डंपर-बोलेरो की भीषण टक्कर में 3 बाराती जिंदा जले, 5 गंभीर: NH-709 बना ‘डेथ जोन’, 45 मिनट देर से पहुंची मदद

राजगढ़-पिलानी NH-709 पर बोलेरो और डंपर की भीषण टक्कर के बाद लगी आग में 3 बारातियों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि 5 गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को जयपुर रेफर किया गया है। हादसे के बाद एम्बुलेंस और दमकल की 45 मिनट देरी से पहुंचने पर सवाल उठे हैं।

Apr 24, 2026 - 13:29
डंपर-बोलेरो की भीषण टक्कर में 3 बाराती जिंदा जले, 5 गंभीर: NH-709 बना ‘डेथ जोन’, 45 मिनट देर से पहुंची मदद

राजस्थान के राजगढ़-पिलानी नेशनल हाईवे-709 पर गुरुवार रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें तीन युवकों की जिंदा जलने से दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है और उन्हें इलाज के लिए जयपुर रेफर किया गया है।

हादसा रात करीब 10 बजे उस समय हुआ, जब हनुमानगढ़ के मनदपुरा गांव से कुछ युवक बोलेरो गाड़ी में सवार होकर पिलानी एक बारात में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रहे रोड़ी से भरे डंपर से उनकी सीधी भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि जोरदार धमाके के साथ दोनों वाहन आग की लपटों में घिर गए और कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि बोलेरो में सवार तीन लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला और वे वाहन के अंदर ही जिंदा जल गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और हाईवे पर लंबा जाम लग गया।

सूचना मिलते ही हमीरवास थाना प्रभारी रायसिंह सुथार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से पांच घायलों को किसी तरह जलती गाड़ी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक वे 50 प्रतिशत से अधिक झुलस चुके थे।

घायलों में पंकज (20), कमल (22), आनंद (20) निवासी मनदपुरा (हनुमानगढ़), विकास (24) निवासी सिद्धमुख और आशिष (20) निवासी हिसार शामिल हैं। सभी को पहले पिलानी के बिड़ला अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत के चलते उन्हें झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल और बाद में जयपुर रेफर कर दिया गया।

45 मिनट देर से पहुंची एम्बुलेंस और दमकल

हादसे के बाद राहत कार्य में बड़ी लापरवाही सामने आई। घटनास्थल पिलानी के नजदीक होने के बावजूद एम्बुलेंस और दमकल को मौके पर पहुंचने में करीब 45 मिनट का समय लग गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर मदद पहुंचती, तो शायद कुछ जानें बचाई जा सकती थीं।

नियमों के अनुसार टोल प्लाजा के पास आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन इस हादसे ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। मौके पर ऐसी कोई सुविधा मौजूद नहीं मिली।

खतरनाक मोड़ और झाड़ियां बनी हादसे की वजह

हादसे की एक बड़ी वजह हाईवे किनारे उगी घनी झाड़ियां और जंगली पौधे भी बताए जा रहे हैं, जिनके कारण मोड़ पर सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते। यह इलाका लंबे समय से दुर्घटनाओं के लिए कुख्यात बना हुआ है।

NH-709 बना ‘डेथ जोन’

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में इस हाईवे के करीब 20 किलोमीटर के दायरे में 8 लोगों की मौत हो चुकी है। थिरपाली के पास एक ही स्थान पर तीन लोगों की जान जा चुकी है, इसके बावजूद नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं।

शवों की पहचान बनी चुनौती

हादसा इतना भयावह था कि मृतकों के शव पूरी तरह जल चुके हैं। पुलिस के अनुसार, शवों की पहचान करना मुश्किल हो गया है। फिलहाल शवों को चूरू जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है और उनकी पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.