अजमेर में दवा कंपनी डायरेक्टर से 1 करोड़ से अधिक की ठगी: अफ्रीकी देशों में प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन के नाम पर हड़पे पैसे

अजमेर में मेलिरोन फार्मा कंपनी के डायरेक्टर दिनेश मुरजानी से सेनेगल के एजेंट सौलेमाने म्बेंगुए ने 7 अफ्रीकी देशों में 11 दवा प्रोडक्ट्स रजिस्टर्ड करवाने के नाम पर 1.05 लाख यूरो (लगभग 1.11 करोड़ रुपये) की ठगी की। 18 महीने बीतने के बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ और पैसे वापस नहीं किए गए। पुलिस ने क्रिश्चियन गंज थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Jan 6, 2026 - 12:23
अजमेर में दवा कंपनी डायरेक्टर से 1 करोड़ से अधिक की ठगी: अफ्रीकी देशों में प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन के नाम पर हड़पे पैसे

अजमेर (राजस्थान) से एक गंभीर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें एक फार्मास्युटिकल कंपनी के डायरेक्टर को विदेशी एजेंट ने अफ्रीकी देशों में दवाओं के रजिस्ट्रेशन के बहाने करोड़ों रुपये की चपत लगा दी। पीड़ित कंपनी के डायरेक्टर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, और पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना फार्मा इंडस्ट्री में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली ठगी के पैटर्न को उजागर करती है, जहां विदेशी मार्केट में एक्सपोर्ट के लिए रजिस्ट्रेशन की जरूरत का फायदा उठाकर ठग सक्रिय हो रहे हैं।

पीड़ित और कंपनी की जानकारी पीड़ित का नाम दिनेश मुरजानी (उम्र 61 वर्ष) है, जो अजमेर की सागर विहार कॉलोनी में रहते हैं। वे पंचशील क्षेत्र में स्थित मेलिरोन फार्मा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर हैं। यह कंपनी दवाओं का निर्माण और सप्लाई करती है, खासकर अफ्रीकी देशों में एक्सपोर्ट के लिए। अफ्रीकी मार्केट में दवाएं भेजने से पहले उन देशों की स्थानीय रेगुलेटरी अथॉरिटी से प्रोडक्ट्स का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होता है। रजिस्ट्रेशन के बिना दवाएं निर्यात नहीं की जा सकतीं।कंपनी के पास 11 अलग-अलग दवा प्रोडक्ट्स थे, जिन्हें 7 अफ्रीकी देशों में रजिस्टर्ड करवाना था। ये देश हैं:बुर्किना फासो,माली,नाइजर,कांगो ब्राजाविल (रिपब्लिक ऑफ कांगो),आइवरी कोस्ट (कोट डी'आइवोर),सेनेगल।

ठगी कैसे हुई? वर्ष 2023 में पीड़ित दिनेश मुरजानी से संपर्क किया गया सेनेगल स्थित एक कंपनी फार्मा डिस अफ्रीका के एजेंट सौलेमाने म्बेंगुए ने। एजेंट ने आश्वासन दिया कि वह इन 7 देशों में कंपनी के 11 प्रोडक्ट्स को रजिस्टर्ड करवा देगा। इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, एजेंट ने बैंक ट्रांसफर के माध्यम से पीड़ित से करीब 1,05,000 यूरो (लगभग 1 करोड़ 11 लाख 8 हजार 685 रुपये) की राशि ले ली।एजेंट ने दावा किया कि यह राशि रजिस्ट्रेशन फीस, डॉक्यूमेंटेशन और अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए है। पीड़ित ने पूरी राशि ट्रांसफर कर दी, लेकिन 18 महीने बीत जाने के बाद भी किसी भी देश में एक भी प्रोडक्ट रजिस्टर्ड नहीं करवाया गया। एजेंट लगातार टालमटोल करता रहा और संपर्क में भी कम होता गया। जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे, तो एजेंट ने कोई जवाब नहीं दिया और राशि लौटाने से इनकार कर दिया।

पुलिस कार्रवाई दिनेश मुरजानी ने अजमेर के क्रिश्चियन गंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। थाना एसएचओ अरविंद चारण के अनुसार, पुलिस ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब आरोपी एजेंट सौलेमाने म्बेंगुए और संबंधित कंपनी की भूमिका की गहन जांच कर रही है। चूंकि मामला अंतरराष्ट्रीय है, इसलिए पुलिस विदेशी एजेंसियों या इंटरपोल से भी सहायता ले सकती है।

बड़ा सवाल: ऐसी ठगी क्यों आम हो रही है? फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में अफ्रीकी देशों का मार्केट भारतीय कंपनियों के लिए आकर्षक है, लेकिन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया जटिल और महंगी होती है। कई बार लोकल एजेंट्स या कंसल्टेंट्स की जरूरत पड़ती है। ऐसे में फर्जी एजेंट्स मौका तलाशते हैं। अफ्रीका में फेक मेडिसिन और रेगुलेटरी मुद्दों की समस्या पहले से गंभीर है, लेकिन इस मामले में ठगी रजिस्ट्रेशन सर्विस के नाम पर हुई है।यह घटना भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए चेतावनी है कि विदेशी पार्टनर्स के साथ डील करते समय पूरी सत्यापन जरूरी है। पीड़ित कंपनी को अब न केवल आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि अफ्रीकी मार्केट में एक्सपोर्ट की योजना भी प्रभावित हुई है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.