मरीजों की जान से खिलवाड़: बिना डिग्री के स्त्री रोग विशेषज्ञ बनकर कर रहा था इलाज

सिलचर मेडिकल कॉलेज में 23 वर्षीय मीर हुसैन को फर्जी डॉक्टर के रूप में गिरफ्तार किया गया, जो बिना डिग्री के स्त्री रोग विशेषज्ञ बनकर मरीजों का इलाज कर रहा था। अस्पताल प्रशासन और पुलिस ने संदेह के आधार पर कार्रवाई की।

Sep 7, 2025 - 15:04
मरीजों की जान से खिलवाड़: बिना डिग्री के स्त्री रोग विशेषज्ञ बनकर कर रहा था इलाज

असम के सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SMCH) में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां 23 वर्षीय मीर हुसैन अहमद बरभुया को फर्जी डॉक्टर के रूप में गिरफ्तार किया गया है। कटिगोरा के गनीरग्राम पार्ट-2 का निवासी यह युवक 29 अगस्त से अस्पताल के स्त्री रोग विभाग (OPD) में बिना किसी मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज कर रहा था। इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे पकड़ा गया फर्जी डॉक्टर?

सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. भास्कर गुप्ता ने बताया कि मीर हुसैन को प्रतिदिन दोपहर 2 बजे के बाद स्त्री रोग विभाग में देखा जाता था, जहां वह सफेद कोट पहनकर और स्टेथोस्कोप के साथ मरीजों की जांच कर रहा था। अस्पताल के कर्मचारियों को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ, क्योंकि वह किसी भी आधिकारिक रजिस्टर में डॉक्टर के रूप में दर्ज नहीं था। संदेह बढ़ने पर अस्पताल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचित किया।

कछार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नुमल महत्ता ने बताया, "हमें स्थानीय लोगों और अस्पताल कर्मचारियों से शिकायत मिली थी। हमारी टीम ने तुरंत कार्रवाई की और मीर हुसैन को OPD से गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि उसने केवल गनीरग्राम हायर सेकेंडरी स्कूल से मैट्रिक तक की पढ़ाई की है और उसने ऑनलाइन स्टेथोस्कोप खरीदकर खुद को डॉक्टर के रूप में पेश किया।"

मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल

यह घटना सिलचर में इस तरह का दूसरा मामला है। इससे पहले, अगस्त 2025 में, 43 वर्षीय पुलक मालाकार को सिलचर के शिव सुंदरी नारी शिक्षाश्रम अस्पताल में फर्जी डॉक्टर के रूप में गिरफ्तार किया गया था। मालाकार ने कथित तौर पर नकली MBBS डिग्री के आधार पर कई सालों तक मरीजों का इलाज किया था, जिसमें कई सिजेरियन ऑपरेशन भी शामिल थे। इन लगातार घटनाओं ने दक्षिण असम के प्रमुख सरकारी अस्पताल की सुरक्षा और सत्यापन प्रणाली की खामियों को उजागर किया है।

स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, "हम अपनी और अपने परिवार की जान अस्पतालों पर भरोसा करके सौंपते हैं। ऐसे फर्जी डॉक्टरों का पकड़ा जाना डरावना है। यह हमारी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।"

क्या है इसका मकसद?

पुलिस अभी तक मीर हुसैन के इस कृत्य के पीछे के उद्देश्य का पता नहीं लगा पाई है। कुछ लोगों का मानना है कि उसके इरादे अवैध हो सकते हैं, जबकि अन्य का कहना है कि यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा मामला हो सकता है। SSP नुमल महत्ता ने कहा, "हम इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस तरह की गतिविधियों के पीछे कोई बड़ा रैकेट काम कर रहा है।"

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बराक वैली में नकली मेडिकल सर्टिफिकेट बेचने वाला एक संगठित रैकेट हो सकता है, जो भारी रकम के बदले फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराता है। उन्होंने पुलिस को इसकी गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं।

अस्पताल प्रशासन पर सवाल

इस घटना ने सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की प्रशासनिक लापरवाही को सामने लाया है। सवाल यह उठता है कि एक 10वीं पास युवक बिना किसी मेडिकल डिग्री के दो दिनों तक दक्षिण असम के एकमात्र सरकारी मेडिकल कॉलेज में कैसे खुलेआम मरीजों का इलाज करता रहा? अस्पताल के कर्मचारियों और डॉक्टरों को उस पर पहले संदेह क्यों नहीं हुआ?

डॉ. भास्कर गुप्ता ने कहा, "हमने संदिग्ध गतिविधि देखते ही पुलिस को सूचित किया और एक FIR दर्ज की गई है। हम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।"

पुलिस की सख्त कार्रवाई

SSP नुमल महत्ता ने चेतावनी दी है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी निजी और सरकारी अस्पतालों से अपने डॉक्टरों की साख की जांच करने, उचित रजिस्टर बनाए रखने और नियुक्ति से पहले पुलिस सत्यापन कराने का आग्रह किया है।

पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि इस तरह की घटनाओं में अस्पताल के कर्मचारियों की मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस दिशा में भी जांच की जा रही है।

Web Desk Web Desk The Khatak