आधी रात का “फैसला”… अंधेरे में रची गई ऐसी साजिश जिसने प्रशासन को भी हिला दिया, 5 और 8 साल की बच्चियों के नाम सामने आते ही मचा हड़कंप
जमवारामगढ़ में आधी रात एक गुप्त योजना सामने आई, जिसमें 5 और 8 साल की बच्चियों से जुड़ा मामला प्रशासन के एक्शन की वजह बन गया।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जिस उम्र में हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, वहां उन हाथों में शादी का जोड़ा सजाया जा रहा हो? क्या आप यकीन कर पाएंगे कि अंधेरे की आड़ में एक ऐसा खेल खेला जा रहा था, जिसमें बचपन को हमेशा के लिए जिम्मेदारियों की बेड़ियों में जकड़ने की तैयारी थी?
राजस्थान के जयपुर जिले के जमवारामगढ़ में मंगलवार की आधी रात कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया।
चारों तरफ सन्नाटा था, गांव नींद में डूबा हुआ था, लेकिन एक घर के अंदर हलचल तेज थी। न कोई ढोल था, न कोई बारात का शोर… सिर्फ एक जल्दबाजी थी, एक डर था—और एक कोशिश थी कि सब कुछ चुपचाप निपटा दिया जाए।
5 और 8 साल की बच्चियों की शादी की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, घर के अंदर दो मासूम बच्चियों—जिनकी उम्र मात्र 5 और 8 साल बताई जा रही है—को दुल्हन बनाने की तैयारी की जा रही थी। उनके हाथों में मेहंदी रचाने की योजना थी, जैसे किसी खेल की तरह उनकी जिंदगी को एक रस्म में बदल दिया जा रहा हो।
और इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि दूल्हे भी कोई बड़े नहीं थे—महज 9 और 11 साल के बच्चे।
यह कोई सामान्य पारिवारिक रस्म नहीं थी, बल्कि एक ऐसी कोशिश थी जिसे जल्दबाजी में, आधी रात के अंधेरे में पूरा करने की योजना बनाई गई थी, ताकि प्रशासन की नजर से बचा जा सके।
सूचना ने बदली पूरी कहानी
इसी बीच इस पूरे मामले की जानकारी ‘प्रयास’ संस्था तक पहुंची। सूचना मिलते ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सक्रिय हो गया। मामला गंभीर था और समय बेहद कम।
स्थिति ऐसी थी कि संबंधित मजिस्ट्रेट छुट्टी पर थे, लेकिन कानून को रुकना मंजूर नहीं था। ऐसे में लिंक मजिस्ट्रेट हुमा कौहरी ने अपने घर पर ही अदालत लगाकर तुरंत बाल विवाह निषेध आदेश जारी कर दिया।
रात के सन्नाटे में प्रशासन की एंट्री
आदेश जारी होते ही प्रशासन और पुलिस की टीम सरजौली गांव पहुंची। रात का समय था, लेकिन कार्रवाई बेहद तेज और सटीक थी।
जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, वहां का माहौल साफ कर रहा था कि कुछ छिपाया जा रहा है। जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि नाबालिग बच्चों की शादी की तैयारी चल रही थी।
तुरंत रुकवाई गई शादी, बच्चों का रेस्क्यू
प्रशासन ने बिना किसी देरी के बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई शुरू की। परिजनों को मौके पर ही पाबंद किया गया और कड़ी कानूनी चेतावनी दी गई।
दोनों बच्चियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के हवाले कर दिया गया। फिलहाल दोनों मासूम सुरक्षित बालिका गृह में हैं, जहां उनकी देखभाल की जा रही है।
सख्त संदेश: अब नहीं चलेगा बचपन से खिलवाड़
प्रशासन ने साफ कहा है कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर भविष्य में ऐसी कोई कोशिश दोबारा होती है, तो दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सवाल जो रह जाता है…
यह घटना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल है—क्या हम सच में आगे बढ़ चुके हैं, या आज भी कुछ जगहों पर बचपन को परंपराओं के नाम पर कुचल दिया जाता है?
फिलहाल, प्रशासन की समय पर की गई कार्रवाई ने दो मासूम जिंदगियों को एक अनहोनी से बचा लिया है।