“डैशबोर्ड में छिपी 2 पिस्टल से खुला 4747 गैंग का राज… आखिर कौन है वो मास्टरमाइंड जिसने पूरे भीलवाड़ा में फैला रखा था खौफ?”

डैशबोर्ड की दो पिस्टल ने 4747 गैंग का ऐसा राज खोला, जिसने पूरे सिस्टम को हिला दिया—अब असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने की दौड़ शुरू है।

Apr 29, 2026 - 16:52
“डैशबोर्ड में छिपी 2 पिस्टल से खुला 4747 गैंग का राज… आखिर कौन है वो मास्टरमाइंड जिसने पूरे भीलवाड़ा में फैला रखा था खौफ?”

भीलवाड़ा में अपराध की एक ऐसी परत खुली है, जिसने पुलिस से लेकर आम लोगों तक सभी को चौंका दिया है। एक साधारण सी दिखने वाली कार की तलाशी ने जिस रहस्य को उजागर किया, वह किसी संगठित अंडरवर्ल्ड नेटवर्क की कहानी से कम नहीं था।

 शुरुआत: एक साधारण चेकिंग से बड़ा खुलासा

22 मार्च की सुबह पुर थाना पुलिस और DST टीम नियमित गश्त पर थी। एक संदिग्ध कार को रोककर जब तलाशी ली गई तो डैशबोर्ड के भीतर से दो पिस्टल और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए। यह बरामदगी शुरू में एक सामान्य अवैध हथियार केस लग रही थी, लेकिन आगे की जांच ने पूरी कहानी बदल दी।

कार में मौजूद व्यक्ति कैलाश चंद्र जाट से जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने एक और नाम बताया—हेमराज गुर्जर। यहीं से पुलिस को एक संगठित नेटवर्क के सुराग मिलने लगे।

 कड़ियों से जुड़ता हुआ “4747” नेटवर्क

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को एक रहस्यमयी कोड वर्ड “4747” का पता चला। यह सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि एक संगठित गैंग की पहचान बन चुका था, जो अवैध हथियारों की सप्लाई और आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने में सक्रिय था।

इस नेटवर्क की जड़ें जब खोदी गईं तो नाम सामने आया—पुरण गुर्जर।

कौन है पुरण गुर्जर?

32 वर्षीय पुरण गुर्जर, नागा का बाडिया का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उस पर 23 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या के प्रयास, लूट और अवैध हथियारों की तस्करी जैसे संगीन अपराध शामिल हैं।

पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था।

पुलिस की रणनीति और बड़ी सफलता

भीलवाड़ा पुलिस की पुर थाना टीम और DST यूनिट ने बेहद रणनीतिक तरीके से इस पूरे नेटवर्क को ट्रेस किया। एएसपी बुद्धराज खटीक और एसपी धर्मेंद्र सिंह के नेतृत्व में की गई कार्रवाई ने गैंग की सप्लाई चेन को कमजोर कर दिया।

पूछताछ के दौरान कई ऐसे लिंक सामने आए, जो इस गैंग के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहे हैं।

 अभी भी अधूरी है कहानी

हालांकि मुख्य आरोपी पुरण गुर्जर अब पुलिस की गिरफ्त में है, लेकिन जांच यहीं खत्म नहीं हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि:

4747 गैंग के अन्य सदस्य कौन हैं

हथियारों की सप्लाई कहाँ से हो रही थी

और क्या इस नेटवर्क के तार दूसरे राज्यों तक जुड़े हैं

 सबसे बड़ा सवाल

क्या पुरण गुर्जर की गिरफ्तारी के बाद 4747 गैंग पूरी तरह खत्म हो जाएगा, या यह सिर्फ एक बड़े अपराध साम्राज्य की शुरुआत है जो अभी और राज खोलेगा?

भीलवाड़ा की यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है—अभी तो सिर्फ एक दरवाज़ा खुला है।

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