पचपदरा रिफाइनरी से पहले सियासी घमासान—भीड़ को लेकर उठे ऐसे आरोप, सामने आए ‘सबूत’ से मचा हड़कंप

पचपदरा रिफाइनरी से पहले भीड़ जुटाने के आरोपों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।

Apr 20, 2026 - 10:36
पचपदरा रिफाइनरी से पहले सियासी घमासान—भीड़ को लेकर उठे ऐसे आरोप, सामने आए ‘सबूत’ से मचा हड़कंप

पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन से पहले राजस्थान की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 21 अप्रैल को होने वाले दौरे से पहले बाड़मेर-जैसलमेर और बालोतरा के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सांसद का कहना है कि इस बड़े आयोजन के लिए प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है और भीड़ जुटाने के लिए स्कूली बच्चों, मनरेगा श्रमिकों और सरकारी कर्मचारियों पर दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कई दावे और कथित “सबूत” भी साझा किए हैं।

 छात्रों को लेकर विवाद

बेनीवाल के अनुसार, सरकारी स्कूलों के 11वीं और 12वीं के छात्रों को “रिफाइनरी भ्रमण” के नाम पर कार्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा निजी स्कूलों की बसों और छात्रों को भी लाने के निर्देश दिए जाने का आरोप लगाया गया है। सांसद ने इसे शिक्षा व्यवस्था का दुरुपयोग बताया है।

बसों के अधिग्रहण से बढ़ी परेशानी

राजस्थान में शादी-ब्याह के सीजन के बीच परिवहन विभाग द्वारा हजारों बसों के अधिग्रहण के फैसले पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बसें रैलियों में लगाई जा रही हैं।

सरकारी मशीनरी पर दबाव का आरोप

सांसद ने यह भी आरोप लगाया है कि ग्राम विकास अधिकारी (VDO), महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य विभागों के कर्मचारियों पर मनरेगा श्रमिकों और योजनाओं के लाभार्थियों को कार्यक्रम में लाने का दबाव बनाया जा रहा है।

 

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस पूरे मामले ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है। विपक्ष का आरोप है कि जनसमर्थन दिखाने के लिए प्रशासन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

रिफाइनरी का महत्व

विवादों के बीच पचपदरा रिफाइनरी परियोजना को पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक विकास के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, जिससे रोजगार और निवेश के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground