"मैं पद छोड़ दूंगा, अगर आरोप साबित हुए..." डोटासरा के निशाने पर किरोड़ी लाल का बड़ा पलटवार

सीकर में कृषि विभाग और बीज व्यापारियों के बीच शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।

Jun 7, 2026 - 08:20
"मैं पद छोड़ दूंगा, अगर आरोप साबित हुए..." डोटासरा के निशाने पर किरोड़ी लाल का बड़ा पलटवार

राजस्थान के सीकर जिले में कृषि विभाग और बीज व्यवसायियों के बीच शुरू हुआ विवाद अब केवल प्रशासनिक जांच या स्थानीय स्तर की तनातनी तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला अब राज्य की राजनीति के केंद्र में आ चुका है। कृषि विभाग की कार्रवाई, व्यापारियों द्वारा लगाए गए रिश्वतखोरी के आरोप, विभागीय कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट और अब कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के तीखे बयान ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना दिया है।

शनिवार को कैबिनेट कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पहली बार इस मामले पर सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कृषि विभाग की टीम का खुलकर बचाव किया और स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी टीम किसानों के हितों की रक्षा के लिए काम कर रही थी। उन्होंने विभागीय कर्मचारियों पर लगाए गए भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नकली बीज माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

मंत्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि यदि उनके विभाग या टीम के खिलाफ भ्रष्टाचार का एक भी आरोप कानूनी और तथ्यात्मक रूप से सिद्ध हो जाता है तो वह उसी क्षण अपने कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि किसानों के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा और नकली बीज कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

दरअसल, पूरा विवाद 4 जून को सीकर जिले के सांवली चौराहे और बीकानेर बाईपास क्षेत्र से शुरू हुआ था। कृषि विभाग के कर्मचारी संदीप कुमार और रजनीश कुमार को खीरे के कथित नकली और अमानक बीजों की री-पैकिंग संबंधी शिकायत मिली थी। इसी सूचना के आधार पर विभागीय टीम विकास सीड्स और बालाजी एग्रो इंडस्ट्रीज के गोदामों की जांच के लिए पहुंची थी।

विभागीय अधिकारियों का आरोप है कि जांच के दौरान कुछ व्यापारियों और उनके समर्थकों ने न केवल जांच कार्य में बाधा पहुंचाई बल्कि कर्मचारियों के साथ अभद्रता और मारपीट भी की। विभाग का दावा है कि कर्मचारियों को जबरन वाहन में बैठाने और अपहरण जैसी कोशिश भी की गई। इस संबंध में सदर थाने में मामला दर्ज कराया गया है।

दूसरी ओर स्थानीय व्यापारियों ने विभागीय टीम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। व्यापारियों का कहना है कि कृषि विभाग के कर्मचारी उन्हें वैध कारोबार बंद कराने की धमकी दे रहे थे और कार्रवाई रोकने के बदले 20 लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे थे। व्यापारियों ने कर्मचारियों पर मानसिक प्रताड़ना और अवैध वसूली का भी आरोप लगाया है। इन आरोपों के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया।

मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने व्यापारियों के आरोपों को सुनियोजित साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि राज्य सरकार किसानों को नकली बीजों से बचाने के लिए अभियान चला रही है और कुछ लोग इस कार्रवाई को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार के आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत प्रस्तुत करता है तो वह जांच का स्वागत करेंगे।

इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार और कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किरोड़ी लाल मीणा का इस्तीफे की चेतावनी देना कोई नई बात नहीं है। वे लंबे समय से अपने बेबाक बयानों और आक्रामक राजनीतिक शैली के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि यदि उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा तो वे मंत्री पद छोड़ देंगे। चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा भी सौंप दिया था, हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री के आग्रह पर उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया था।

किरोड़ी लाल मीणा का राजनीतिक करियर कई ऐसे प्रसंगों से भरा पड़ा है जब उन्होंने जनहित के मुद्दों पर अपनी ही सरकार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। यही कारण है कि सीकर बीज विवाद पर दिया गया उनका ताजा बयान भी राजनीतिक गलियारों में गंभीरता से लिया जा रहा है।

अब पूरे मामले की निगाहें जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। यदि व्यापारियों के आरोपों की पुष्टि होती है तो यह सरकार और कृषि विभाग के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। वहीं यदि विभागीय टीम के आरोप सही पाए जाते हैं तो नकली बीज कारोबार के खिलाफ राज्य स्तर पर और बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है। फिलहाल सीकर का यह विवाद प्रशासनिक जांच से आगे बढ़कर राजस्थान की राजनीति के सबसे चर्चित मुद्दों में शामिल हो चुका है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।