जयपुर के एसएमएस अस्पताल में गलत ब्लड चढ़ाने से गर्भवती चैना देवी की मौत: जांच कमेटी ने माना हर कदम पर लापरवाही, 5 जिम्मेदारों पर सवाल

जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल में मई 2025 में टोंक जिले की 23 वर्षीय गर्भवती चैना देवी को गलत ब्लड ग्रुप (बी+ की जगह ए+ ) चढ़ाने से उनकी मौत हो गई। महिला पहले से टीबी, निमोनिया और एनीमिया से पीड़ित थीं, गर्भ में 5 महीने का बच्चा भी मर गया। जांच कमेटी और एफएसएल रिपोर्ट ने ब्लड बैंक की लापरवाही, रिवर्स ग्रुपिंग न करने, क्रॉस मैचिंग की अनदेखी को साबित किया। 5 जिम्मेदार स्टाफ पर कार्रवाई की तैयारी, भविष्य में बारकोड सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी अनिवार्य। यह अस्पताल में पिछले 18 महीनों में तीसरी ऐसी घटना है, लीगल एक्सपर्ट्स के अनुसार एफआईआर और मुआवजे का केस बन सकता है।

Jan 17, 2026 - 11:08
जयपुर के एसएमएस अस्पताल में गलत ब्लड चढ़ाने से गर्भवती चैना देवी की मौत: जांच कमेटी ने माना हर कदम पर लापरवाही, 5 जिम्मेदारों पर सवाल

जयपुर के प्रसिद्ध सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल में एक दिल दहला देने वाली घटना ने फिर से चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। टोंक जिले के निवाई क्षेत्र के बड़ा गांव की 23 वर्षीय गर्भवती महिला चैना देवी को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाने के कारण उनकी और उनके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। यह घटना मई 2025 में हुई थी, लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट सात महीने बाद (जनवरी 2026 के आसपास) सामने आई है, जिसमें अस्पताल के ब्लड बैंक और स्टाफ की व्यवस्थागत लापरवाही को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है।

घटना का पूरा क्रम

चैना देवी को 9 मई 2025 को बुखार, सांस लेने में तकलीफ और छाती में इंफेक्शन की शिकायत के साथ एसएमएस अस्पताल के मेडिकल यूनिट 5 के 4बी वार्ड में भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला कि वह पांच महीने की गर्भवती थीं और उन्हें टीबी भी था। उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई, जिसके कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

19 मई के आसपास गर्भ में बच्चे की हार्टबीट नहीं मिलने पर डॉक्टरों ने वेंटिलेटर पर ही डिलीवरी कराई और मृत बच्चे को बाहर निकाला।डिलीवरी के बाद महिला का हीमोग्लोबिन स्तर तेजी से गिरा। पहले उन्हें सही ब्लड (ए पॉजिटिव) चढ़ाया गया था, लेकिन 20-21 मई की रात को दोबारा ब्लड की जरूरत पड़ी।ब्लड बैंक ने बिना उचित जांच और रिवर्स ग्रुपिंग के 'ए' पॉजिटिव ब्लड जारी कर दिया, जबकि महिला का वास्तविक ब्लड ग्रुप 'बी' पॉजिटिव था।ब्लड चढ़ाने के कुछ मिनटों में ही रिएक्शन शुरू हो गया – शरीर कांपने लगा, बुखार चढ़ा, मूत्र में खून आने (हेमट्यूरिया) जैसी गंभीर समस्याएं हुईं।21-22 मई 2025 की रात को चैना देवी की मौत हो गई।परिजनों का आरोप था कि गलत ब्लड चढ़ाने से उनकी मौत हुई, जबकि अस्पताल ने शुरुआत में इनकार किया था। बाद में जांच में गलती साबित हुई।

जांच कमेटी की प्रमुख निष्कर्ष: 5 जिम्मेदारों पर लापरवाही का ठीकरा

हाईलेवल जांच कमेटी (जिसमें बाद में एफएसएल रिपोर्ट भी शामिल हुई) ने पुष्टि की कि यह मौत गलत ब्लड ट्रांसफ्यूजन के कारण हुई, हालांकि महिला की पहले से मौजूद बीमारियां (टीबी, निमोनिया, एनीमिया) भी योगदान दे रही थीं। कमेटी ने इसे सिस्टेमेटिक फेलियर बताया और पांच जिम्मेदार (मुख्य रूप से जूनियर स्टाफ, ब्लड बैंक कर्मी, नर्सिंग स्टाफ और संबंधित डॉक्टर) पर लापरवाही का आरोप लगाया।

कमेटी ने माना कि:

महिला के सैंपल की रिवर्स ग्रुपिंग नहीं की गई।ब्लड बैग जारी करने से पहले क्रॉस मैचिंग की पुष्टि नहीं हुई।बारकोड या उचित पहचान प्रणाली का पालन नहीं हुआ।एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) की अनदेखी की गई।

भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव

ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले रिवर्स ग्रुपिंग और क्रॉस मैचिंग की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी अनिवार्य।ब्लड सैंपल और बैग पर बारकोड आधारित पहचान प्रणाली लागू करना।हर तीन महीने में ट्रांसफ्यूजन ऑडिट कमेटी द्वारा निरीक्षण।एसओपी का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना।चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर लापरवाहों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

लीगल एक्सपर्ट्स की राय: एफआईआर तक हो सकती है

लीगल एक्सपर्ट एडवोकेट हीरेन पटेल के अनुसार, गलत ब्लड चढ़ाना गंभीर मेडिकल नेग्लिजेंस है। ऐसे मामलों में:क्रिमिनल केस के तहत एफआईआर दर्ज हो सकती है (आईपीसी की धाराओं के तहत)।उपभोक्ता अदालत में मुआवजे की मांग की जा सकती है।सिविल सूट दायर कर डैमेज क्लेम किया जा सकता है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.