बेटे की हत्या और बेटियों को कुएं में फेंकने वाले पिता को उम्रकैद, कोर्ट ने कहा — समाज को झकझोर देने वाला अपराध...
अजमेर में अपने 4 साल के बेटे की हत्या और दो नाबालिग बेटियों को कुएं में फेंककर मारने की कोशिश करने वाले पिता को अदालत ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (संख्या-4) ने आरोपी को हत्या के मामले में उम्रकैद और हत्या के प्रयास में 10 साल की सजा दी। अदालत ने आर्थिक दंड भी लगाया और पीड़ित परिवार को राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत मुआवजा देने की अनुशंसा की। मामले में 25 गवाहों और 26 दस्तावेजों के आधार पर आरोप सिद्ध हुए।
अजमेर। राजस्थान के अजमेर जिले में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाले सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी पिता को आजीवन कारावास की सजा दी है। अपने ही चार साल के मासूम बेटे की हत्या और दो नाबालिग बेटियों की हत्या की कोशिश के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (संख्या-4) ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए लंबी सजा और आर्थिक दंड भी लगाया है।
अदालत ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए कहा कि यह अपराध केवल एक हत्या नहीं, बल्कि पिता द्वारा अपनी ही संतानों के जीवन पर किया गया क्रूर हमला है, जिसने समाज को अंदर तक झकझोर दिया।
अदालत का फैसला और सजा
अपर लोक अभियोजक गुलाम नजमी फारूकी के अनुसार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रितु मीणा ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए आरोपी विजयसिंह रावत को—
बेटे की हत्या के मामले में आजीवन कारावास
दोनों बेटियों की हत्या के प्रयास के अपराध में 10 वर्ष का कठोर कारावास
हत्या मामले में 20 हजार रुपये और हत्या के प्रयास में 10 हजार रुपये का अर्थदंड
से दंडित किया।
साथ ही अदालत ने पीड़ित परिवार को राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना-2011 के तहत मुआवजा देने की अनुशंसा भी की।
साक्ष्यों और गवाहों ने तय की सजा
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश किए। कुल—
25 गवाहों की गवाही
26 दस्तावेजी सबूत
न्यायालय के सामने प्रस्तुत किए गए।
पुलिस अधिकारियों ने केस ऑफिसर स्कीम के तहत गवाहों की समय पर पेशी सुनिश्चित की, जिससे मुकदमे की सुनवाई प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकी। अदालत ने विशेष रूप से दोनों नाबालिग बेटियों की गवाही को विश्वसनीय और निर्णायक माना, जिसने आरोप सिद्ध करने में अहम भूमिका निभाई।
कैसे रची गई थी वारदात
जांच के अनुसार, 7 जुलाई 2023 को आरोपी पिता बच्चों को स्कूल से घर लाने के दौरान घुमाने के बहाने खेत पर स्थित एक कुएं के पास ले गया। वहां उसने तीनों बच्चों को कुएं में डालने की कोशिश की।
घटना के दौरान—
एक बेटी हाथ छुड़ाकर मौके से भाग निकली,
दूसरी बेटी कुएं में गिरने के बाद साहस दिखाकर बाहर निकलने में सफल रही,
लेकिन चार साल का मासूम बेटा डूब गया और उसकी मौत हो गई।
इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।
पुलिस कार्रवाई और जांच
घटना के बाद मृतक बच्चे के नाना भंवरसिंह रावत ने गंज थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने तुरंत हत्या और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर जांच शुरू की और साक्ष्य जुटाने के बाद अदालत में चालान पेश किया।
जांच के दौरान पुलिस उप अधीक्षक दरगाह लक्ष्मणराम भाकर, गंज थानाधिकारी महावीरसिंह राठौड़ और हेड कांस्टेबल हनुमान प्रसाद की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अदालत की कड़ी टिप्पणी
फैसले में न्यायालय ने कहा कि बच्चों के खिलाफ इस प्रकार का अपराध अत्यंत गंभीर है और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए। अदालत ने बाल साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों को भरोसेमंद मानते हुए अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार किया।
यह मामला न केवल एक आपराधिक घटना बल्कि पारिवारिक रिश्तों के टूटते विश्वास की भयावह मिसाल बनकर सामने आया, जिसमें न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषी को कड़ी सजा सुनाई।