19 साल के युवक के पेट में छिपा था चौंकाने वाला राज: सर्जरी के बाद जो निकला, देखकर डॉक्टर भी रह गए हैरान—जानिए पूरी खबर

एक 19 साल के युवक की लंबे समय से चल रही समस्या ने आखिरकार डॉक्टरों को सर्जरी का फैसला लेने पर मजबूर कर दिया। जांच के दौरान कुछ ऐसा संकेत मिला, जिसने पूरे केस को असामान्य बना दिया। ऑपरेशन के बाद जो सामने आया, उसने न सिर्फ डॉक्टरों को चौंका दिया बल्कि इस मामले को बेहद दुर्लभ भी बना दिया। अब युवक की हालत में सुधार है, लेकिन यह पूरा मामला मेडिकल जगत में चर्चा का विषय बन गया है।

Apr 23, 2026 - 13:40
19 साल के युवक के पेट में छिपा था चौंकाने वाला राज: सर्जरी के बाद जो निकला, देखकर डॉक्टर भी रह गए हैरान—जानिए पूरी खबर

जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में मिसाल पेश की है। यहां 19 वर्षीय युवक के पेट से करीब 5 किलोग्राम वजन की तिल्ली (स्प्लीन) निकाली गई, जो सामान्य आकार से कई गुना अधिक थी।

डॉक्टरों का कहना है कि आमतौर पर किसी स्वस्थ व्यक्ति की तिल्ली का वजन 150 से 200 ग्राम के बीच होता है, लेकिन इस मरीज में तिल्ली असामान्य रूप से बढ़कर 5 किलो तक पहुंच गई थी, जो अपने आप में बेहद दुर्लभ मामला है।

जेनेटिक बीमारी ने बढ़ाई परेशानी

युवक Jhalawar का निवासी है और वह Gaucher Disease नामक एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी से पीड़ित था। इस बीमारी में शरीर के अंदर ग्लूकोसेरेब्रोसाइड नाम का वसायुक्त पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे लिवर और तिल्ली का आकार धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।

इसका असर शरीर के ब्लड सिस्टम पर भी पड़ा—युवक के शरीर में खून बनना कम हो गया, हीमोग्लोबिन गिर गया और प्लेटलेट्स खतरनाक स्तर तक नीचे आ गए।

कई शहरों में इलाज, लेकिन नहीं मिला फायदा

परिवार ने युवक का इलाज कोटा, उदयपुर सहित कई शहरों में करवाया, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। हालत बिगड़ती देख अंततः उसे जयपुर के SMS हॉस्पिटल लाया गया, जहां हेमेटोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने विस्तृत जांच की।

कुछ समय तक दवाओं से इलाज करने के बाद डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि अब सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बचा है।

ऑपरेशन से पहले हालत बेहद नाजुक

सर्जरी से पहले मरीज की हालत डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। उसका हीमोग्लोबिन सिर्फ 6 था और प्लेटलेट्स की संख्या लगभग 15 हजार तक सीमित थी, जो सामान्य से काफी कम है।

ऐसी स्थिति में ओपन सर्जरी करना जोखिम भरा था, क्योंकि थोड़ी सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती थी। सबसे बड़ा खतरा अत्यधिक ब्लड लॉस का था।

ढाई घंटे की सर्जरी, टीमवर्क से मिली सफलता

16 अप्रैल को सीनियर सर्जन डॉ. आर.जी. खंडेलवाल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान हर कदम बेहद सावधानी से उठाया गया।

करीब ढाई घंटे चली इस जटिल सर्जरी में आखिरकार 5 किलोग्राम की विशाल तिल्ली को सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया। इस पूरी प्रक्रिया में सर्जन टीम, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ और नर्सिंग स्टाफ का समन्वय बेहद अहम रहा।

सर्जरी के बाद तेजी से हुआ रिकवरी

ऑपरेशन के बाद युवक की हालत में लगातार सुधार देखने को मिला। डॉक्टरों की निगरानी में उसकी रिकवरी अच्छी रही और अब उसे अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है।

आगे की चिकित्सा के लिए उसे Enzyme Replacement Therapy (ERT) लेने की सलाह दी गई है, जिससे इस जेनेटिक बीमारी को नियंत्रित किया जा सके।

क्या है गौशर बीमारी?

Gaucher Disease एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर में फैटी पदार्थ जमा होने लगता है। इसके कारण:

  • तिल्ली और लिवर का असामान्य रूप से बढ़ना
  • खून की कमी (एनीमिया)
  • प्लेटलेट्स की कमी
  • हड्डियों में कमजोरी और दर्द

जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं।

यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

मेडिकल साइंस के लिए बड़ी उपलब्धि

SMS हॉस्पिटल में हुआ यह ऑपरेशन न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे देश के चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इतनी कम प्लेटलेट्स और खराब स्थिति में इतनी बड़ी सर्जरी को सफलतापूर्वक करना डॉक्टरों की विशेषज्ञता और अनुभव को दर्शाता है।

निष्कर्ष

यह मामला इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक चिकित्सा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद से कितनी भी जटिल बीमारी का इलाज संभव है। समय पर सही निर्णय और बेहतर इलाज से एक युवक को नई जिंदगी मिल सकी।