बाड़मेर के उड़ासर गांव में जेसीबी से खेजड़ी-बबूल के पेड़ काटे गए, पर्यावरणप्रेमियों ने किया जोरदार विरोध
बाड़मेर जिले के उड़ासर गांव में नगाराम के खेत पर जेसीबी मशीन से खेजड़ी और बबूल के 8-9 पेड़ काट दिए गए। पर्यावरणप्रेमियों ने मौके पर पहुंचकर विरोध किया और जेसीबी रोक दी। खेत मालिक ने गलती बताते हुए माफी मांगी, लेकिन लोगों ने बिना अनुमति हरे पेड़ों की कटाई को नियमों का उल्लंघन बताया। जेसीबी ड्राइवर मौके से भाग गया। पुलिस और पटवारी ने मौका फर्द तैयार किया। यह घटना खेजड़ी बचाओ आंदोलन के बीच सामने आई है, जिसमें राजस्थान सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद कटाई के मामले जारी हैं।
बाड़मेर जिले के उड़ासर गांव में शनिवार शाम एक विवादास्पद घटना सामने आई है, जिसमें जेसीबी मशीन की मदद से खेजड़ी और बबूल के पेड़ काटे गए। इस कटाई पर स्थानीय पर्यावरणप्रेमियों ने तुरंत विरोध जताया और जेसीबी को रोक दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और पटवारी मौके पर पहुंचे, लेकिन जेसीबी ड्राइवर मौके से फरार हो गया।
घटना का विवरण
उड़ासर गांव निवासी नगाराम के खेत में जेसीबी मशीन से खेत साफ करने का काम चल रहा था। इस दौरान बबूल और खेजड़ी के 4-5 पेड़ काट दिए गए। पर्यावरणप्रेमी जब वहां से गुजर रहे थे, तो उन्होंने खेजड़ी के पेड़ कटते देख लिए। उन्होंने तुरंत जेसीबी को रुकवाया और विरोध शुरू कर दिया। कुछ देर में और पर्यावरणप्रेमी भी वहां पहुंच गए।
लोगों का आरोप है कि कुल 8-9 पेड़ (खेजड़ी और बबूल) काटे गए। उन्होंने इसे बिना अनुमति की हरे पेड़ों की अवैध कटाई बताया और नियमों का उल्लंघन करार दिया।
खेत मालिक का पक्ष
खेत मालिक नगाराम ने पुलिस को बताया कि वे खेत को साफ करवा रहे थे। जेसीबी ड्राइवर ने गलती से ये पेड़ काट दिए। उन्होंने इस गलती के लिए माफी भी मांग ली। हालांकि, पर्यावरणप्रेमियों ने इसे गलती मानने से इनकार कर दिया और कहा कि बिना वन विभाग या प्रशासन की अनुमति के हरे पेड़ काटना कानूनी उल्लंघन है।
प्रशासन की कार्रवाई
सदर थाने से एसआई बगडूराम और पटवारी प्रमिला मौके पर पहुंचीं। पटवारी ने मौका फर्द (स्थान रिपोर्ट) तैयार की। सनावड़ा चौकी प्रभारी भी घटनास्थल पर आए। फिलहाल ड्राइवर फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।
खेजड़ी का महत्व और पृष्ठभूमि
खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है, जिसे पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पेड़ रेगिस्तानी इलाकों में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखता है, छाया देता है और पशुओं के लिए चारा प्रदान करता है। 1961 से ही खेजड़ी की कटाई पर प्रतिबंध है। हाल ही में पर्यावरणप्रेमियों के बीकानेर मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन और अनशन के बाद राजस्थान सरकार ने खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
इसके बावजूद बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर और फलोदी जैसे जिलों में खेजड़ी की कटाई के मामले बार-बार सामने आ रहे हैं। कई मामलों में सोलर प्लांट प्रोजेक्ट्स को लेकर बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाने की शिकायतें हैं, जिससे पर्यावरणप्रेमी और बिश्नोई समुदाय में गहरा आक्रोश है।
पर्यावरणप्रेमियों की प्रतिक्रिया
पर्यावरणप्रेमियों ने कहा कि “बिना अनुमति हरे पेड़ों की कटाई नियमों का सीधा उल्लंघन है।” उन्होंने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं। वे खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत लगातार सतर्क रह रहे हैं और किसी भी अवैध कटाई पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं।