दहेज की भेंट चढ़ी एक बेटी, खुशबू को जहर देकर मारा भाई की पुकार- 'न्याय दो!'
पाली, राजस्थान में एक दिल दहला देने वाली घटना ने समाज को झकझोर दिया। 32 वर्षीय खुशबू राजपुरोहित, जो टीचर बनने का सपना देखती थी, को उसके ससुराल वालों ने कथित तौर पर जहर देकर मार डाला। शादी के तीन साल बाद, दहेज में कार न लाने और बच्चा न होने के तानों से त्रस्त खुशबू डिप्रेशन में चली गई थी। भाई इंद्रजीत का आरोप है कि ससुराल वालों ने दीपावली से पहले झूठे वादे कर उसे जोधपुर ले गए और जहर दे दिया। परिवार ने शव उठाने से इनकार कर दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है। यह कहानी दहेज की क्रूरता और बेटियों के दर्द को उजागर करती है।
पाली, राजस्थान: एक तरफ दीपावली की रौनक, उधर एक परिवार का पूरा जहां उजड़ गया। शादी के महज तीन साल बाद 32 साल की खुशबू राजपुरोहित की जिंदगी हमेशा के लिए थम गई। ससुराल वालों पर जहर देकर हत्या का गंभीर आरोप लगाते हुए उसके भाई इंद्रजीत ने आंसुओं में कहा, "मेरी बहन को बांझ और कम दहेज लाने का ताना देकर तोड़ा, फिर जहर देकर मार डाला। अगर दोषियों को सख्त सजा न मिली, तो हम उसका शव तक नहीं उठाएंगे।" यह दर्दनाक घटना दहेज लोभ की उस काली सच्चाई को फिर से सामने ला रही है, जहां सपनों की उड़ान जहर की धुंध में खो जाती है।
शादी का सपना जो बना जहर का कलंक
खुशबू का जन्म पाली जिले के धर्मधारी गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। उसके पिता अमर सिंह राजपुरोहित पाली शहर में इलेक्ट्रिक शॉप चलाते हैं। खुशबू ने एमए तक की पढ़ाई की और बीएसटीसी भी पूरी कर ली थी। उसका सबसे बड़ा सपना था टीचर बनना – न सिर्फ अपना घर चलाने में पति की मदद करना, बल्कि उन गरीब बच्चों को पढ़ाना जिनकी आवाज समाज में दबी रह जाती है। मई 2022 में, जब वह 29 साल की थीं, तो खुशबू की शादी पाली जिले के पिलोवनी गांव के हर्षित सिंह से हुई। हर्षित का परिवार जोधपुर में रहता है और उनका जयपुर में सोलर बिजनेस है। शादी के शुरुआती दिन तो सब कुछ फूलों भरी राहों जैसा था। परिवार ने अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार दहेज दिया, लेकिन खुशबू को क्या पता था कि यही दहेज उनके लिए मौत का पैगाम बन जाएगा।
तानों की बौछार: कम दहेज से बांझ तक का सफर
शादी के कुछ महीनों बाद ही रंग बदलने लगे। खुशबू की सास और जेठानी ने कम दहेज लाने के ताने देना शुरू कर दिए। "कार क्यों नहीं दी? इतना कम क्यों दिया?" – ये बातें रोजाना सुनाई देने लगीं। फिर धीरे-धीरे ताने और कटु हो गए। बच्चा न होने पर "बांझ" कहकर अपमानित करना शुरू हो गया। खुशबू, जो कभी हंसमुख और महत्वाकांक्षी लड़की थी, मानसिक और शारीरिक रूप से टूटने लगी। वह गहरे डिप्रेशन में चली गईं। पति हर्षित से गुजारिश करतीं कि "मुझे जयपुर अपने साथ ले चलो, वहां नई जिंदगी शुरू करेंगे," लेकिन हर्षित ने उनकी एक न सुनी। महीने-दो महीने में एक बार जोधपुर आने का बहाना बनाते रहे।इन अपमानों ने खुशबू को इतना तोड़ दिया कि वह अपने टीचर बनने के सपने को भूल गईं। भाई इंद्रजीत बताते हैं, "बहन रातों को रोती रहती। वह कहती, 'भैया, मैं अब जीना नहीं चाहती।' हमने कई बार ससुराल वालों से बात की, लेकिन फोन पर ही झूठे वादे करते रहे।" आखिरकार, कुछ महीने पहले खुशबू को पीहर ले आए। जुलाई 2025 से वह पाली में अपने मायके में ही रह रही थीं।
दीपावली से पहले धोखे का जाल: वादों पर विश्वास, जहर का अंत
16 अक्टूबर 2025 को ससुराल पक्ष के लोग पाली पहुंचे। समाज और परिवार के बुजुर्गों के सामने कसम खाई कि "अब कोई तकलीफ नहीं देंगे, खुशबू को वापस ले लो।" दीपावली का त्योहार नजदीक था, और खुशबू को लगा शायद सब ठीक हो जाएगा। भाई इंद्रजीत ने आखिरी बार विश्वास किया और 16 अक्टूबर को ही उन्हें ससुराल भेज दिया। लेकिन यह विदाई आखिरी साबित हुई।21 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे ससुराल वालों का फोन आया – "खुशबू ने कुछ खा लिया है, तबीयत बिगड़ गई। जल्दी आ जाओ, लेकिन अकेले आना।" इंद्रजीत दौड़े-दौड़े जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल पहुंचे। वहां खुशबू वेंटिलेटर पर थीं, बेहोश। डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर में जहर की मात्रा मिली है। भाई का आरोप है, "ससुराल वाले तब तक उसे हॉस्पिटल नहीं लाए जब तक वह होश में थी। होश में आते तो बयान दे देतीं, सच्चाई खुल जाती। बेहोशी का फायदा उठाकर जहर दिया और देर से लाए।" चार दिनों तक जिंदगी से जूझती रहीं खुशबू, लेकिन शुक्रवार सुबह (25 अक्टूबर 2025) इलाज के दौरान उनकी सांसें थम गईं।
न्याय की गुहार: शव पर अड़ा परिवार, गिरफ्तारी तक इंतजार
खुशबू की मौत के बाद परिवार का गुस्सा फूट पड़ा। भाई इंद्रजीत और परिजनों ने शव को हॉस्पिटल में ही रख दिया। पुलिस पर दबाव डाला कि ससुराल पक्ष के सभी सदस्यों – पति हर्षित सिंह, सास, जेठानी समेत – की गिरफ्तारी हो। "बिना न्याय के अंतिम संस्कार नहीं करेंगे," उन्होंने कहा। इंद्रजीत का गला भर्रा उठा, "मेरी बहन ने कभी किसी का बुरा नहीं सोचा। वह टीचर बनकर दुनिया को रोशन करना चाहती थी, लेकिन दहेज के भेड़ियों ने उसे जहर देकर निगल लिया। सख्त सजा दो, ताकि उसकी आत्मा को शांति मिले।" पुलिस ने दहेज हत्या और जहर देने के आरोप में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जो सच्चाई उजागर करेगी।
एक संदेश जो समाज को झकझोर दे
खुशबू की कहानी सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। दहेज की आग में कितनी बेटियां जल रही हैं? वह टीचर बनने का सपना जो कभी पूरा न हो सका, आज भी उन लाखों लड़कियों के दिलों में धड़कता है जो अपनों के तानों से टूट रही हैं। क्या हमारा समाज कभी इन काले सायों से मुक्त होगा?