जयपुर में छिपा था बड़ा राज? इलेक्ट्रिशियन बनकर रह रहा ‘खरगोश’, फर्जी पहचान से खेला ऐसा खेल कि एजेंसियां भी रह गईं हैरान

जयपुर में इलेक्ट्रिशियन बनकर रह रहा शख्स सालभर तक फर्जी पहचान से छिपा रहा और विदेश तक पहुंच गया… अब खुला बड़ा राज।

Apr 23, 2026 - 09:57
जयपुर में छिपा था बड़ा राज? इलेक्ट्रिशियन बनकर रह रहा ‘खरगोश’, फर्जी पहचान से खेला ऐसा खेल कि एजेंसियां भी रह गईं हैरान

जयपुर। राजधानी में सुरक्षा एजेंसियों को चौंकाने वाला एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जहां लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ ने एक आम इलेक्ट्रिशियन बनकर एक साल तक गुपचुप जिंदगी बिताई और इसी दौरान फर्जी दस्तावेजों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाजाही भी कर ली।

जांच में सामने आया है कि आतंकी ने जयसिंहपुरा खोर थाना क्षेत्र के सड़वा मोड़ स्थित राशिद विहार कॉलोनी में एक छोटे से किराए के कमरे में शरण ली थी। यहां वह मात्र 1500 रुपये महीने के किराए पर रह रहा था और किसी को उस पर शक नहीं हुआ।

फर्जी पहचान से बना पासपोर्ट, विदेश तक पहुंचा

जानकारी के अनुसार, आरोपी ने फर्जी किरायानामा तैयार कर उसे नोटरी से प्रमाणित कराया। इसी आधार पर उसने ‘सज्जाद’ नाम से पासपोर्ट बनवाया और इंडोनेशिया व सऊदी अरब जैसे देशों तक यात्रा की। हैरानी की बात यह रही कि पुलिस वेरिफिकेशन भी सामान्य रूप से हो गया, जिससे उसकी फर्जी पहचान और मजबूत हो गई।

दिन में खामोशी, रात में लैपटॉप पर काम

स्थानीय लोगों के अनुसार उमर बेहद कम बोलता था और खुद को इलेक्ट्रिशियन या कभी ‘अमजद’ नाम से परिचित कराता था। वह ज्यादातर समय कमरे में बंद रहता और करीब 16 घंटे तक लैपटॉप पर काम करता था। केवल नमाज के लिए ही बाहर निकलता था।

सुनसान इलाका बना सुरक्षित ठिकाना

राशिद विहार कॉलोनी और सड़वा मोड़ का इलाका अपेक्षाकृत शांत और कम भीड़-भाड़ वाला है। इसी का फायदा उठाकर आरोपी लंबे समय तक बिना किसी शक के यहां रहा। स्थानीय लोगों ने बताया कि वह किसी सामाजिक गतिविधि में शामिल नहीं होता था और हमेशा अकेला रहता था।

जांच में बड़ा खुलासा

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब जम्मू-कश्मीर पुलिस को अहम इनपुट मिला। इसके बाद राजस्थान एटीएस के साथ मिलकर कार्रवाई की गई। एटीएस के अनुसार, चार संदिग्धों को हिरासत में लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस को सौंप दिया गया है, जिनमें मकान मालिक भी शामिल है।

जांच एजेंसियां अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि आखिर इतने समय तक फर्जी दस्तावेजों और पहचान के सहारे कैसे सिस्टम को चकमा दिया गया।

Kashish Sain Bringing truth from the ground