जालोर कलेक्ट्रेट घेराव: झाब पंचायत समिति बहाली की मांग पर हजारों ग्रामीणों ने जुटाकर सड़क जाम की, पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए

जालोर जिले में झाब ग्राम पंचायत को पंचायत समिति घोषित कर बाद में निरस्त करने के फैसले के विरोध में हजारों ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट घेराव किया। 24 ग्राम पंचायतों के लोग 150+ बसों, कारों-बाइकों से रैली निकालकर पहुंचे, सड़क जाम कर धरना दिया। पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर रास्ता रोका और वाहनों को डायवर्ट किया। 31 दिनों से जारी आंदोलन में ग्रामीणों की मांग है कि झाब को दोबारा पंचायत समिति का दर्जा बहाल किया जाए, अन्यथा प्रदर्शन जारी रहेगा।

Jan 27, 2026 - 15:21
जालोर कलेक्ट्रेट घेराव: झाब पंचायत समिति बहाली की मांग पर हजारों ग्रामीणों ने जुटाकर सड़क जाम की, पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए

जालोर, 27 जनवरी 2026: राजस्थान के जालोर जिले में झाब क्षेत्र को पंचायत समिति का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन तेज हो गया है। मंगलवार सुबह झाब ग्राम पंचायत और आसपास की 24 ग्राम पंचायतों के हजारों लोग सैकड़ों वाहनों में सवार होकर जालोर कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर पहुंचकर सड़क जाम कर दी और धरने पर बैठ गए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कलेक्ट्रेट के प्रवेश द्वार पर बैरिकेड्स लगाए और आने-जाने वाले वाहनों को डायवर्ट कर दिया।

आंदोलन की पृष्ठभूमि और पूरा मामला

दरअसल, राज्य सरकार ने 28 नवंबर 2025 को गजट जारी कर झाब ग्राम पंचायत को पंचायत समिति घोषित किया था। इस फैसले से झाब और आसपास के क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल था, क्योंकि इससे प्रशासनिक सुविधाएं निकटतम स्तर पर उपलब्ध हो जातीं। लेकिन ठीक एक महीने बाद, 28 दिसंबर 2025 को सरकार ने अपना फैसला बदलते हुए झाब पंचायत समिति को निरस्त कर दिया और उसके स्थान पर भादरूणा (या भादरुणा) को पंचायत समिति का मुख्यालय घोषित कर दिया।

इस बदलाव से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। उनका कहना है कि झाब में पहले से ही कई बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं, जैसे 1971 से वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और 1975 से पुलिस थाना। ऐसे में पंचायत समिति का मुख्यालय यहां से हटाना क्षेत्र के साथ अन्याय है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह फैसला राजनीतिक दबाव या पक्षपात के कारण लिया गया है।

31 दिनों से जारी धरना-प्रदर्शन

झाब पंचायत समिति बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में यह आंदोलन पिछले 31 दिनों से लगातार चल रहा है। ग्रामीणों ने धरने पर बैठकर प्रशासन को अपनी मांगें सौंपी हैं, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। मंगलवार को आंदोलन को और तेज करने के लिए 150 से अधिक बसों, कारों और बाइकों के साथ रैली निकाली गई। हजारों की संख्या में लोग जुटे, जिसमें किसान, युवा, महिलाएं और जनप्रतिनिधि शामिल थे।प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि झाब को दोबारा पंचायत समिति का दर्जा नहीं मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। कुछ संगठनों ने चुनाव बहिष्कार की भी धमकी दी है। पहले भी ट्रैक्टर रैली, महापंचायत और उपखंड कार्यालय घेराव जैसे कार्यक्रम हो चुके हैं।

पुलिस की व्यवस्था और स्थिति

पुलिस ने कलेक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी है। बैरिकेड्स लगाकर रास्ता बंद किया गया और वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया जा रहा है। अभी तक कोई बड़ी झड़प की खबर नहीं है, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन ने ग्रामीणों से बातचीत की अपील की है, लेकिन प्रदर्शनकारी अड़े हुए हैं।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.