झालावाड़ पुलिस हिरासत में युवक की मौत: परिवार का मारपीट का आरोप, पुलिस ने किया खंडन
राजस्थान के झालावाड़ में पुलिस हिरासत में घायल हुए मजदूर अनिल की कोटा अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिवार ने पुलिस पर बेरहमी से मारपीट कर पैर तोड़ने का आरोप लगाया और झूठे चाकूबाजी मामले में फंसाने का दावा किया। पुलिस ने आरोप खारिज करते हुए कहा कि अनिल गिरफ्तारी से भागते समय फिसलकर गिरा था, कोई मारपीट नहीं हुई। मामले में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा और जांच जारी है।
राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक युवक अनिल की मौत ने पुलिस हिरासत में कथित मारपीट के गंभीर आरोपों को जन्म दिया है। परिवार का दावा है कि पुलिस ने अनिल को चाकूबाजी के एक झूठे मामले में फंसाकर बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी टांग टूट गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि अनिल गिरफ्तारी से भागते समय फिसलकर गिर गया था, जिससे चोट लगी। यह मामला करीब 10 दिन पुराना है और मौत कोटा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान हुई।
घटना का विवरण परिवार की ओर से आरोप: मृतक अनिल के बड़े भाई रवि ने बताया कि कोतवाली थाना पुलिस ने अनिल को उसके घर से लगभग 10 दिन पहले उठाया था। आरोप है कि पुलिस ने उसे चाकूबाजी के झूठे मामले में फंसाया और थाने में या हिरासत में 5-6 पुलिसकर्मियों ने मिलकर बेरहमी से मारपीट की। इससे अनिल की एक टांग टूट गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया।रवि के अनुसार, अनिल मजदूरी का काम करता था और निर्दोष था। कॉलोनी में हुए एक झगड़े में किसी दूसरे युवक ने चाकू मारे थे, लेकिन रिपोर्ट में अनिल का नाम झूठा लिखवा दिया गया। हमलावर ने खुद कबूल किया कि अनिल ने चाकू नहीं मारे, फिर भी पुलिस ने गलत कार्रवाई की।अनिल की मां ने बताया कि कई पुलिसकर्मी घर पहुंचे, दरवाजा खुलवाया और अनिल को ले गए। जब परिजन थाने पहुंचे तो पुलिस ने अनिल के वहां होने से इनकार कर दिया। बाद में पता चला कि उसके साथ मारपीट हुई और टांग तोड़ दी गई।इलाज और मौत: घायल अनिल को पहले झालावाड़ जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर कोटा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।परिवार की मांग: परिजनों ने मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि अनिल का नाम सिर्फ एक मामूली झगड़े में था, फिर भी उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
पुलिस की सफाई झालावाड़ एसपी अमित बुडानिया ने परिवार के आरोपों को गलत बताया। पुलिस के अनुसार:अनिल 18 दिसंबर को दर्ज चाकूबाजी के मामले में आरोपी था और फरार चल रहा था।पुलिस उसे पकड़ने गई तो वह हाथ छुड़ाकर भागने लगा। इसी दौरान फिसलकर गिरने से उसकी टांग में फ्रैक्चर हो गया।पुलिस ने कोई मारपीट नहीं की। अनिल को थाने ले जाने की बजाय सीधे अस्पताल पहुंचाया गया। परिजनों को सूचना दी गई और बड़े भाई की मौजूदगी में इलाज शुरू कराया गया।मामले की गंभीरता को देखते हुए शव को मोर्चरी में रखवाया गया है। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा।अस्पताल और मोर्चरी परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
आगे की जांच यह मामला पुलिस हिरासत में मौत का है, इसलिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। पोस्टमॉर्टम मेडिकल बोर्ड से कराने का निर्णय लिया गया है, जो चोट के कारण और मौत की वजह स्पष्ट कर सकता है। परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि पुलिस अपने बयान पर कायम है।