कातिल पति को उम्रकैद: पत्नी को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने के क्रूर हत्याकांड में कोर्ट ने सुनाई सख्त सजा, न्यायाधीश ने कही दिल दहला देने वाली बातें
झुंझुनूं जिले में 1 अप्रैल 2021 को आरोपी पति राजकुमार ने अपनी पत्नी सुमन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। अपर सेशन कोर्ट ने राजकुमार को उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने इसे भरोसे की क्रूर हत्या बताते हुए सख्त टिप्पणी की कि पति रक्षक की बजाय भक्षक बन गया, और पीड़िता के अंतिम क्षणों का असहनीय दर्द शब्दों से परे है।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक बेहद ही क्रूर और दिल दहला देने वाले हत्याकांड में आरोपी पति को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। अपर सेशन न्यायालय संख्या एक, झुंझुनूं की न्यायाधीश श्रीमती सीमा ढाका ने आरोपी राजकुमार पुत्र बृजलाल, निवासी आनंदपुरा-बिसाऊ को आजीवन कारावास (उम्रकैद) के साथ 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि आरोपी यह जुर्माना नहीं चुकाता, तो उसे अतिरिक्त 6 महीने की सजा काटनी होगी।
घटना का विवरण
यह अमानवीय घटना 1 अप्रैल 2021 को हुई थी। आरोपी राजकुमार ने अपनी पत्नी सुमन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गईं। सुमन को इलाज के लिए जयपुर के सीकेएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 4 अप्रैल 2021 को उनकी मौत हो गई। सुमन के पिता करणाराम (निवासी विजयपुरा सांखू, चूरू) ने 4 अप्रैल को बिसाऊ थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि सुमन का विवाह राजकुमार से लगभग 10 साल पहले हुआ था। घटना की जानकारी उन्हें गांव वालों से मिली, जबकि ससुराल पक्ष उन्हें गुमराह करता रहा।
पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपी राजकुमार के खिलाफ हत्या का चालान कोर्ट में पेश किया। अभियोजन पक्ष ने 17 गवाहों के बयान दर्ज कराए और 33 दस्तावेज पेश किए। अपर लोक अभियोजक और मृतका की ओर से अधिवक्ता बिरजू सिंह शेखावत ने पैरवी की। अभियोजन ने इसे अत्यंत गंभीर मामला बताते हुए कठोरतम सजा की मांग की।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायालय ने साक्ष्यों का गहन विश्लेषण करते हुए निर्णय में गहरी भावनात्मक और सामाजिक टिप्पणियां कीं। न्यायाधीश ने कहा कि समाज में एक महिला अपने पिता के बाद सबसे अधिक विश्वास अपने पति पर करती है। विवाह के बाद वह पिता का घर छोड़कर पति के साथ जीवन बिताती है। पति-पत्नी का रिश्ता प्रेम, समर्पण और विश्वास पर टिका होता है, और पति उसका रक्षक माना जाता है।
लेकिन इस मामले में रक्षक ही भक्षक बन गया। न्यायाधीश ने लिखा:
"मृतका यह सोच भी नहीं सकती थी कि उसका रक्षक ही उसके साथ ऐसा क्रूर व्यवहार करेगा और जीवित अवस्था में पेट्रोल छिड़ककर आग लगा देगा। ऐसे वीभत्स कृत्य के समय उसके अंतर्मन पर क्या बीती होगी, इसे शब्दों में व्यक्त करना अत्यंत कठिन है। लेकिन यह तय है कि उस क्षण उसके वैवाहिक जीवन के सभी सुनहरे सपने और विवाह संस्था के प्रति विश्वास आग की लपटों में उसके शरीर के साथ तार-तार हो गए होंगे। वह असहनीय मानसिक एवं शारीरिक दर्द से गुजरी होगी।"कोर्ट ने इसे भरोसे की क्रूर हत्या करार दिया और आरोपी को कड़ी सजा सुनाई।
अन्य निर्देश
कोर्ट ने प्रकरण को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत क्षतिपूर्ति योग्य माना है। मृतका सुमन के विधिक वारिसों को नियमानुसार मुआवजा प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।