बाड़मेर की होटलों का वेस्टेज शहर को कर रहा है गंदा, गौवंश के लिए खतरा
बाड़मेर में होटलों का वेस्टेज और पॉलिथीन कचरा शहर को गंदा कर रहा है तथा गोवंश के लिए जानलेवा साबित हो रहा है; प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग।
बाड़मेर, 5 नवंबर 2025:
राजस्थान के बाड़मेर शहर में होटलों से निकलने वाला भारी मात्रा में वेस्टेज अब शहर की सफाई और गोवंश की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। शहर की प्रमुख होटलों और रेस्टोरेंट्स से रोजाना टनों कचरा सड़कों, खुले मैदानों और कचरा संग्रहण स्थलों पर फेंका जा रहा है, जिसमें खाने की बर्बाद हुई सामग्री के साथ-साथ प्लास्टिक की पॉलिथीन और अन्य गैर-जैविक कचरा शामिल है। इससे न केवल शहर की सुंदरता और स्वच्छता प्रभावित हो रही है, बल्कि आवारा गोवंश के लिए यह जानलेवा साबित हो रहा है। स्थानीय निवासियों और पशु प्रेमियों ने इस मुद्दे पर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
होटलों का वेस्टेज: शहर की गंदगी का मुख्य स्रोत बाड़मेर शहर, जो पर्यटन और व्यापार के लिए जाना जाता है, में दर्जनों बड़ी-बड़ी होटलें और रेस्टोरेंट्स हैं। इनमें से कई होटलें शादियों, पार्टियों और पर्यटकों की मेजबानी करती हैं, जिससे प्रतिदिन सैकड़ों किलोग्राम खाने की बर्बादी होती है। सब्जियां, रोटियां, चावल, मांसाहारी व्यंजन और अन्य खाद्य पदार्थ जो बचे रह जाते हैं, उन्हें होटल मालिक और कर्मचारी सीधे कचरे के ढेर में फेंक देते हैं। इसके अलावा, पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली पॉलिथीन बैग्स, प्लास्टिक की बोतलें और डिस्पोजेबल प्लेटें भी इसी कचरे में मिल जाती हैं। शहर के कई इलाकों जैसे स्टेशन रोड, गांधी चौक और इंडस्ट्रियल एरिया में यह समस्या सबसे गंभीर है। गर्मियों में तो बदबू से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है, जिससे पर्यटकों की संख्या पर भी असर पड़ रहा है।
गोवंश के लिए जानलेवा खतरा; बाड़मेर में सैकड़ों आवारा गायें, बैल और बछड़े सड़कों पर घूमते रहते हैं। ये गोवंश भोजन की तलाश में कचरे के ढेर पर पहुंच जाते हैं। होटलों से फेंका गया खाना उन्हें आकर्षित करता है, लेकिन इसमें मिली पॉलिथीन और प्लास्टिक की सामग्री उनके पेट में जाकर ब्लॉकेज पैदा कर देती है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, प्लास्टिक खाने से गोवंश में आंतों की रुकावट, संक्रमण और धीमी मौत जैसी समस्याएं हो जाती हैं।पिछले एक साल में बाड़मेर में कम से कम 50 गोवंश की मौत प्लास्टिक खाने से हुई है, जैसा कि स्थानीय गौशाला संचालकों का दावा है। रोजाना 10-15 बीमार गायों को बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार देर हो जाती है। होटलों का वेस्टेज अलग से कंपोस्ट करने या पशुओं को देने की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन वे सब कुछ मिलाकर फेंक देते हैं। इससे न केवल गायें मर रही हैं, बल्कि सड़कों पर दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं क्योंकि गोवंश कचरे की तलाश में मुख्य मार्ग पर आ जाते हैं "यह धार्मिक और नैतिक मुद्दा भी है। राजस्थान में गौवंश की पूजा होती है, लेकिन उनकी रक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। होटल मालिकों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
प्रशासन की लापरवाही और समाधान की मांग; नगर पालिका के अधिकारी इस समस्या से अवगत हैं, लेकिन कार्रवाई नाकाफी है। पालिका अध्यक्ष ने बताया कि होटलों को नोटिस जारी किए गए हैं और जुर्माना लगाया जा रहा है, लेकिन कई होटल मालिक नियमों की अनदेखी करते हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर को स्वच्छ रखने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बदतर हैं।स्थानीय लोग समाधान के रूप में सुझाव दे रहे हैं:
होटलों में वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम अनिवार्य किया जाए, जहां जैविक कचरे को कंपोस्ट बनाया जाए और गैर-जैविक को अलग रखा जाए। गोवंश के लिए अलग से चारा व्यवस्था और गौशालाओं को मजबूत किया जाए। होटल मालिकों पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी जाए। शहर में सीसीटीवी और वार्डन तैनात कर कचरा फेंकने पर निगरानी रखी जाए।