बाड़मेर में कुदरत का कहर: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से ईसबगोल-जीरे की फसल तबाह, सड़कों पर उतरा अन्नदाता!

बाड़मेर में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने मचाई तबाही। ईसबगोल की 80% और जीरे की 20% फसलें खराब। विधायक रविंद्र सिंह भाटी और हरीश चौधरी ने की मुआवजे की मांग। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Mar 20, 2026 - 13:00
बाड़मेर में कुदरत का कहर: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से ईसबगोल-जीरे की फसल तबाह, सड़कों पर उतरा अन्नदाता!
बाड़मेर में कुदरत का कहर: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से ईसबगोल-जीरे की फसल तबाह, सड़कों पर उतरा अन्नदाता!

बाड़मेर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर में बुधवार देर रात आई बेमौसम आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। करीब 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं और भारी ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी रबी की फसलों को बिछा दिया है। सबसे ज्यादा मार नकद फसलों—ईसबगोल और जीरे पर पड़ी है, जिससे किसान अब दाने-दाने को मोहताज होने की कगार पर हैं।

आधी रात को आया मौत का तूफान

बुधवार रात करीब 1 बजे जिले के मौसम ने अचानक करवट ली। तेज गर्जना के साथ शुरू हुई बारिश और ओलावृष्टि ने देखते ही देखते तबाही मचा दी। शुरुआती आकलन के अनुसार, ईसबगोल की फसल को करीब 80 फीसदी और जीरे की फसल को 20 फीसदी तक नुकसान होने का अनुमान है। विशेष रूप से बाड़मेर, गुड़ामालानी, धोरीमन्ना, नोखड़ा, शिव, गडरारोड, रामसर और चौहटन तहसील क्षेत्रों में फसलों का नामोनिशान मिट गया है।

विधायकों ने सरकार से की विशेष पैकेज की मांग

किसानों के इस संकट पर राजनीति भी तेज हो गई है। बायतु विधायक हरीश चौधरी और शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार से तुरंत विशेष गिरदावरी करवाकर मुआवजे की घोषणा करने की मांग की है। विधायकों का कहना है कि किसान पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबा है, ऐसे में यह प्राकृतिक आपदा उसके लिए दोहरी मार है।

प्रभारी मंत्री के निर्देश, प्रशासन का आकलन शुरू

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि प्रभावित इलाकों का तुरंत सर्वे कर रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाए। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से गिरदावरी के आदेश नहीं मिले हैं, लेकिन प्रशासन अपने स्तर पर नुकसान का प्रारंभिक आकलन कर रहा है।

सड़कों पर उतरे किसान: 'साहब, अब क्या खाएंगे?'

गडरारोड और गुड़ामालानी समेत कई इलाकों में किसान खराब फसलें लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। किसान प्रेमसिंह ने बताया, "हमने अपनी जमा-पूंजी इन फसलों में लगा दी थी, लेकिन अब हाथ में सिर्फ मिट्टी बची है।" किसानों ने मांग की है कि उन्हें मुआवजे के साथ-साथ कृषि ऋण और बिजली बिलों में भी राहत दी जाए।

मौसम का बदला मिजाज: 10 डिग्री गिरा तापमान

इस बारिश और आंधी का असर जिले के तापमान पर भी पड़ा है। पिछले दो दिनों में अधिकतम तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार को अधिकतम तापमान 28.3°C रहा, जिससे आम लोगों को गर्मी से तो राहत मिली है, लेकिन किसानों के लिए यह ठंडक आफत की तरह है। मौसम विभाग के अनुसार, अभी भी आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी।

Kashish Sain Bringing truth from the ground