकारी सरकारी वाहन का निजी या घरेलू कार्यों के लिए इस्तेमाल करते पाया गया, तो उसे मौके पर ही रोका जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
टीम नायक का स्पष्ट ऐलान टीम नायक के सदस्य शशांक शर्मा ने मीडिया को बताया कि सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, "हम जनहित में यह अभियान चला रहे हैं। यदि कोई अधिकारी – चाहे वह कोटा विकास प्राधिकरण (KDA), नगर निगम, पुलिस विभाग, IAS, RAS या किसी अन्य सरकारी विभाग से जुड़ा हो – सरकारी वाहन में निजी कार्य करते या परिवार के सदस्यों के साथ घूमते मिला, तो हम उसे रोकेंगे।"सबसे सख्त ऐलान यह है कि यदि सरकारी गाड़ी में परिवार के सदस्य बैठे मिले, तो उन्हें मौके पर ही सड़क पर उतारा जाएगा। वाहन को जब्त कर संबंधित सरकारी विभाग को सौंप दिया जाएगा। शशांक शर्मा ने जोर देकर कहा कि सरकारी संसाधन जनता की सेवा के लिए हैं, न कि अधिकारियों के निजी उपयोग के लिए। यह कार्रवाई किसी एक विभाग या व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं रहेगी। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, किसी के साथ पक्षपात नहीं किया जाएगा।
टीम नायक की पृष्ठभूमि और पिछली कार्रवाइयां टीम नायक कोटा के युवाओं का एक समूह है जो शहर के जनहित से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहा है। इससे पहले इस टीम ने कोटा नगर निगम के सफाई टेंडर में कथित भ्रष्टाचार को उजागर किया था। टीम का आरोप था कि टेंडर जारी होने के बाद बनी एक फर्म को ठेका दे दिया गया, जिसे लेकर उन्होंने प्रदर्शन की योजना भी बनाई थी। टीम का मानना है कि भ्रष्टाचार और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग से जनता का हक मारा जा रहा है, और युवा अब चुप नहीं बैठेंगे।
क्यों जरूरी है यह अभियान? राजस्थान सहित पूरे देश में सरकारी वाहनों के दुरुपयोग की शिकायतें आम हैं। अधिकारी अक्सर सरकारी गाड़ियां निजी कामों, परिवार के साथ घूमने या अन्य गैर-आधिकारिक कार्यों के लिए इस्तेमाल करते पाए जाते हैं। इससे न केवल सरकारी खजाने पर बोझ पड़ता है, बल्कि जनता में नाराजगी भी बढ़ती है। कोटा जैसे शहर में, जहां प्रशासनिक गतिविधियां ज्यादा हैं, यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। टीम नायक का यह कदम अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जहां नागरिक समूह सरकारी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आगे आ रहे हैं।