बाड़मेर: दो सगी नाबालिग बहनों के साथ देह शोषण मामले में आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा
राजस्थान के बाड़मेर जिले में पॉक्सो कोर्ट बालोतरा ने दो नाबालिग सगी बहनों के साथ लंबे समय तक दुष्कर्म और देह शोषण के मामले में दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह जिले का पहला ऐसा फैसला है, जिसमें 'मरने तक जेल' की सजा दी गई। आरोपियों पर 20-20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया और पीड़िताओं को 5-5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया। मामला 2020 का है, जहां शादी का झांसा देकर शोषण किया गया था।
राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक सनसनीखेज मामले में पॉक्सो कोर्ट बालोतरा ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने दो आरोपियों को नाबालिग सगी बहनों के साथ लंबे समय तक देह शोषण और दुष्कर्म के आरोप में आजीवन कारावास (जिंदगी भर जेल में रहने) की सजा सुनाई है। यह बाड़मेर जिले का पहला ऐसा मामला है, जिसमें पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत आरोपियों को 'मरने तक जेल' की सजा दी गई है। साथ ही, दोनों आरोपियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की रकम नहीं चुकाने पर अतिरिक्त 6 महीने की सजा भुगतनी होगी।
मामला कब और कैसे सामने आया? यह मामला जून 2020 का है। 2 जून 2020 को एक पिता अपनी दो नाबालिग बेटियों के साथ बाड़मेर के महिला थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उनकी तीन बेटियां हैं, जिनमें से दो बेटियां (उस समय कक्षा 7 में पढ़ने वाली) एक युवक द्वारा लगातार पीछा करने, अश्लील टिप्पणियां करने और इशारे करने से परेशान थीं। परिजनों ने बेटियों की सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें स्कूल भेजना बंद कर दिया, लेकिन आरोपी का पीछा करना नहीं रुका। आखिरकार, 1 जून 2020 को एक पीड़िता ने अपनी मां को बताया कि आरोपी युवक ने शादी का झांसा देकर करीब एक साल तक उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया। आरोपी उसे अपने घर ले जाकर शोषण करता था और संपर्क में रहने के लिए एक मोबाइल फोन भी दिया था, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया।दूसरी बहन के साथ भी इसी तरह का शोषण हुआ था। मामले में दो आरोपी शामिल थे, जो लंबे समय तक पीड़िताओं को बहला-फुसलाकर शोषण करते रहे।
पुलिस जांच और कोर्ट की कार्यवाही शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज किया और दोनों पीड़िताओं का मेडिकल परीक्षण करवाया। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) के लिए सैंपल भेजे गए। जांच में अपराध की पुष्टि होने पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।मामले की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट बालोतरा में चली, जहां विशिष्ट न्यायाधीश राजेंद्र बंशीवाल ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। पीड़ित पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक रमेश कच्छवाहा और वरिष्ठ अधिवक्ता करनाराम चौधरी ने मजबूत पैरवी की, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया।यह फैसला घटना के साढ़े 5 साल बाद आया है, जो पीड़ित परिवार के लिए लंबी न्यायिक लड़ाई का अंत है।
कोर्ट के आदेश: सजा के साथ मुआवजा भीसजा: दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास (प्राकृतिक मृत्यु तक जेल)। जुर्माना: प्रत्येक आरोपी पर 20,000 रुपये का आर्थिक दंड। न चुकाने पर 6 महीने अतिरिक्त कठोर कारावास। पीड़िताओं को क्षतिपूर्ति: अदालत ने दोनों पीड़िताओं को 5-5 लाख रुपये मुआवजे के आदेश दिए। इसमें से 2 लाख रुपये प्रत्येक को दो साल की अवधि के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (सावधि जमा) के रूप में रखे जाएंगे। शेष 3 लाख रुपये प्रत्येक पीड़िता के बचत खाते में जमा किए जाएंगे। यह मुआवजा पीड़िताओं के पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।