भरतपुर: टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में हुआ बुजुर्ग का अंतिम संस्कार, श्मशान घाट की बदहाली आई सामने

भरतपुर के काली बगीची श्मशान घाट में बिजली व्यवस्था न होने से 92 वर्षीय बुजुर्ग का अंतिम संस्कार टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में करना पड़ा। घने अंधेरे के कारण परिजनों को भारी परेशानी हुई।

Dec 3, 2025 - 12:47
भरतपुर: टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में हुआ बुजुर्ग का अंतिम संस्कार, श्मशान घाट की बदहाली आई सामने

भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर शहर के काली बगीची स्थित श्मशान घाट की बदहाली एक बार फिर सुर्खियों में है। बुधवार देर रात एक 92 वर्षीय बुजुर्ग जगदीश प्रसाद का अंतिम संस्कार टॉर्च और मोबाइल फोन की रोशनी में करना पड़ा, क्योंकि पूरे श्मशान परिसर में एक भी बल्ब नहीं जल रहा था। घने अंधेरे के बीच परिजनों को न केवल लकड़ियाँ इकट्ठा करने में दिक्कत हुई, बल्कि अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया ही रोशनी के अभाव में मुश्किल से पूरी हो सकी।मृतक के भतीजे लोकेश शर्मा (निवासी मोरी चार बाग) ने बताया कि उनके ताऊजी जगदीश प्रसाद लंबे समय से बीमार थे और बुधवार को उनका निधन हो गया।

 रात करीब 9 बजे शव को अंतिम संस्कार के लिए काली बगीची श्मशान घाट लाया गया। लेकिन जैसे ही परिजन वहाँ पहुँचे, चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा नजर आया। श्मशान के अंदर कोई स्ट्रीट लाइट नहीं, कोई ट्यूबलाइट नहीं, यहाँ तक कि चिता स्थल के पास भी एक भी बल्ब नहीं था।लोकेश ने बताया, “अंधेरा इतना था कि लकड़ियाँ तक ढंग से नहीं दिख रही थीं।

हमें घर से टॉर्च मंगवानी पड़ी और सभी परिजनों ने अपने-अपने मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर किसी तरह सामान इकट्ठा किया। चिता तैयार करने से लेकर अग्नि देने तक सब कुछ टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में ही करना पड़ा। इतनी मुश्किल स्थिति में भी हम मजबूर थे, क्योंकि रात का समय था और दूसरा कोई श्मशान घाट पास में नहीं है।”

सालों से नहीं सुधरी व्यवस्था स्थानीय लोगों का कहना है कि काली बगीची श्मशान घाट की यह हालत पिछले कई सालों से है। बिजली के खंभे तो लगे हैं, लेकिन उनमें बल्ब या ट्यूबलाइट कभी लगाए ही नहीं गए। बरसात के दिनों में कीचड़ और पानी जमा हो जाता है, जिससे चलना भी मुश्किल हो जाता है। शेड और बैठने की उचित व्यवस्था भी नहीं है।नगर निगम के जिम्मेदारों पर लोग आरोप लगाते हैं कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जाता। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “अंतिम संस्कार जैसे पवित्र और दुखद कार्य के लिए भी अगर लोगों को टॉर्च लेकर आना पड़े, तो इससे बड़ी शर्मनाक बात और क्या हो सकती है?”

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.