कोटा में ढकनिया रेलवे स्टेशन के पास झोपड़ियों में लगी आग, समय रहते काबू में किया गया
राजस्थान के कोटा में ढकनिया रेलवे स्टेशन के पास मजदूरों की झोपड़ियों में रविवार सुबह आग लग गई। आग दो झोपड़ियों तक फैली, लेकिन दमकल विभाग ने 15 मिनट में काबू पा लिया। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई और मजदूर काम पर निकल चुके थे। संभावित कारण चूल्हा जलाना बताया जा रहा है।
कोटा, 21 दिसंबर 2025: राजस्थान के कोटा शहर में रविवार सुबह ढकनिया रेलवे स्टेशन के पास मजदूरों की झोपड़ियों में अचानक आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि आग लगने के समय अधिकांश मजदूर काम पर निकल चुके थे, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई से आग पर करीब 15 मिनट में पूरी तरह काबू पा लिया गया और इसे आगे फैलने से रोका जा सका।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने बताया कि ढकनिया रेलवे स्टेशन के निकट रेलवे की खाली जमीन पर मजदूरों ने कच्ची झोपड़ियां बना रखी हैं। इनकी संख्या एक दर्जन से अधिक है। रविवार सुबह अचानक एक झोपड़ी में आग भड़क उठी। देखते ही देखते यह पास की दूसरी झोपड़ी तक फैल गई। आग की लपटें और घना धुआं उठता देख पास की झोपड़ियों में रह रहे कुछ परिवारों ने शोर मचाया, जिससे आसपास के लोग इकट्ठा हो गए।
स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की एक गाड़ी मौके पर पहुंची। अग्निशमन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद करीब 15 मिनट में आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया। राकेश व्यास के अनुसार, आग मुख्य रूप से दो झोपड़ियों तक सीमित रही और इसे आगे बढ़ने नहीं दिया गया।
आग से प्रभावित झोपड़ियों में रखे कपड़े, बिस्तर और कुछ घरेलू सामान जलकर राख हो गए, जिससे रहने वालों को आर्थिक नुकसान हुआ। हालांकि, सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि घटना के समय पहली झोपड़ी में कोई मौजूद नहीं था, क्योंकि मजदूर सुबह काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे या निकल चुके थे। पास की झोपड़ियों में मौजूद परिवारों ने समय पर धुआं देखकर अलार्म उठाया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
आग लगने के संभावित कारण के बारे में राकेश व्यास ने बताया कि सुबह के समय मजदूरों द्वारा चूल्हा जलाने या खाना बनाने के दौरान लापरवाही से यह घटना हुई हो सकती है। हालांकि, फिलहाल आग के सटीक कारण की जांच की जा रही है और स्पष्ट नहीं हो पाया है।
यह घटना कोटा जैसे शहर में झोपड़ी बस्तियों की असुरक्षा को फिर से उजागर करती है, जहां कच्चे मकान और खुले चूल्हे जैसी व्यवस्थाएं आगजनी के जोखिम को बढ़ाती हैं। दमकल विभाग की मुस्तैदी ने इस बार बड़ा नुकसान होने से बचा लिया, लेकिन ऐसे इलाकों में सुरक्षा उपायों की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को फिलहाल स्थानीय प्रशासन से कोई राहत की जानकारी नहीं मिली है।