बाड़मेर के झाक मठ में मठाधीश महंत पारसनाथ महाराज का शव टांके में मिला: इलाके में शोक की लहर, पुलिस जांच में जुटी
बाड़मेर जिले के झाक गांव स्थित झाक मठ के मठाधीश महंत पारसनाथ महाराज (57) का शव मठ के टांके में मिला। 30 वर्षों से मठाधीश रहे महंत जी गौसेवा और समाज सेवा के लिए प्रसिद्ध थे। भक्तों में शोक की लहर, पुलिस आत्महत्या या दुर्घटना के एंगल से जांच कर रही है। फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची।
बाड़मेर जिले के झाक गांव स्थित प्रसिद्ध झाक मठ में एक दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। मठ के मठाधीश महंत पारसनाथ महाराज (उम्र 57 वर्ष) का शव मठ परिसर में बने टांके (टैंक या कुएं) में मिला है। यह घटना गुरुवार सुबह लगभग 5 बजे की बताई जा रही है, जब भक्त टांके से पानी खींच रहे थे। अचानक शव दिखाई देने पर आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया और तुरंत सूचना दी गई।
घटना की जानकारी मिलते ही बाटाडू पुलिस चौकी के इंचार्ज अनोपाराम और नागाणा थाना के सीआई अशोक कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल मौका मुआयना शुरू किया और आसपास के लोगों से पूछताछ की। महंत महाराज के परिजनों को भी सूचना दे दी गई है। जांच के लिए एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) और एमओबी टीमों को बुलाया गया है। मौके पर महंत के जूते टांके के बाहर पड़े मिले हैं, जिससे पुलिस विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को संकेत मिले हैं कि यह आत्महत्या (सुसाइड) का मामला हो सकता है। बाड़मेर एसपी नरेंद्र सिंह मीना के अनुसार, महंत महाराज को मानसिक बीमारी का इलाज चल रहा था। हालांकि, पुलिस हर संभावित एंगल जैसे दुर्घटना (पैर फिसलना) या अन्य कारणों की भी गहन जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
महंत पारसनाथ महाराज का योगदान और श्रद्धा
स्थानीय ग्रामीणों और भक्तों के अनुसार, महंत पारसनाथ महाराज पिछले 30 वर्षों से झाक मठ के मठाधीश थे। उन्होंने मठ के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से गौशाला के निर्माण और संचालन में उनका बड़ा योगदान रहा है। गौसेवा, धर्म प्रचार और समाज सेवा के क्षेत्र में उन्होंने निरंतर कार्य किया, जिसके कारण क्षेत्र के लोग उन्हें अत्यधिक श्रद्धा और सम्मान की दृष्टि से देखते थे। उनके निधन की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में भक्त मठ पर पहुंचे और शोक व्यक्त किया। पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।