दो सहेलियों की अनोखी दोस्ती: एक चिता पर हुआ अंतिम संस्कार, मौत के बाद भी नहीं टूटी रिश्ते की डोर
पाली जिले के तखतगढ़ में दो दशकों पुरानी सहेलियों जेठी बाई और भीकी बाई की दोस्ती ने मौत के बाद भी एक अनोखा उदाहरण पेश किया। एक की मौत की खबर मिलने के महज 5 घंटे बाद दूसरी सहेली भी सदमे से दम तोड़ गई। दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया, जिसने पूरे कस्बे को भावुक कर दिया।
पाली जिले के तखतगढ़ में दो दशकों से ज्यादा पुरानी दोस्ती की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली है, जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। दो सहेलियाँ — जेठी बाई और भीकी बाई — जीवन भर साथ रहीं और मौत के बाद भी साथ ही चली गईं। एक की मौत की खबर मिलने के महज 5 घंटे बाद दूसरी ने भी दम तोड़ दिया। अंत में दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।
घटना का विवरण
4 अप्रैल 2026 को तखतगढ़ के नागचौक इलाके में देवासियों की गली में रहने वाली जेठी बाई (पत्नी स्व. मालाराम कलबी) की तबीयत अचानक बिगड़ गई। रात को उनका निधन हो गया। अगले दिन यानी 5 अप्रैल की सुबह जब उनकी लंबे समय से सहेली भीकी बाई (पत्नी स्व. भूराराम कलबी) को यह दुखद खबर पहुंची, तो वे गहरे सदमे में चली गईं।
सदमा इतना गहरा था कि भीकी बाई उसी सुबह करीब 8 बजे इस दुनिया को अलविदा कह गईं। महज 5 घंटे के अंतराल में दोनों सहेलियों का जाना पूरे कस्बे के लिए सदमे भरा था।
परिवार और मोहल्ले का फैसला
खबर फैलते ही पूरे मोहल्ले में मातम छा गया। दोनों परिवारों ने मिलकर फैसला लिया कि जो जीवन भर साथ रही, उनकी विदाई भी साथ ही होनी चाहिए। दोपहर में गोगरा रोड स्थित श्मशान घाट पर एक दुर्लभ और भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। दोनों सहेलियों की अर्थियां एक साथ उठाई गईं और एक ही चिता पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
श्मशान घाट पर सैकड़ों लोग मौजूद थे। कई लोगों की आंखें नम हो गईं जब दोनों दोस्तों को एक साथ अग्नि को सौंपा गया।
दोस्ती की गहराई
मोहल्ले के लोग बताते हैं कि जेठी बाई और भीकी बाई की दोस्ती दशकों पुरानी थी। दोनों अक्सर हंसी-मजाक में कहती थीं — “अगर हममें से कोई पहले चली गई, तो दूसरी को भी अपने साथ लेकर जाना।” नियति ने उनकी इस हंसी-मजाक को सच कर दिखाया।
भीकी बाई के बेटे हंसाराम ने बताया कि दो दिन पहले उनकी मां के पैर में दर्द था, लेकिन जैसे ही उन्हें जेठी बाई के निधन की सूचना मिली, वे यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाईं। उनकी दोस्ती पूरे मोहल्ले में मशहूर थी।
संयोग की बात
यह संयोग सिर्फ इन दो महिलाओं तक सीमित नहीं था। उनके पति स्व. मालाराम कलबी और स्व. भूराराम कलबी भी आपस में गहरी दोस्ती रखते थे। दोनों परिवारों के रिश्ते बहुत पुराने थे। जेठी बाई का पीहर जालोर जिले के आहोर क्षेत्र (हरजी और थुम्बा गांव) में था। भीकी बाई के पीहर भी उसी इलाके का था।
जेठी बाई के बेटे का पहले ही निधन हो चुका था, जबकि उनके पोते बाहर से आए थे। भीकी बाई अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।
पहले भी देखा गया ऐसा मामला
इलाके के लोग इसे संयोग मान रहे हैं। इसी साल जनवरी 2026 में सीकर जिले के घसीपुरा में भी देवरानी-जेठानी की मौत के बाद एक ही चिता पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था। तखतगढ़ की यह घटना अब पूरे कस्बे में चर्चा का विषय बनी हुई है।
दोस्ती की सच्ची मिसाल
जेठी बाई और भीकी बाई की कहानी साबित करती है कि सच्ची दोस्ती सिर्फ जीवन तक ही सीमित नहीं होती। कभी-कभी वह मौत के पार भी चली जाती है। दोनों सहेलियों ने अपनी दोस्ती को मौत के बाद भी जिंदा रखा और एक ही चिता पर विदाई लेकर चली गईं।