RPSC भर्ती में ऐसा क्या पकड़ा गया कि खुल गई फर्जी डिग्री गैंग की परतें? मास्टरमाइंड गिरफ्त में, जानिए पूरा खेल!

सरकारी नौकरी पाने का सपना… लेकिन रास्ता चुना फर्जी डिग्री का। RPSC प्राध्यापक भर्ती 2022 में एक मामूली लगने वाली जांच ने ऐसा राज खोला, जिसने पूरे फर्जी डिग्री रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया। नकली एम.ए. डिग्री, जाली दस्तावेज, फर्जी मुहरें और सिग्नेचर—सब कुछ इतनी सफाई से तैयार किया गया था कि पहली नजर में असली लगें। लेकिन एक छोटी सी चूक ने पूरे खेल को उजागर कर दिया। अब मास्टरमाइंड गिरफ्त में है, कई आरोपी पकड़े जा चुके हैं और जांच लगातार गहराती जा रही है… आखिर यह नेटवर्क कितना बड़ा है? जानिए पूरा मामला।

Apr 23, 2026 - 14:30
RPSC भर्ती में ऐसा क्या पकड़ा गया कि खुल गई फर्जी डिग्री गैंग की परतें? मास्टरमाइंड गिरफ्त में, जानिए पूरा खेल!

राजस्थान लोक सेवा आयोग (Rajasthan Public Service Commission) की प्राध्यापक (हिन्दी) भर्ती 2022 में एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। फर्जी डिग्री के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने की साजिश का खुलासा होने के बाद स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला न केवल भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि प्रदेश में सक्रिय संगठित फर्जी डिग्री रैकेट की गंभीरता को भी उजागर करता है।

एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस Vishal Bansal के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत दस्तावेज सत्यापन के दौरान हुई। अभ्यर्थी कमला कुमारी ने आवेदन के समय Mewar University से जारी एम.ए. (हिन्दी) की डिग्री प्रस्तुत की थी। जब आयोग ने इस डिग्री का सत्यापन कराया, तो यूनिवर्सिटी प्रशासन ने साफ इनकार कर दिया कि उनके रिकॉर्ड में ऐसी कोई डिग्री जारी ही नहीं की गई है। इसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया और जांच एजेंसियां सक्रिय हो गईं।

इस मामले में 20 मार्च 2023 को Ajmer के सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शुरुआती जांच में ही यह संकेत मिल गए थे कि मामला केवल एक फर्जी डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस के सामने चौंकाने वाले खुलासे होते गए।

जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने सुनियोजित तरीके से फर्जी अंकतालिकाएं, डिग्री, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और चरित्र प्रमाण पत्र तैयार किए। इन दस्तावेजों को असली जैसा दिखाने के लिए यूनिवर्सिटी अधिकारियों की नकली मुहरें तैयार की गईं और फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए। इतना ही नहीं, इन दस्तावेजों की गुणवत्ता इतनी पेशेवर थी कि पहली नजर में इन्हें पहचानना बेहद मुश्किल था।

इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड के रूप में Dhwajkirti Sharma का नाम सामने आया। 55 वर्षीय शर्मा, जो Bhilwara का निवासी है, को 22 अप्रैल को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर गिरफ्तार किया गया। उसे न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पहले भी इसी तरह के फर्जी डिग्री मामलों में शामिल रह चुका है, जिससे इस रैकेट के और भी बड़े नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है।

अब तक इस मामले में कमला कुमारी सहित कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह ने कितने लोगों को फर्जी डिग्री उपलब्ध करवाई और क्या अन्य सरकारी भर्तियों में भी इसी तरह के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

यह मामला सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और सख्त दस्तावेज सत्यापन की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तो यह योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन करने के साथ-साथ पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को भी प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल, एसओजी की टीम पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।