दिल्ली पुलिस का 'ऑपरेशन साई-हॉक 2.0': साइबर ठगों की कमर तोड़ने वाला बड़ा अभियान
दिल्ली पुलिस ने 10-11 दिसंबर 2025 को 'ऑपरेशन साइहॉक 2.0' चलाकर साइबर ठगों के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया। 5000 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम ने कई राज्यों में छापेमारी की, जिसमें 7000 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, 1100 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं और 944 करोड़ रुपये की ठगी के फंड ट्रेस किए गए। यह अभियान साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं को रोकने और ठगों के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए चलाया गया।
देश में साइबर क्राइम की बढ़ती घटनाओं ने आम जनता को काफी परेशान कर रखा है। पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल्स, OTP फ्रॉड, बैंकिंग और UPI धोखाधड़ी, फर्जी निवेश स्कीम्स तथा लोन ऐप्स के जरिए ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। दिल्ली पुलिस के साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रोजाना सैकड़ों शिकायतें दर्ज हो रही थीं, जहां लोगों की मेहनत की कमाई कुछ ही मिनटों में साइबर ठगों के हाथों लुट जाती थी। इन संगठित साइबर गिरोहों की कमर तोड़ने और उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया।इसके तहत 10 और 11 दिसंबर 2025 को लगातार 48 घंटे तक 'ऑपरेशन साई-हॉक 2.0' (Operation CyHawk 2.0) चलाया गया। यह अभियान दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट की कमान में संचालित हुआ। IFSO यूनिट के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस राजनेश गुप्ता ने बताया कि यह ऑपरेशन पहली फेज (नवंबर 2025 में हुई) की तुलना में काफी व्यापक और प्रभावी था। पहली फेज में साइबर क्राइम की शिकायतों में काफी कमी आई थी, जिसके बाद दूसरा फेज शुरू किया गया।
अभियान की खासियतें और सफलता बड़ी तैनाती: अभियान में 5,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीमों ने हिस्सा लिया। मल्टी-स्टेट छापेमारी: दिल्ली के अलावा ओडिशा, महाराष्ट्र, केरल सहित करीब 10 राज्यों में एक साथ रेड की गईं। टारगेट: सिर्फ गिरफ्तारियां नहीं, बल्कि साइबर ठगों के पूरे फाइनेंशियल और ऑपरेशनल नेटवर्क पर सीधा वार। इसमें म्यूल बैंक अकाउंट्स (ठगी के पैसे पार्क करने वाले खाते), फर्जी SIM कार्ड्स, ATM कार्ड्स, लैपटॉप, मोबाइल फोन्स, नकद हैंडलर्स और डिजिटल ट्रांजेक्शन चेन को ट्रैक कर ध्वस्त किया गया। परिणाम:करीब 7,000 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया गया या पूछताछ के लिए रोका गया। 1,100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार या बाउंड डाउन किया गया। कुल 2,880 से अधिक लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई (यह पहली फेज से 200% ज्यादा)। ठगी के ₹944 करोड़ के फंड ट्रेस किए गए। बड़ी मात्रा में मोबाइल, लैपटॉप, SIM कार्ड्स, ATM कार्ड्स, बैंक पासबुक, नकद और फर्जी दस्तावेज बरामद।सहयोग: इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और गृह मंत्रालय के साथ मिलकर ऑपरेशन चलाया गया।दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा ने इसे साइबर अपराध के खिलाफ एक मजबूत संदेश बताया और कहा कि दिल्ली को साइबर ठगों के लिए असुरक्षित जगह बनाना पुलिस की प्राथमिकता है। इस अभियान से न केवल ठगों की नींद उड़ गई, बल्कि उनके पूरे इकोसिस्टम को गहरा झटका लगा। पहली फेज के बाद हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल्स की संख्या 3,600 से घटकर 2,400 हो गई थी, और इस दूसरी फेज से और ज्यादा कमी की उम्मीद है।
जनता से अपील: सतर्क रहें, ठगी से बचें दिल्ली पुलिस ने अभियान के साथ-साथ जन जागरूकता अभियान भी चलाया। पुलिस ने लोगों से अपील की है:किसी को भी अपना OTP, PIN, CVV या बैंक डिटेल्स न बताएं। अनजान लिंक्स पर क्लिक न करें। फर्जी कॉल्स, मैसेज या हाई रिटर्न वाली निवेश स्कीम्स पर भरोसा न करें। डिजिटल अरेस्ट या पुलिस बनकर धमकी देने वाले फ्रॉड से सावधान रहें। किसी भी साइबर ठगी की घटना होने पर तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।