बाड़मेर के तृतीय श्रेणी शिक्षकों का स्थायीकरण 4 महीने से अटका: प्रोबेशन पूरा होने के बावजूद 70% वेतन कटौती, मानसिक-आर्थिक संकट
बाड़मेर जिले के करीब 2000 तृतीय श्रेणी शिक्षकों का स्थायीकरण 4 महीने से अटका! सितंबर 2025 में प्रोबेशन पूरा होने के बावजूद पूर्ण वेतन नहीं मिल रहा, 70% कटौती से आर्थिक-मानसिक संकट। अन्य जिलों में हो गया, यहां DEO ने आदेश जारी कर तुरंत वापस ले लिया। अशोक गहलोत ने CM से मांग की तुरंत न्याय! शिक्षक संघ प्रदर्शनरत, न्याय कब?
जोधपुर/बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर जिले में अध्यापक भर्ती 2022 (चयन 2023) से नियुक्त तृतीय श्रेणी शिक्षकों की समस्या गंभीर रूप ले रही है। इन शिक्षकों ने सितंबर 2023 में नियुक्ति प्राप्त की थी और राजस्थान सरकार के नियमों के अनुसार 2 वर्ष की प्रोबेशन अवधि पूर्ण कर 28-30 सितंबर 2025 को स्थायीकरण (confirmation/regularization) के हकदार हो गए थे। नियमों के मुताबिक अक्टूबर 2025 के पहले सप्ताह तक उनका वेतन नियमितीकरण सहित स्थायीकरण आदेश जारी हो जाना चाहिए था, लेकिन जनवरी 2026 तक चार महीने बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
इस देरी के कारण शिक्षकों को केवल प्रोबेशन काल का फिक्स मानदेय (लगभग 23,700 रुपये) मिल रहा है, जबकि स्थायीकरण के बाद उन्हें पूर्ण वेतन (लगभग 42,000 रुपये से अधिक, भत्तों सहित) मिलना चाहिए। इससे उन्हें लगभग 70% वेतन की कटौती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक तंगी के साथ मानसिक परेशानियां भी बढ़ गई हैं। शिक्षकों का कहना है कि परिवार की जिम्मेदारियां, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।
शिक्षकों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में बाड़मेर के DEO (जिला शिक्षा अधिकारी) ने स्थायीकरण आदेश जारी किया था, लेकिन महज एक घंटे बाद ही इसे प्रत्याहृत (withdrawn) कर लिया गया। इसके पीछे कुछ रिपोर्ट्स में SOG जांच (Special Operations Group inquiry) का जिक्र है, जिसके कारण आदेश रद्द हुआ। DEO, कलेक्टर, जिला प्रमुख आदि से कई बार मुलाकात और ज्ञापन देने के बावजूद कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।
पूरे राजस्थान में अन्य जिलों (जैसे जयपुर, चूरू आदि) के इसी भर्ती से चयनित तृतीय श्रेणी शिक्षकों का स्थायीकरण हो चुका है और वे पूर्ण वेतन का लाभ ले रहे हैं। यहां तक कि द्वितीय श्रेणी अध्यापकों का भी प्रोबेशन पूरा होने के महज चार दिनों में स्थायीकरण हो गया। लेकिन बाड़मेर जिले के लगभग 2000 शिक्षक ही इस समस्या से जूझ रहे हैं, जिसे वे भेदभाव और सरासर अन्याय मान रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस मुद्दे को उठाया है और सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस सरकार के दौरान निकाली गई REET भर्ती से बाड़मेर में पदस्थापित शिक्षकों के साथ भेदभाव हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
शिक्षक संघों ने भी प्रदर्शन और ज्ञापन दिए हैं। राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के बैनर तले बाड़मेर में जोरदार प्रदर्शन हुए हैं। शिक्षकों का कहना है कि प्रोबेशन सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद भी देरी उनके हक का हनन है। राजस्थान सेवा नियमों के अनुसार प्रोबेशन के 2 वर्ष पूर्ण होने पर शाला दर्पण पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर स्थायीकरण होता है, लेकिन यहां प्रक्रिया रुकी हुई है।