चाची की बेरहमी से हत्या: गला घोंटा, सिर-चेहरे पर ताबड़तोड़ वार; 9 दिन झाड़ियों में पड़ा शव जानवरों ने नोचा, जेठ का लड़का उम्रकैद की सजा पाकर जेल पहुंचा
बाड़मेर में जेठ के लड़के मेघाराम ने चाची कमला की गला घोंटकर हत्या की, सिर पर वार किए, लूटपाट कर शव झाड़ियों में फेंका; 9 दिन बाद कंकाल मिला; कोर्ट ने उम्रकैद और 10 साल की सजा सुनाई।
बाड़मेर (राजस्थान): परिवार के ही एक सदस्य द्वारा अपनी चाची की निर्मम हत्या करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी ने चाची का गला घोंटकर हत्या की, फिर उनके सिर और चेहरे पर कई वार किए। इसके बाद लूटपाट कर शव को जंगल की कंटीली झाड़ियों में फेंक दिया। शव 9 दिन तक वहीं पड़ा रहा, जहां जंगली जानवरों ने उसे बुरी तरह नोच-खाया और केवल कंकाल ही बचा। बाड़मेर की एडीजे कोर्ट-2 ने इस जघन्य अपराध के लिए आरोपी जेठ के लड़के को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही लूट के जुर्म में अलग से 10 साल की कैद की सजा भी ठोकी गई। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया।
घटना की पूरी कहानी: 10 अप्रैल 2022 की खौफनाक रात यह दिल दहला देने वाली वारदात 10 अप्रैल 2022 को बाड़मेर जिले के गांव बांदरा में हुई। मृतका का नाम कमला था और उनके पति का नाम भोमाराम था। आरोपी मेघाराम पुत्र दलाराम, जो निवासी करणपुरा चोखला का रहने वाला है, कमला का जेठ का लड़का (भतीजा) था। मेघाराम अपनी चाची कमला के साथ बाड़मेर आया था। दोनों साथ में थे, लेकिन वापस घर लौटते समय मेघाराम ने कमला को मौत के घाट उतार दिया।आरोपी ने पहले कमला का गला घोंटकर उनकी हत्या की। इसके बाद बेरहमी से उनके सिर और चेहरे पर ताबड़तोड़ वार किए, ताकि पहचान मुश्किल हो जाए। हत्या के बाद मेघाराम ने कमला के पास से नकदी, जेवरात और अन्य कीमती सामान लूट लिया। शव को वह बीच जंगल में ले जाकर कंटीली झाड़ियों में फेंक आया। कमला का शव 9 दिन तक उसी हालत में पड़ा रहा। इस दौरान जंगली जानवरों ने शव को बुरी तरह नोच-खाया, जिससे शरीर का अधिकांश हिस्सा गल-सड़ गया और केवल कंकाल ही बचा रहा।शव की खोज 19 अप्रैल 2022 को हुई, जब स्थानीय लोगों को झाड़ियों में बदबू आई और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव बरामद किया, जो बेहद भयावह स्थिति में था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि हुई और गला घोंटने व सिर पर वार के निशान मिले।
पुलिस जांच और गिरफ्तारी; घटना की सूचना मिलते ही बाड़मेर पुलिस ने मामला दर्ज किया। प्रारंभिक जांच में कमला के साथ अंतिम बार मेघाराम को देखा गया था। पुलिस ने मेघाराम को हिरासत में लिया और पूछताछ की। आरोपी ने शुरू में इनकार किया, लेकिन सबूतों के सामने टूट गया और जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हथियार, लूटे गए सामान और अन्य सुराग बरामद किए।
कोर्ट में सुनवाई: 23 गवाह, 87 दस्तावेज और 16 सबूत मामले की सुनवाई बाड़मेर की एडीजे कोर्ट-2 में चली। न्यायाधीश पियूष चौधरी की अदालत में अभियोजन पक्ष ने मजबूत केस पेश किया। कुल 23 गवाहों के बयान लिए गए, जिनमें परिवार के सदस्य, स्थानीय लोग, पुलिस अधिकारी और मेडिकल विशेषज्ञ शामिल थे। अभियोजन ने 87 दस्तावेज और 16 भौतिक सबूत (आर्टिकल) कोर्ट में पेश किए, जिनमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक सैंपल, लूटा गया सामान और सीसीटीवी फुटेज (यदि उपलब्ध) शामिल थे।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी मेघाराम को हत्या (आईपीसी की धारा 302) और लूट (धारा 394/397) में दोषी पाया। कोर्ट ने कहा कि अपराध की प्रकृति बेहद क्रूर और सुनियोजित थी, इसलिए कठोर सजा जरूरी है।सजा का ऐलानआज (खबर की तारीख के अनुसार) न्यायाधीश पियूष चौधरी ने फैसला सुनाया:हत्या के लिए: आजीवन कारावास (उम्रकैद)।लूट के लिए: 10 साल की सश्रम कैद।दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। आरोपी को जुर्माना भी लगाया गया। मेघाराम को तुरंत जेल भेज दिया गया।
परिवार में मातम का माहौल है। कमला के पति भोमाराम और अन्य रिश्तेदारों ने न्याय मिलने पर राहत जताई, लेकिन कहा कि चाची की बेरहमी से हुई मौत का दर्द कभी कम नहीं होगा। गांव बांदरा और करणपुरा चोखला में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग परिवारिक रिश्तों में विश्वास की कमी पर अफसोस जता रहे हैं।